प्र●1●पीपल के वृक्ष में देवता का वास होता है .।
05,September,2018
◆हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष का बड़ा ही महत्व हैं। हिंदू दर्शन की मान्यता है इसके पत्ते-पत्ते में देवता का वास रहता है। विशेषकर विष्णु का।
◆धार्मिक कारण,पर पीपल के वृक्ष के पूजन के पीछे रोचक धार्मिक कारण भी हैं। श्रीमद्भगवदगीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि ‘अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम, मूलतो ब्रहमरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे, अग्रत: शिवरूपाय अश्वत्थाय नमो नम:’ यानी मैं वृक्षों में पीपल हूं। पीपल के मूल में ब्रह्मा जी, मध्य में विष्णु जी व अग्र भाग में भगवान शिव जी साक्षात रूप से विराजित हैं। भारतीय परंपरा में भी पेड़ पौधों को देवताओं का रुप मानकर पूजा जाता है। इन्ही कारणों से पीपल को देवता मान कर पूजन किया जाता है।
क्या है पूजन का फल
◆पीपल के पेड़ में नियमित रुप से जल चढ़ाने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। शत्रुओं का नाश होता है साथ ही सुख संपत्ति, धन-धान्य, ऐश्वर्य, संतान सुख की भी प्राप्ति होती है। इसकी पूजा से ग्रह दोषों से भी निवारण मिलता है। कई लोग अमावस्या और शनिवार को पीपल वृक्ष की पूजा में विश्वास रखते हैं। ऐसा करने से सारी परेशानियां दूर होती हैं। पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से काफी लाभ मिलता है। हर दिन ये करना संभव नहीं हो पाए, तो प्रत्येक शनिवार भी को ये करना लाभदायक सिद्ध होता है। ऐसा करने से रुके और बिगड़े काम बन जाते हैं साथ ही जीवन में सफलता मिलती है।
क्या न करें
◆शास्त्रों में रविवार को पीपल पर जल चढ़ाना मना किया गया है, इससे जीवन में दरिद्रता आती है। इसलिए शनिवार को इस पर जल चढ़ाना श्रेष्ठ माना गया है। पीपल के वृक्ष को काटने की भी सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि ऐसा करने से पितरों को कष्ट मिलता है और वंशवृद्धि में भी रुकावट होती है। लेकिन किसी पूजा पवित्र के उद्देश्य से इस लकड़ी को काटने पर दोष नहीं लगता है।
पीपल की पूजा के लाभ
★ अमावस्या तिथि पर पीपल के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी का वास होता है। इसलिए इस तिथि पर पीपल पूजा से गरीबी दूर हो सकती है।
★स्कंद पुराण में बताया गया है कि पीपल की जड़ में विष्णु, तने में केशव, इसकी शाखाओं में भगवान नारायण, पत्तों में भगवान श्रीहरि और फलों में सभी देवी-देवताओं हमेशा निवास करते हैं।
★ पीपल की पूजा करने से मनुष्यों के हजारों पापों का नाश हो सकता है। पद्मपुराण के अनुसार पीपल को प्रणाम करने और उसकी परिक्रमा करने से आयु बढ़ती है।
★ पीपल को जल चढ़ाने से कुंडली के सभी दोष शांत होते हैं और दुर्भाग्य से मुक्ति मिल सकती है।
★ पीपल में पितरों का वास माना जाता है। इसमें सब तीर्थों का भी निवास होता है। इसीलिए मुंडन आदि पवित्र संस्कार पीपल के नीचे करवाने की परंपरा है।
★ शनि की साढ़ेसाती या ढय्या से बचने के लिए हर शनिवार पीपल को जल चढ़ाकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए।
★शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाने से अक्षय पुण्य मिलता है। बड़ी-बड़ी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे वैसे तो रोजाना सरसों के तेल का दीपक जलाना अच्छा काम है। यदि किसी कारणवश ऐसा संभव न हो तो शनिवार की रात को पीपल के नीचें दीपक जरूर जलाएं।
★पीपल के तने पर सफेद कच्चा सूत लपेटने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
★पीपल का पेड़ ही एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो कभी कार्बन डाईआक्साइड नहीं छोड़ता वह 24 घंटे आक्सीजन ही छोड़ता है इसलिए इसके पास जाने से कई रोग दूर होते हैं और शरीर स्वस्थ रहता है।
★अमावस्या और शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करने से पेरशानियां दूर होती
पीपल की पूजा करने का तरीका
★सुबह नहा धोकर साफ शुद्ध कपड़े पहने। शुद्ध और पवित्र जगह पर स्थित Pipal के पेड़ की पूजा करें। सबसे पहले जड़ों में गाय का दूध , गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ायें। चन्दन से टिका करें , अक्षत , मौली , जनेऊ , पुष्प आदि अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में फल मिठाई आदि चढ़ायें।
★दक्षिणा अर्पित करें। धूप और दीपक जलायें। हाथ जोड़कर ब्रह्मा विष्णु महेश से अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इस मन्त्र का उच्चारण करें –
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम: ।।
आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम् ।
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत: ।।
इसके बाद ब्रह्मा विष्णु महेश की आरती करें। थोड़ा पूजा का जल घर पर लाकर घर में छिड़काव करें। यह जल सौभाग्य की वृद्धि करने वाला होता है.।
पीपल की पूजा में क्या ध्यान रखना चाहिए
★रविवार के दिन Peepal की पूजा नहीं करनी चाहिए। इससे दरिद्रता आती है।
★रात को आठ बजे के बाद पीपल के आगे दिया नहीं जलाना चाहिए। आठ बजे के बाद देवी लक्ष्मी की बहन दरिद्रता का वास माना जाता है।
★पीपल घर से दूर होना चाहिए। इसकी छाया घर पर नहीं पड़नी चाहिये।
पीपल के पेड़ का औषधीय महत्त्व
◆Pipal के पेड़ के सभी अंग औषधि के रूप में काम आ सकते है । आयुर्वेदिक दवाओं में इसके पत्ते , छाल , जड़ , फल आदि सभी अंग काम में लिए जाते हैं। इसका उपयोग कई प्रकार के संक्रमण , घाव भरने में, फर्टिलिटी बढ़ाने आदि में किया जाता है।
पीपल के पत्ते
★Peepal के पत्ते Pipal Leaves का उपयोग पीलिया तथा कब्ज ठीक करने में किया जाता है। यह हृदय को ताकत देने वाली होती है। बुखार और रक्तस्राव में लाभदायक होती हैं।
★पीपल के पत्ते के रस की कुछ बूँद नाक में डालने से नकसीर बंद हो जाती है।
★पीलिया में पीपल की 4 -5 कोमल पत्तियों का रस निकाल लें। इसे पानी में मिला लें थोड़ी मिश्री मिला लें। इसे सुबह शाम 4 -5 दिन लें।
पीपल की छाल
★पीपल की छाल का काढ़ा कई प्रकार से काम आता है। छाल का काढ़ा रक्तपित्त , घाव , योनि के रोग , पेशाब की परेशानी में काम आता है। यह त्वचा की बीमारी , जोड़ों के दर्द , अल्सर में भी लाभदायक होता है।
★छाल को दूध में उबाल कर पीने से यौन शक्ति बढ़ती है। पीपल की छाल कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवा बनाने के काम आती है। इसका बारीक़ पेस्ट लगाने से फोड़े फुंसी , कटने या जलने पर लगाने से लाभ होता है।
★पीपल की छाल का काढ़ा मुंह के छाले , पित्ती , स्वप्नदोष आदि मिटाता है। छाल के काढ़े से गरारे करने से दांत के दर्द में आराम आता है। पीपल की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
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