प्र●1● गोला का मतलब,नाभि खिसकना 5 मिनट में सही करें.।
04,September,2018
◆गोला का मतलब,नाभि खिसकना जिसे धरण पड़ना और धरण गिरना भी कहते है, इस रोग में पेट में दर्द, दस्त, पेट फूलना और मरोड़ जैसी परेशानी होने लगती है। अक्सर पेट दर्द ठीक करने की दवा और ट्रीटमेंट के बाद भी दर्द से छुटकारा नहीं मिलता, ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को समझ नहीं आता की ये दर्द किस कारण हो रहा है। ऐसे में इसके लक्षण की पहचान कर के ही सही तरीके से नाभि का इलाज हो सकता है,पहले के समय में हमारे दादा दादी घर पर जाँच कर के नाभि टलने के बारे में जान लेते थे और बिना दवा के देसी तरीका अपना कर नाभि खिसकने का उपचार कर लेते थे।, बहुत से लोग धरण का इलाज के लिए झाड़ा, मंत्र और टोटके का सहारा लेते है आज इस लेख में हम नाभि में दर्द ठीक करने के लिए योग आसान और उपाय जानेंगे,धरण गिरने की समस्या वैसे तो किसी को भी हो सकती है पर महिलाओं में ये परेशानी अधिक देखी जाती है, पुरुषों में नाभि हटने की समस्या ज्यादातर बाईं तरफ होती है और महिलाओं में ये दायें तरफ जादा होती है,आइये जानते है नाभि कैसे ठीक करें.।
ऊपर की तरफ
◆यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो यकृत प्लीहा आमाशय अग्नाशय की क्रिया हीनता होने लगती है ,इससे फेफड़ों-ह्रदय पर गलत प्रभाव होता है, मधुमेह, अस्थमा,ब्रोंकाइटिस -थायराइड मोटापा -वायु विकार घबराहट जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।
नीचे की तरफ
◆यही नाभि मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे अधो अंगों की तरफ चली जाए तो मलाशय-मूत्राशय -गर्भाशय आदि अंगों की क्रिया विकृत हो अतिसार-प्रमेह प्रदर -दुबलापन जैसे कई कष्ट साध्य रोग हो जाते है, फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं,स्त्रियों के उपचार में नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया जाये, इससे कई वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो जाती है ।
बाईं ओर
◆बाईं ओर खिसकने से सर्दी-जुकाम, खाँसी,कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।
दाहिनी ओर
◆दाहिनी तरफ हटने पर अग्नाशय -यकृत -प्लीहा क्रिया हीनता -पैत्तिक विकार श्लेष्म कला प्रदाह -क्षोभ -जलन छाले एसिडिटी (अम्लपित्त) अपच अफारा हो सकती है।
नाभि कैसे स्थान पर लाये।
★ज़मीन पर दरी या कम्बल बिछा ले। अभी बच्चो के खेलने वाली प्लास्टिक की गेंद ले लीजिये। अब उल्टा लेट जाए और इस गेंद को नाभि के मध्य रख लीजिये। पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। खिसकी हुई नाभि (धरण) सही होगी। फिर धीरे से करवट ले कर उठ जाए, और ओकडू बैठ जाए और एक आंवला का मुरब्बा खा लीजिये या फिर 2 आटे के बिस्कुट खा लीजिये। फिर धीरे धीरे खड़े हो जाए।
★ कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनों पैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। 3-3 बार करने के बाद नाभि सेट हो जाएगी।
★सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है हैं।
★नाभि सेट करके पाँव के अंगूठों में चांदी की कड़ी भी पहनाई जाती हैं, जिस से भविष्य में नाभि टलने का खतरा कम हो जाता हैं। अक्सर पुराने बुजुर्ग लोग धागा भी बाँध देते हैं।
★नाभि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सोंफ, गुड समभाग के साथ मिलाकर प्रात: खाली पेट खायें। अपने स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी। और भविष्य में नाभि टलने की समस्या नहीं होगी।
नाभि या धरन ठीक करने का मंत्र
■बहुत से लोग जो नाभि टलने के रोग से पीड़ित रहते है और बार बार मुझसे धरण /नाभि ठीक करने के उपाय पूछते है उनके लिए निम्न मंत्र विधि दे रहा हु प्रयोग करे और लाभ उठाएं ।
मंत्र
★ॐ नमो नाड़ी नाड़ी नौ सै बहत्तर सौ कोस चले अगाडी डिगे न कोण चले न नाड़ी रक्षा करे जति हनुमंत की आन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा ।
■विधि :- इस मंत्र को ग्रहण , दिवाली की महानिशा बेला में धुप दीप देकर 108 जप करके सिद्ध करले । कच्चे सूत के धागे में 9 गांठ लगाले उसे छल्ले की भांति बनाले उसे रोगी की नाभि पर रखकर इस मंत्र को 108 बार पढ़ते हुए नाभि के ऊपर फूक मारने से धरण ठिकाने पर आ जाती है .।
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