पंच इंदियों का प्रशिक्षण ध्यान की शुरुआत.।

प्र●1●पंच इंदियों का प्रशिक्षण ध्यान की शुरुआत.।

03,December,2018

रामप्यारे नामक इंसान को अपनी नई नोकरी के कारण गाँव छोड़कर शहर आना पड़ा न ए शहर में प्रवेश किए हुए रामप्यारे ने अपने लिए एक किराये का फ्लैट ढूँढ़ लिया,फ्लैट का नाम था  अयोध्या फ्लैट के मालिक ने रामप्यारे को इस शर्त पर घर दिया कि उसने उसके साथ कुछ बच्चे भी रहेंगे रामप्यारे के पास और कोई विकल्प ना था तो उसने मालिक की शर्त मान ली अब नए घर में प्रवेश के साथ उसकी दिन चर्चा शुरू हो गई पहले दिन रामप्यारे ऑफिस से अयोध्या में थका हारा आता है वह आते ही उसे नींद लग जाती दूसरे दिन सुबह उठते ही वह किचन से चाय लेने जाता है चाय लेकर डाईग रूम में यह सोच कर आता है की टीवी देखते देखते चाई का मजा लिया जाए वहां कुछ बच्चों को देखता है जो चित्र बना रहे थे शुरू में उसे उनके चित्र देखते हुए बड़ा मजा आता है रामप्यारे को देखते ही बच्चे उसके पीछे पड़ जाते हैं कि पहले मेरा चित्र देखो पहले मेरा चित्र देखो वह उन्हें शांत करते हुए कहता है कि पहले हर एक अपना अपना नाम बताएं उन बच्चों के नाम थे चिप्पू टिंकू शत्रु शत्रु की और नुक्सा अपने नाम बताते ही वह फिर से झगड़ने लगते हैं और उसे परेशान करते हैं कि पहले मेरा चित्र देखो देखो मुझे कितने अंक मिलने चाहिए मेरा चरित्र सबसे अच्छा है, अच्छा है वह एक-एक करके उनके चित्र दिखाने की कोशिश करता है पहले बच्चे चीकू ने रामप्यारे को अपना चित्र दिखाया जो किसी इंसान का था उसने रामप्यारे से कहा मेरी चित्र से मिलो इससे शेक हँड करो, वह चाय पीते पीते चिपकू का चित्र देखने लगा चीकू के बाद टिंकू आया वह बीच में ही गुस्सा आया कि अब मेरा चित्र देखो मैंने दिवाली की मिठाइयां बनाई है रामप्यारे ने देखा कि उसने अलग अलग मिठाइयों के चित्र बनाए हैं टिंकू बहुत शोर मचाने लगा सिटी बचाने लगा और पूरे कमरे में दौड़ता रहा वह बच्चों में सबसे छोटा था पर सभी को सबसे ज्यादा परेशान करता था मंत्रू। बच्चों के बीच बिगड़ने लगता था श्री राम प्यारे की नजर छोटी सी बच्ची नकुशा पर पड़ी वह कोने में खड़ी अपने यार रही थी रामप्यारे उसके पास गया और उसे अपना चित्र दिखाने के लिए का राम प्यारे ने देखा कि नकुशा ने अलग-अलग अंगों के फूल बनाए वह उससे कहने लगी कि मेरे फूलों को सबसे ज्यादा अब तो मिलने चाहिए इनसे कितनी अच्छी सुगंध आती है वह कुशा की बातों पर मुस्कुरा दिया इतने में अक्की दौड़ता हुआ आया उसने रामप्यारे के साथ में रंगों का डिब्बा थंब मार्कर अपना चित्र दिखाते हुए गर्व से कहने लगा देखो मैंने इंद्रधनुष बनाया है मेरे पास सबसे ज्यादा रंगे इतने रंग किसी के भी पास नहीं है रामप्यारे सारे मेरे पास सबसे ज्यादा रंगे इतनी रंग किसी के भी पास नहीं रामप्यारे सारे बच्चों के चित्र देखते हुए चाय पी रहा था और परेशान भी हो रहा था अब बारी आई कत्रू कि वह अपनी पेंसिल से अलग-अलग भागों के चित्र बना रहा था उसके चित्र में ढोलक सरगी अमोनियम बांसुरी इत्यादि जैसे बागों के चित्र थे रामप्यारे ने उसका भी चित्र देखा आप सारे बच्चे रामप्यारे के पीछे पड़ गए कि बताओ किसका चित्र सबसे ज्यादा चाय किसे सबसे ज्यादा अंक मिलने चाहिए ऐसे में बात नहीं कर पा रहा था कि उसने बच्चों का शांत करने के लिए कहा कि मैं आपको कल बताओ कि किसकी तस्वीर सबसे अच्छी है दूसरे दिन फिर बच्चे उसके पास गये उसने निर्णय फिर से कल पर टाल दिया इस तरह रोज वह बच्चों को कल पर डालता रहा है या देखकर बच्चों ने अपना नाम ही अक्ल रख दिया उन्होंने देखा कि रामप्यारे हमेशा चाय पीता रहता है इसलिए मैं उसे आती भी बुलाने लगे आंटी का अर्थ लिविंग आंटी इस बीच मंत्रू दूसरे बच्चों के बीच झगड़ने लगा रहा था वह दूसरों के चित्र चुरा कर अपने बताता था दूसरे बच्चों के चित्र बिगाड़ने के लिए वह उन पर रंग चिराग देता था ताकि उन्हें अंक ना मिले रामप्यारे से उनकी चुगली भी करता था कई बार हम रामप्यारे मत्रू की बातों में आ जाता है और सब बच्चे दुखी हो जाते हैं कि अपना दुकान निकालें इसलिए वे सीखते चिल्लाते ड्राइंग रूम में शोरगुल करते कुछ देर बाद में फिर से चित्र निकालने लग जाते यह सब करते करते रामप्यारे का पूरा दिन कैसे बीत जाता है उसे पता भी नहीं चलता एनालाइज पढ़कर आप सोच रहे होंगे यह कितने बच्चे हैं तो जवाब सुन कर चुकी है मत कि यह आपके बच्चे हैं यह नाला जी के आपकी और आप जो हकीकत में है सुबह को भूलकर शरीर मान कर जी रहे हैं जब आप सोए को शरीर मानकर जीने लगते हैं तो क्या होता है यह इस एनालॉजी में स्पष्ट किया गया है इसे लालाजी में हर चीज प्रतीक है आइए समझें कि एनालाइज द्वारा में कौन सा इशारा किया गया है.।
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      प्रतीक                       ,     प्रतीकों की भाषा

अंकल,आँटी                    ,हम जो स्वयं को स्त्री यह  
                                       पुरुष मानकर जी रहे है।
फ्लैट अयोध्या                  ,इंसान का शरीर
रामप्यारे                          ,आप सेल्फ
सीता                              ,सत्य
छह बच्चे                         ,हमारी पाँच इंदियाँ और मन
चिंपू                               ,चमड़ी,त्वचा
टिंगू                               ,टंग यानी जुबान
कत्रू                               ,कान
मत्रू                                ,मन
अक्की                           ,आँखे
नकुशा                           ,नाक
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