हीरा को केसे पीचाने और कहा जादा मीलते है हीरा .।

प्र●1हीरा को केसे पीचाने  और कहा जादा मीलते है हीरा .।।

26july,2018

◆जेवर पहनना सभी को पसंद होता है और अब तो मर्द और औरतों दोनों के लिए अलग अलग खास किस्‍म के जेवर उपलब्‍ध हैं ज्‍वेलरी में भी डायमंड ज्‍वेलरी का एक अपना क्रेज होता है लेकिन हम में सभी के मन में ये शक बना रहता है कि हमने जो हीरा खरीदा है वो असकी है या नकली अब हम ज्‍वैलर जैसे एक्‍सपर्ट या ट्रेंड तो हैं नहीं जो विभिन्‍न तरीकों से जांच कर बता देंगे कि हमारे पास मौजूद हीरा असली है या नहीं तो कैसे करें अपना शक दूर इसका हल हमारे पास है बस हमारे बताये चार तरीकों से परखिये और पता चल जायेगा की आपका हीरा असली है या नकली इसके लिए आपको हीरे को मुंह के सामने लाना है और भाप निकालनी है जैसे आप कभी कभी अपने चश्‍में के ग्‍लास को साफ करने के लिए करते हैं अगर हीरे पर भाप जमे तो समझ लीजिए वो नकली है और यदि भाप माइश्‍चर में बदल जाये तो मान लीजिये कि आप असली हीरे के मालिक हैं!

इंद्रधनुष टेस्‍ट

◆हीरे के कोणों से आरपार देखिए अगर इंद्रधनुष की तरह अलग अलग रंग दिखाई दें तो हीरा अकली है, पर अगर कोई रंग ना दिखे और केवल सफेदी दिखे तो समझ लीजिए आप नकली पत्‍थर थामे हैं पानी से परीक्षा हीरे को पानी में डालिए अगर डूब जाये तो असली और तैरने लगे तो नकली!

◆हीरे की चमक हर किसी को अपनी ओर आ‍कर्षित करती है. जानिए ऐसे बेशकीमती हीरों के बारे में जिनकी दुनिया दीवानी है !

★द मिलेनियम स्टार
कैरेट> 203.04
देश >डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो
साल> 1990
खोज के बाद इस खूबसूरत हीरे को डी-बियर ने खरीद लिया. इसके बाद हीरा कंपनी स्टाइनमेट्ज़ ग्रुप की सदस्य कंपनी एस्कॉट डायमंड को इसकी कटाई और आकार देने में 3 साल लगे. डी-बियर के दिवंगत चेयरमैन हैरी ऑफेनहाइमर ने इस हीरे के बारे में कहा था कि "मेरी ज़िंदगी का देखा ये सबसे खूबसूरत हीरा है.!

★ द रेड क्रॉस
कैरेट>205.07
देश  > दक्षिण अफ्रीका
साल>1905
ये खूबसूरत हीरा अपने कनारी पीले रंग के लिए जाना जाता है. 205.07 कैरेट का ये हीरा तकिये के आकार में काटा गया था. अपनी तरह का ये एक नायाब हीरा था.!

★द डी-बियर
कैरेट>234.65
देश>दक्षिण अफ्रीका
साल> 1888
साल 1988 में दक्षिण अफ्रीका में ये हीरा खोजा गया. किम्बर्ली परिसर में पाया गया है सबसे बड़ा हीरा था और दुनिया में ये 8वां सबसे बड़ा हीरा है.!

> द जुबली
कैरेट> 245.35
देश>दक्षिण अफ्रीका
साल> 1985
1895 में दक्षिण अफ्रीका की जेगर्सफॉन्टेन खान में द जुबली हीरा मिला. वास्तव में द जुबली हीरे को रिट्ज के नाम से जाना जाता है. दरअसल इसको ये नाम दक्षिण अफ्रीका के फ्री स्टेट प्रांत के राष्ट्रपति फ्रांसिस विलियम रिट्ज के नाम पर मिला.!

★द सेंटेनरी
कैरेट> 273.85
देश  > दक्षिण अफ्रीका
साल > 1986
डि-बियर का एक और बेशकीमती हीरा जिसे 17 जुलाई 1986 में खोजा गया. इसका वास्तविक पत्थर 599 कैरेट का था. फिलहाल इसके मालिक, स्थान और इसकी कीमत का अंदाज़ा किसी को नहीं है. लेकिन 1991 में इसकी कीमत 10 करोड़ डॉलर आंकी गई थी!

★द स्प्रिट ऑफ दे ग्रिसोगोनो
कैरेट>312.24
देश  >सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक

◆हीरा कैसे बनता है और असली हीरे को कैसे पहचानें
हीरे सदियों से राजसी वैभव और विलासिता के प्रतीक रहे हैं भारत हजारों साल से इनके कारोबार का केंद्र रहा है रोमन लोग इन्हें ‘भगवान के आंसू’ कहते थे>1700 के दशक के बाद से भारत विश्व का प्रमुख हीरा उत्पादक देश नहीं है, इसके बावजूद भारत में हीरे का खनन जारी हैl 2013 में, भारत की बड़ी औद्योगिक खदानों और कई छोटी खदानों को मिलाकर केवल 37,515 कैरेट हीरे खनन किए गए थे जो उस वर्ष पूरे विश्व के उत्पादन 132.9 मिलियन कैरेट के एक प्रतिशत के दसवें हिस्से से भी कम था!

◆बहुत से लोग कहते हैं कि विश्व के पहले हीरे की खोज आज से 4000 साल पहले भारत के गोलकोंडा क्षेत्र (आधुनिक हैदराबाद)) में नदी के किनारे की चमकदार रेत में हुई थी पश्चिमी भारत के औद्योगिक शहर सूरत में दुनिया के 92% हीरों को काटने और पॉलिश करने का काम किया जाता है और इस काम के कारण दुनिया में करीब 500,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है हीरा किस चीज का बना होता है हीरा एक पारदर्शी रत्न होता है यह रासायनिक रूप से कार्बन का शुद्धतम रूप है इसमें बिल्कुल मिलावट नहीं होती है, यदि हीरे को ओवन में 763 डिग्री सेल्सियस पर गरम किया जाये, तो यह जलकर कार्बन डाइ-आक्साइड बना लेता है तथा बिलकुल भी राख नहीं बचती है, इस प्रकार हीरे 100% कार्बन से बनते हैं हीरा रासायनिक तौर पर बहुत निष्क्रिय होता है एव सभी घोलकों में अघुलनशील होता है इसका आपेक्षिक घनत्व 3.51 होता है!

◆हीरा इतना मजबूत क्यों होता है हीरे में सभी कार्बन परमाणु बहुत ही शक्तिशाली सह-संयोजी बन्ध द्वारा जुड़े होते हैं, इसलिए यह बहुत कठोर होता है हीरा प्राक्रतिक पदार्थो में सबसे कठोर पदा‍र्थ है इसमें उपस्थित चारों इलेक्ट्रान सह-संयोजी बन्ध में भाग लेते हैं तथा एक भी इलेक्ट्रान स्वतंत्र नहीं होता है इसलिए हीरा ऊष्मा तथा विद्युत् का कुचालक होता है
हीरे विभिन्न आकार के हो सकते हैं!

◆कहां बनते हैं हीरे वैज्ञानिकों के मुताबिक जमीन से करीब 160 किलोमीटर नीचे, बेहद गर्म माहौल में हीरे बनते हैंl  इसके बाद ज्वालामुखीय गतिविधियां इन्हें ऊपर की ओर लाती है ग्रहों या पिंडों की टक्कर से भी हीरे मिलते हैं  हीरे अथाह गहराई में बहुत ज्यादा दबाव और तापमान के बीच कार्बन के अणु बेहद अनोखे ढंग से जुड़ते हैं और हीरे जैसे दुलर्भ पत्थर में बदलते हैं!

◆जानें 5G नेटवर्क की विशेषताएं क्या हैं कैसे पहचाने असली और नकली हीरे को अमेरिका के जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट के शोध के मुताबिक बेहद गहराई से निकलने वाले हीरे रासायनिक रूप से शुद्ध होते हैं और ये अद्भुत रूप से पारदर्शी होते हैंl प्राकृतिक हीरों और फैक्ट्री में बनाए गए हीरों के बीच फर्क बताना बहुत ही मुश्किल है  केवल एक खास उपकरण से असली हीरे की पहचान होती है हालांकि निम्न प्रकार भी असली-नकली हीरे की पहचान की जा सकती है 
प्रसिद्द कोहिनूर हीरे का इतिहास!

◆कहते हैं कि हीरा है सदा के लिए. वजह ये कि ये बेहद सख़्त होता है. गलता नहीं, घिसता नहीं. असल में हीरा दुनिया की सबसे सख़्त चीज़ होती है. इसे सिर्फ़ हीरा ही काट सकता है.हीरे की मदद से ही दुनिया की तमाम सख़्त चीज़ों को काटा-छांटा जाता है. ज़मीन के अंदर चट्टानें काटनी हों, समंदर के भीतर खुदाई करनी हो, सब जगह हीरे का इस्तेमाल होता है.मगर अब इंसान को हीरे से भी सख़्त चीज़ की ज़रूरत है. आज वैज्ञानिक ऐसी चीज़ बनाने में जुटे हुए हैं, जो हीरे से भी सख़्त हो, भारी से भारी दबाव झेल सके.जर्मनी के बवेरिया सूबे की एक प्रयोगशाला में कुछ वैज्ञानिकों को इस दिशा में कामयाबी मिल गई है.नतालिया डुब्रोविंसकिया एक छोटी सी मशीन के अंदर इस चीज़ को धरती के भीतर के दबाव से भी चार गुना दबाव डालकर सहने की ताक़त का अंदाज़ा लगाने में जुटी हैं.
आपको ये भी रोचक लगेगा मंगल पर मिली 'झील', जीवन की उम्मीद कितनी अंतरिक्ष में महाशक्तियों को चुनौती देता ये नन्हा सा मुल्क़ कहानी दुनिया के 'सबसे इकलौते आदमी' की वोटों की गिनती शुरू, कौन बनेगा पाकिस्तान का पीएम हमारी धरती पर सबसे ज़्यादा दबाव होता है धरती की कोख में. वहां इस क़दर दबाव होता है कि उससे चट्टानें सिर्फ़ टूट ही नहीं जातीं हैं, बल्कि पिघल जाती हैं.वैसे सख़्त चीज़ों में इंसान की दिलचस्पी बहुत पुरानी है. आदि मानव ने सख़्त पत्थरों की मदद से ही मुलायम पत्थरों को तराशकर हथियार बनाए थे आज से क़रीब दो हज़ार साल पहले जब इंसान ने लोहे की खोज की, तो मानो उसकी तलाश पूरी हो गई. कई सदियों तक लोहे को ही दुनिया की सबसे सख़्त चीज़ माना जाता रहा. फिर अठारहवीं सदी में हीरे की ख़ूबी का पता चला.!

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