प्र●1●आज हम आपको मंटो के बारे में जानकारी देते है.।
21,October,2018
◆पर जब नींद से बड़ा कोई नशा नहीं लेकिन नींद के रास्ते में भूख पड़ती है. भूख चाहे जिस्म की हो या रोटी की लेकिन इस भूख को मिटाने के लिए जब रोटी पर ही जिस्मानी मशक्कत होते देख मंटो पागल हो गए थे पर मंटो की लेखनी के साथ जितनी बेअदबी की गई उतनी शायद ही किसी के साथ की गई हो. लोगों ने दुत्कारा और कटघरे में भी कई दफ़े खड़ा किया, यहां तक कि लोगों ने साहित्यकार मानने से भी इंकार कर दिया था.।
◆क्आ लेकिन मंटो को पढ़ें तो महसूस होता है कि जब भीड़, रेप और लूट की आंधी में कपड़े की तरह जिस्मों को फाड़ रही थी. जब हवस और वहश का नज़ारा आंखों के सामने देख रहे थे तो मंटो पागल हो गए थे
कहते हैं नींद से बड़ा कोई नशा नहीं लेकिन नींद के रास्ते में भूख पड़ती है. भूख चाहे जिस्म की हो या रोटी की लेकिन इस भूख को मिटाने के लिए रोटी पर ही जिस्मानी मशक्कत होते देख मंटो पागल हो गए थे. ।
◆पर जब ज़मीन पर खिंची लकीरें लोगों की अक्ल और तन्कीद को अलग कर चुकी थीं और इंसान को इंसान नहीं गोश्त दिखने लगे थे तो मंटो पागल हो गए थे गरीबों के हाथ में जलती मशाल जैसी हैं इस कवि की लिखी नज़्में पर उनके चाहने वाले कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दर्द को अगर किसी ने समझा है तो वो मंटो ही थे. उस 'पागल' दिमाग से निकली कहानियां 'आपके यथार्थ' में छेद कर आपके खोखलेपन पर हंसती हैं. आज के ही दिन (11 मई 1912) को सआदत हसन मंटो का जन्म हुआ था।
【नमस्कार दोस्तों आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो लाइक कमेंट शेयर करें और फॉलो बटन को क्लिक करें प्लीज.।】
Comments
Post a Comment