हर इंसान अपने जीवन मे आगे बढ़ना चाहता है परत्याग की भावना अत्यंत पवित्र है यदि हमें जीना है ,तो कैसे जिएँ .।
प्र●1●हर इंसान अपने जीवन मे आगे बढ़ना चाहता है परत्याग की भावना अत्यंत पवित्र है यदि हमें जीना है ,तो कैसे जिएँ .!
23,july,2018
◆हर इंसान अपने जीवन मे आगे बढ़ना चाहता है पर वह ये नहीं जानता कि उसकी क्षमता कया है और वह आखिर किस तरह की मेहनत से आगे बढ़ सकता है? आप भी सफलता के शिखर पर पहुंचना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी मेहनत लाज़मी है. हर इंसान वह सब कुछ पाने की इच्छा रखता है, जो इस जीवन को जीने के लिए जरूरी है. मगर वो ये नहीं जनता कि आखिर उसको ये कामयाबी और सुख सुविधाएं आखिर कैसे मिल सकेंगी. तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अगर आप एक बार त्यागने की ठान लें, तो आपको सबसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. तो देर किस बात की दोस्तों चलिए जानते हैं वो कौन सी चीज़ें है जिन्हें त्याग कर हम ख़ुशी भरपूर ज़िन्दगी जी सकते हैं.!
◆त्याग की भावना अत्यंत पवित्र है त्याग करने वाले पुरुषों ने ही संसार को प्रकाशमान किया है जिसने भी जीवन में त्यागने की भावना को अंगीकार किया, उसने ही उच्च से उच्च मानदंड स्थापित किए हैं सच्चा सुख व शांति त्यागने में है, न कि किसी तरह कुछ हासिल करने में।गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि त्याग से तत्काल शांति की प्राप्ति होती है और जहां शांति होती है, वहीं सच्चा सुख होता है मनुष्य अपने जीवन में सारा श्रम भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति में ही लगा देता है वह अपने सीमित जीवन में सभी कुछ पा लेना चाहता है इसी में सारा जीवन खप जाता है वह जितना भौतिक लाभ प्राप्त करता जाता है, उसकी सांसारिक तृष्णा उतनी ही बलवती होती जाती है। उसे शांति से बैठने नहीं देती उसकी बेचैनी को बढ़ाती रहती है मनुष्य जीवन की कुछ मूलभूत आवश्यकताएं होती हैं, उनकी पूर्ति तो आवश्यक है उनके बिना तो जीवन की निरंतरता को बनाए रखना असंभव है इस निरंतरता को बनाए रखने के लिए प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति तो ईश्वर करता ही रहता है उन मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाने के पश्चात फिर मनुष्य को क्या चाहिए बस यहां पर रुककर विचारने की आवश्यकता होती है कि अब हमें किस मार्ग की ओर बढ़ना है ईश्वर की अनुभूति करने और समाज में उच्च मानदंड स्थापित करने के लिए त्याग की भावना को अंगीकार कर, उस पथ पर बढ़ने की आवश्यकता होती है उस मार्ग में व्यक्तिगत व शारीरिक सुखों का त्याग करना होगा उन सभी आसक्तिओं को छोड़ना होगा, जो मानव जीवन को संकीर्णता की ओर ले जाने वाली होती है तब यही त्याग वृत्ति अंत:करण को पवित्र कर भीतर के तेज को देदीप्यमान करती है भारत में त्याग की परंपरा पुरातनकाल से चली आ रही है आसक्ति से विरत हो जाने वालों की यहां पूजा की जाती है भगवान राम द्वारा अयोध्या के राज्य को एक क्षण में त्याग देने जैसे स्थापित किए गए आदर्श को संसार पूजता है राज्य का त्याग कर वन में जाने से उन्होंने समाज में उच्चतम मानदंड स्थापित किया साथ ही लोगों को धर्म, अध्यात्म, ज्ञान व भक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा भी प्रदान की त्याग से मनुष्य ईश्वर को प्राप्त कर सच्चे सुख व शांति का लाभ पाता है, वहीं समाज को भी उच्च आदर्शे के मानदंड बरकरार रखने की प्रेरणा प्रदान करता है.!
◆यदि हमें जीना है ,तो कैसे जिएँ और किस उद्देश्य के लिए जिएँ ,इसके लिए , हमें सर्वोत्तम मार्ग ढूंढ लेना चाहिए जीवन की इस समस्या को हमें विभिन्न प्रकार से देखना है हम यहाँ क्यूँ आये हैं ,हमें किस तरह जीना चाहिए और जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए |तीन शब्दों में यदि कहें तो “जीवन है जीने के लिए,प्रेम के लिए और त्याग करने के लिए उचित रूप से और सही तरह से ये सब करना ही बुद्धिमत्ता है में आपका ध्यान दस सिद्धांतों की ओर खींचना चाहता हूँ ,योग के दस धर्मोपदेश ,पांच”क्या न करे” ( इनसे बचना है ) और पांच “क्या करें ” (इनका पालन करना है ),(अनुचित और उचित ),पहली बात :हमें हिंसा से बचना चाहिए यदि हम हिंसा से दूर रहते हैं तो हम शांत रहेंगे अहिंसा -जैसा की आप को याद हो ,महात्मा गाँधी द्वारा दी गयी महान शिक्षा है उन्होंने लोगों को अहिंसा की शक्ति को समझने में सहायता की अधिकतर हम सोचते हैं की यदि कोई हम पर वर करता है तो हमें भी पलट कर वर करना चाहिए पर अहिंसा द्वारा व्यक्ति सुरक्षित रहता है ,चाहें तो अगली बार जब कोई समस्या हो तो इसे प्रयोग कर देखें दूसरी बात,जिसे हमें छोड़ना चाहिए ,वह है झूठ बोलना हमें सत्यवादी होना चाहिए ,जब हम सच नहीं बोलते हैं तो सब कुछ बहुत जटिल हो जाता है , आप भूल जाते हैं की किसको अपने क्या बोला है ,अत: अच्छा यही है कि हम सत्य का पालन करें तब आप के पास एक अति सरल विवरण होगा और यह आपको आन्तरिक शक्ति देगा ,तीसरी बात जो हमें नहीं करनी है वो है :चोरी करना , मेरे विचार से तो ऐसा होना ही चाहिए अत:हम इस पर विस्तार से बात नहीं करेंगें
चतुर्थ : अनियंत्रित गतिविधियों को जीवन के विभिन्न चरणों में दूर रखना चाहिए जैसे ब्रहमचर्य का पालन हो -उर्जा शक्ति को नियंत्रित करने के लिए |इसे हम स्व-नियंत्रण कह सकते हैं ,और स्व को, जीवन ऊर्जा को नियंत्रित करने से ,हम एक सशक्त एवं फलप्रद जीवन बना सकते हैं , पांचवी और अंतिम बात है कि हमें आवश्यकता से अधिक संग्रह नहीं करना चाहिए , कहा जाता है कि पश्चिम में रहने वाले व्यक्ति के पास दस हज़ार चीजें होती हैं ,और में आपको अपने अनुभव से बता सकता हूँ की उनमें से घर के लिए अधिकांश बेकार होती हैं जब आप घर जाएँ ,जरा चीजें गिनें ,गिनें कि कितनी फालतू चीजें आपके घर पर हैं तो हमें “काफी “का स्तर ढूंढ लेना चाहिए -(-कि ) हमारे लिए काफी क्या है . तो ये तो वो बातें हैं ,जिनका हमें त्याग करना हैं –तो वे कोंन सी बातें हैं जो हमें करनी हैं सर्वप्रथम ,हमें शुद्धता /पवित्रता का पालन करना चाहिए. शुद्धता-बाहरी और आन्तरिक -शारीरिक और मानसिक शुद्धता . हमें संतोष का अभ्यास करना चाहिए -हमें संतुष्ट रहना चाहिए मुझे नहीं पता यहाँ क्या होता है,पर ज्यादातर लोग शिकायत करते रहते हैं,वो भी बिना किसी कारण के सारी सूचना प्रणाली ,मिडिया ,हमें यही समझाने की यही कोशिश करती है कि हमें और ,और ज्यदा की इच्छा रखनी चाहिए ज्यादा अच्छा है कि हम संतुष्टि के सिद्धांत को अपनाएं तीसरी बात जिसका हमें अभ्यास करना चाहिए ,वो है सीधी -सादी जीवन शैली सहज जीवन शैली ,धर्म के बहुत निकट है अधिकतर हम अपने जीवन को बाहरी तौर पर बहुत कठिन बना देते हैं और हम कह सकते हैं कि –अन्दर से मूर्ख बन जाते हैं अत:ज्यादा अच्छा है कि एक सादा जीवन हो और उच्च विचार /सोच हो |
चतुर्थ है ,सीखना,आध्यात्मिक अध्ययन /सीख . हमें समझना चाहिए कि हम कौन हैं ,हमारा सम्बन्ध किससे हैं ,हमारा लक्ष्य क्या है,इसकी हमें पहचान हो इस सन्दर्भ में सूचना का अर्थ है कि मैं एक आत्मा हूँ ,मैं देह नहीं हूँ :और ज्ञान का अर्थ है कि मैं ईश्वर से जुड़ा हुआ हूँ और जब हम शास्त्रों -बाइबल,भगवदगीता का अध्ययन करते हैं या ईश्वरीय वाणी सुनते हैं -तब बहुत उच्च सिद्धांतों से जुड़ जाते हैं ,और अंत में योग के ये दस धर्मोपदेश बताते हैं : ईश्वर प्रनित्हना, आराधना ,ईश्वर की सेवा है ,इस प्रकार एक बहुत ही साधारण ,सामान्य जानकारी जैसे –जीवन को परिपूर्ण कैसे बनाए ,स्वयं को नियंत्रित कैसे करें – के द्वारा हम ईश्वर की सेवा कर सकते हैं यही हमारा ध्यान होना चाहिए ,यही हमारा अभ्यास और यही हमारी आशा होनी चाहिए .!
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