प्र●1●तेज विकास के दो महारथी.।
16,july,2018
◆ प्रार्थना और ध्यान मानसिक और आध्यात्मिक स्वार्थ दोनों के अचूक नुस्खे हैं प्रार्थना करने से हमें अपनी समस्या समझने और उसे समझाने की युक्त मिलती है प्रार्थना करने से हमारे अंदर वरदान प्राप्त होता है प्रार्थना में कुदरत के साथ जुड़ने वाला वह बेहतर यंत्र है जिससे हम कुदरत को अपनी जरूरत बता देते हैं और इसके बाद कुदरत हमारी जरूरत पूरी करने की तैयारी में जुट जाती है सेट आँगस्टिन ने प्रार्थना के संदर्भ में कहा था ऐसी प्रार्थना करें जिससे सब कुछ ईश्वर पर निर्भर करता है ऐसे काम करें जैसे सब कुछ आप पर निर्भर करता हूं प्रार्थना का एक अन्य लाभ यह है कि यह हमें व्यापार दृष्टिकोण प्रदान करती है यह हमारे भीतर परिवर्तन ला कर हमें आध्यात्मिक सत्ता का ज्ञान कराती है यह हमें आवश्यक करती है कि हम अकेले नहीं हैं बल्कि हमारे साथ परमसत्ता की सद्भावना है ध्यान और प्रार्थना को लेकर ध्यान विशेष ने बड़ी अच्छी बात कही है प्रार्थना वह जवाब ईश्वर से अपनी बात करते हैं ध्यान वह जब आप ईश्वर की बात सुनते हैं ध्यान के दौरान आप अपने मन को विचारों से रहित बनाते हैं या आप अपने विचारों के साक्षी बनते हैं आप अपने मन को एकाग्र करते था कि आप कुदरत के संकेतों को पकड़ सके ध्यान करने पर आप अपने मन को अधिक गहराई से जाने लगते ध्यान से मानसिक संतुलन बेहतर होता है और मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि होती है गौतम बुद्ध ने कहा यह ध्यान करने से प्रज्ञा का जन्म होता है ध्यान ना करने से अज्ञान की आवश्यकता बनी रहती है अच्छी तरह जान ले कि कौन सी चीज आपको आगे ले जाती है और कौनसी पीछे फिर भी व्यक्ति ओर ले जाने वाला मार्ग चुने.!
ध्यान द्वारा अपने जीवन का लक्ष्य उपाय.
◆ हर एक के जीवन एक लक्ष्य होता है ऐसे में सवाल यह उठता है कि हर एक के जीवन का लक्ष्य क्या है यह लक्ष्य स्वयं को जानना जवाब को सत्य समझना कि तुम खुश नहीं हो तो आपको ऐसा ज्ञान समझ में नहीं आता बिना ज्ञान के सब की चाहत होती है कि वह किसी न किसी चीज नाम पर जाति राशि रिश्ते या अपने शरीर से जुड़े रहे और स्वयं को वही मान कर जीते रहे अपने आसपास नजर डालेंगे तो आप पाएंगे कि लगभग हर कोई आज मोबाइल लेकर घूम रहा है इंसान अकेला रहना पसंद नहीं करता हर समय वह किसी न किसी चीज के साथ जुड़ा रहना चाहता है अपने हाथ में मोबाइल लेकर वह खुद को आत्मविश्वास से भरा बताएं तात्पर्य जिस प्रकार इंसान किसी न किसी चीज से जुड़ा प्रश्न करता है ठीक उसी प्रकार अनुभव शैलपुत्री शरीर के साथ सदा जुड़े रहना चाहता है उदाहरण के रूप में स्टेज पर जाते समय बहुत से लोगों के पास हाथ में कुछ ना कुछ होता है जैसे माइग्रेन इत्यादि इससे उन्हें थोड़ा बहुत आधार और सहयोग महसूस होता है कोई ना कोई चीज साथ में है यह एहसास उनमें आत्मविश्वास लाता है यदि आपने देखा होगा कि किसी के साथ कोई बात कर रहा होता है और हाथ में रखी चीज के साथ खेल भी रहता है ऐसे नहीं है अकेला नहीं हूं कि भावनाओं के साथ देती है जब आप किसी चीज से जुड़े नहीं होते तब आपको अजीब सा महसूस होता है क्योंकि आप किसी ना किसी चीज से जुड़े रहना चाहते हैं जिसे जो चीज मिल गई उसी ने वह मनसारा ढूंढता है यदि किसी को कोई चीज ना मिले तो वह सुविधा महसूस करता है काश कहीं कोई जड़ी ही मिल जाए यह देखता है या फिर वह अपने चश्मे से खेलता है ठीक इसी प्रकार आंतरिक मन में भी कुछ कल्पनाएं होती है जैसे मैं लड़का हूं लड़की हूं हिंदू मुसलमानों जिससे हम जिंदगी भर जुड़े रहते हैं आप जो इस बात से अनजान होते हैं कि आप इस मान्यता से जुड़े हुए हैं हम हमेशा किसी ना किसी बात को पकड़ कर बैठते ही है यह जुड़ाव खत्म हो सकता है एक सवाल से जिसे आप उससे पूछना है मैं कौन हूं यह सवाल निरंतर से पूछ कर उस का जवाब जानने की कोशिश करें जब आप ट्यूबलाइट प्रस्तुतियां टेबल देखतें हैं तब आप खुद से पूछे कि क्या उन्हें यह ट्यूबलाइट क्या मैं पुस्तक हूं क्या मैं टेबल जवाब आएगा नहीं इसी तरह अपने शरीर के लिए पूछे क्या मैं यह शरीर हूं और जवाब को जानने की कोशिश करें आपका शरीर आपके सबसे नजदीक है तो वह हर जगह हर स्थिति में आपके साथ रहेगा अब आप यह आसानी से मान लेते हैं कि मैं जान भी गया हूं तो यह शरीर साथ में रहता है तो मैं यहीं शरीर हूं यही कारण है कि आप को उसके साथ ज्यादा लगाव रहता है जब आप साइकिल अथवा कार चलाते हैं तब अपने मित्रों से करते हैं यह मेरी साईकिल या कार है आप यह कभी नहीं करते कि यह कार्य साइकिल ने हूं उसी तरह जब आप शरीर चलाते हैं तब कहते हैं कि यह मेरा पीर मेरा हाथ मेरा रंग मेरा चेहरा है जैसे यह मेरी साईकिल यह मेरी कार लेकिन पूरी शरीर के साथ यह मैं हूं मान लेते हैं जो असत्य भी है और आचार्य भी कैसे इंसान अपनी असलियत इतना जल्दी भूल जाता है टुकड़ों में देखे तो शरीर का कोई भी अंग में नहीं तो शरीर में कैसे हुआ सत्य है कि मैं शरीर नहीं फिर मैं कौन यही तो वह सवाल है जो हमें सत्य तक ले जाएगा यही सवाल हमारा देश विकास करेगा तेज कार तोय दो से परे जैसे तेज आनंद है दुख और सुख दोनों के पर एक आनंद जवाब यह बात अनुभव से जानेंगे कि आप शरीर नहीं है तब आप उसे किसी चीज के साथ जोड़ना नहीं जाएंगे फिर आपको अपने होने का एहसास होगा.!
मैं कौन हूँ.!.
पहले ध्यान से समझ ले फिर से शुरू करें>
◆ अपनी चुनी हुई ध्यान अवस्था और मुर्गा में आकर बंद करते हुए बेटे ध्यान की शुरुआत में बिना किसी विशेष अनुभव की अपेक्षा रखते हुए उत्तम परिणाम पाने के लिए जिससे आप मानते हैं उसे प्रार्थना करें शरीर को स्थिर रखते हुए अपने चारों तरफ चल रही आवाजों को सुने अलग-अलग तरह की कम से कम पांच आवाजों को पहचाने पहचाने की प्रक्रिया में जल्दबाजी बिल्कुल ना दिखाई संत मन से अपना ध्यान एक आवाज को सुनकर अगली आवाज की तरह लगाएं किसी भी आवाज में अटक कर उसे ही ना सुने थे रहे केवल आवाज को पहचाने और अलग आवाज सुनने पर ध्यान लगाए जब कोई भी आवाज ना हो तो मन की आवाज को जानने की कोशिश करें अलग-अलग आवाज सुनने के बाद सुबह से पूछ चेक क्या मैं हवा हूं जवाब आएगा नहीं मैं यह आवाज नहीं हूं मैं आवाज को सुनने वाला हूं तो अंदर जाकर देखें कि यह जानने वाला कौन है यह सुनने वाला कौन है सुबह से कहीं ने आवाज नहीं हूं जब अपना ध्यान वातावरण के केंद्रीय करें आप यह ध्यान के लिए बैठते हैं वहां चारों तरफ वातावरण को महसूस करें जैसे वहां गर्माहट है ठंडक है सूखा है गिला है शरीर हल्का है वजनदार है या हवा में तेजी है या ताज की है या हवा कम है सभी बातों को महसूस करें अगर आपको हवा महसूस हो रही है गर्म हॉट या सर्दी महसूस हो रही है तो सो से पूछे क्या मैं यह वातावरण जवाब आएगा नहीं मैं यह वातावरण नहीं हूं मैं इस वातावरण को जानने वाला हूं उससे कहें मैं यह वातावरण नहीं हूं जब अपना ध्यान शरीर पर केंद्रीय करें शरीर में आपको जहां अकड़न या दर्द महसूस हो रहा है उसे अनुभव से जाने दर्द जाने वक्त शरीर किसी प्रकार से मिलने ना दे पूरी शरीर से जहां हल्कापन या भारीपन महसूस हो रहा है जहां कपड़ा चुराय हवा छू रही है खुजली या सुखा पशु सो रहा है जहां पसीना रांझा जलन महसूस हो रही है वह स्थान महसूस करें ध्यान में देखें अर्थ होता है जानना जानते वक्त किसी भी तरह की कोई कल्पना ना करें बल्कि शरीर में या शरीर पर जो भी उसे महसूस करें वह इंसान और वह एहसास ना अच्छा है और ना ही बुरा हो जैसा है उसे वैसा ही महसूस करें और अपना ध्यान सांस पर केंद्रित करें सजदा से देखें कि सांस कैसे चल रही है यह महसूस करें कि किस नासिका से सांस अंदर जा रही है और किस राशि का से बाहर आ रही है जब सांस अंदर जा रही है तब आपको पता चल रहा है कि सांस अंदर जा रही है जब सांस बाहर आ रही है तब भी आपको पता चल रहा है कि सांस बाहर आ रही है भाई नासिक चंद्र नाड़ी से जा रही है याद आई नाशिक सूर्य नाड़ी से यह जानकर सही से पूछे क्या मैं यह सांसो जवाब आएगा नहीं मैं यह सांस नहीं हूं मैं सांझ को जानने वाला हूं सुबह से गए मेरे साथ नहीं अब अपना ध्यान हाथों पर केंद्रित करें यह जानने की आंतों में कैसा महसूस हो रहा है अपना ध्यान अपनी बाहों में ले जाएं और वह आपको कौन सा अनुभव हो रहा है उसे जाने जैसे आपको अपनी बाहें महसूस नहीं हो रही है या वजनदार महसूस हो रही है या हो सकता है कि हल्की महसूस हो रही है जो भी महसूस हो रही है उसे जाने से पूछे क्या मैं यहां तू जवाब आएगा नहीं मैं यह हाथ नहीं हूं यदि आप हाथ नहीं है तो आप कौन हैं यह जानने के लिए अपना ध्यान पैरों में लेकर जाएंगे यह जानने की आपको अपने पैर महसूस हो रहे हैं या नहीं उसने दबाव या हल्कापन महसूस हो रहा है या नहीं अच्छे बुरे का लेबल ना लगाते हुए इश्वर से पूछे क्या मैं यह प्यार हूं जवाब आएगा नहीं मैं यह पेड़ नहीं हूं उससे कहीं कि मैं प्यार नहीं हूं वैसे यह सवाल जरूर पूछें कि यदि आप पांव नहीं है तो कौन हैं आप कौन हैं इसका जवाब जानने के लिए ध्यान अपनी पीठ पर लेकर जाए पेट कैसे समाप्त हो रही है यह जानने कंधे से लेकर कमर तक हल्की वजनदार दबाओ जैसा भी महसूस हो रहा है उसे जाने अपना ध्यान धर में ले जाएं हरदोई पर ले जाएं और यह जानने की पूरे हिस्से में कैसा महसूस हो रहा है अपने आपसे पूछो क्या मैं पेड़ हूं क्या मैं हवा हूं क्या मैं गर्दन हूं क्या मैं गंदा हूं और अगर मैं यह सब नहीं हूं तो मैं कौन हूं मैं इन सब को जाने वाला हूं आप अपना ध्यान चेहरे पर केंद्रीय करें यदि आप घर नहीं है तो आप अपने चेहरे को महसूस करें अपने चेहरे के चारों तरफ से जानने कि आपको अपना चेहरा महसूस हो रहा है या नहीं चेहरे पर हल्कापन या पसीना महसूस हो रहा है या नहीं यह जानने की आंखों पर दबाव में हल्की महसूस हो रही है फिर सही से पूछे क्या मैं यह चेहरा हूं जब जवाब सवाई को दे तब पता चलेगा आंखें खुली रखकर उसे अनुभव मैं बाहर टहलने जाए शरीर को चलते हुए काम करते हुए देखें यह योग जरुर करके देखें इस अनुभव में हमें जो समझ मिली जो ताज की आंतरिक शक्ति हमें प्राप्त की जो हमें मिली उस पर जरूर मनन करें यह प्रज्ञा आपको रुपांतरित कर के सबूत में स्थापित करेगी अपना शरीर नहीं है और ना ही आप माने आप इन दोनों से परे जैसे आपने सोए को जानने के लिए पूछा मैं कौन हूं वैसे ही अपने मन को जानने के लिए पूछे मेरा मन क्या है आइए मेरा मन क्या है ध्यान करके अपने मन को समझे मन को समझ कर सोए को जान ले जो सच्चा तेज विकास है.!
मेरा मन क्या है.!
◆ ध्यान में बैठने से पहले नियोजित समय का भजर लगाएं उसके बाद ध्यान के लिए चुने हुए आसान और मुद्दा में आंखें बंद करते हुए बैठे ध्यान की शुरुआत करने से पहले पूर्व तैयारी ढीले कपड़े खुशी अथवा आसान का चुनाव ना करें ध्यान के दौरान आंखें बंद होने से अंदर का खालीपन प्रकट होने में मदद मिलती है स्वयं को कहें में अपने साथ बैठा बैठी हूं क्योंकि मैं स्वयं से प्रेम करता करती हूं अपने मन का दर्शन करें और देखें कि मेरा मन कैसा है उसमें जमी हुई पुरानी सोच कैसी मेरा मन किया है सर से पूछिए कि मेरा मन क्या है और अपने मन को जागते रहे कि आपका मन कैसा है जिद्दी है या सच है दयावान है या दूसरों के सुख से चलने वाला है काम पर मन आपका दुश्मन बन जाता है और कहां दोस्त बनता है इस वजह से पूछो कि मेरा मन क्या है देखें कि आपका मन कहां से यह कार्य का क्रेडिट लेना है के पीछे भागता है से मिलने के बाद वह क्या-क्या करता है बस यह लेने क्यों नहीं छोड़ता मेरा मन क्या है आप का मन कब देवासी में जाता है वहां राजस्थान से आने वाली बातों पर अमल करता है शरीर की शांति रख कर ही अपने मन को जांचे आप जब तक बेहोशी में जी रहे थे इस वजह से मन पर यह सोच जम गई कि मैं अलग हूं मैं हिंदू मुसलमान स्त्री-पुरुष अच्छा बुरा व्यक्ति हूं और फिर से सोचने का समय आया है जो आप हैं वह बनकर सोचे तभी जमी हुई सोच कर आप के जीवन से प्राप्त होगा तो ऐसे पूछते रहे मेरा मन क्या है मेरा मन कैसा है Action मैं खुश और दूसरे से दुखी क्यों होता है कब उसके अहंकार को चोट पहुंचती है नफरत को स्थान कब मिलता है उसके पीछे जमी हुई सोच है यह सोच क्या है अपने मन में जमी हुई हर सोच को देख लें आपकी जमाई सोच से ही दुख शुरू होता है आपका मेहमान बन कर बैठ जाता है बिन बुलाए मेहमान सत्य का दर्शन करके अब धीरे-धीरे आंखें खुले आईसकीम की तरह मन में जमी हुई पुरानी सोच को पिघलाने का काम करता है या ध्यान जिस तरह इंसान अपने घर में चीजें जमा करते हैं और फिर दिवाली की सफाई में उन्हें लगता है उसी तरह इंसान अपने मन में कोई पुरानी धारणाओं को संभाल कर बैठा है होता है इस जान द्वारा अपने मन की सफाई करना सीखे हफ्ते में एक बार यह ध्यान तेज विकास करने के लिए जरूर करें विकास के अंतिम पहाड़ पर मैं कौन हूं और मेरा मन क्या है मेरा मन कौन कैसा है ध्यान बड़े मददगार साबित होंगे अभ्यास जारी है इस तरह आप अपनी जमाई हुई सोच से मुक्त होकर मुक्ति का आनंद लेंगे.!
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