प्र●1●हम आज आप को मजदूर शैतान की कहानी बताते है!
02,june,2018
■बहुत पहले की बात है, उत्तर प्रदेश में बाघी नाम का पहलवान रहता था वह बहुत बलशाली था अपने बल के कारण दूसरे पहलवानों को हमेशा हरा देता था। उस पहलवान से लड़ने के लिये हमेशा दूर दूर से पहलवान आया करते थे, और उससे लड़ते थे पर कोई उससे जीत नहीं पाता वह हमेशा विजय होता था!
◆बाघी पहलवान का अखाड़ा एक जंगल में था और उस जंगल में एक शैतान भी रहता था, सबको हारते देख कर शैतान के मन में भी आया क्या ये बाघी पहलवान मुझे भी हरा देगा, मैं इससे जरूर लडूंगां!
◆एक दिन बाघी को अखाड़ें में अकेला देख कर शैतान एक इंसान के भेष में आया और अपनी जांघ थपथपाते हुये बोला, अगर तुम मुझे हरा दो तो मैं जिंदगी भर तुम्हारी गुलामी करूंगा, उस आदमी का शरीर एक शैतान जैसा लग रहा था, बाघी समझ गया की ये कोई साधारण व्यक्ति नहीं है यातो कोई देव है या शैतान, बाघी पहलवान ने उस शैतान का प्रस्ताव स्वीकार कीया!
◆बाघी ने मन में ठान लिया अगर यह कोई देव या शैतान है तो भी मैं इसके कहे अनुसार इसकी चोटी काट कर अपने पास रख लूंगा और इसे अपना गुलाम बनाउंगा!
◆अब दोनों में पहलवानी शुरू हुईं, काफी घमासान मचा, कभी बाघी पहलवान शैतान को पटकता तो कभी शैतान बाघी को शैतान की ताकत बाघी से अधिक थी पर बाघी पहलवान ने अपनी हिम्मत नहीं हारी और वह शैतान से लड़ता रहा, आखिर में बाघी शैतान से जीत गया, बाघी को विश्वास नहीं था कि यह उसकी गुलामी करेगा!
◆इसलिये बाघी पहलवान ने लड़तेहुए चोरी से उसकी चोटी काट ली और बाघी जब जीता तो शैतान ने छल करना चाहा पर वह कर न सका क्योंकि उसकी चोटी बाघी पहलवान के पास थी!
◆शैतान ने बाघी पहलवान से अपनी चोटी मांगी पर पहलवान ने शैतान को उसकी चोटी नहीं दी और उससे वादे के अनुसार उसे गुलाम बनने को कहा, शैतान ने गुलाम बनना स्वीकार किया और वह पहलवान के साथ उसके घर चल दिया!
◆चोटी में शैतान की पूरी शक्ति थी इसलिये पहलवान ने उस चोटी को एक कमरे में भूसे के अंदर चोटी को एक डिब्बे में बंद करके बहुत अंदर छुपा दिया और अपने परिवार को ये बता दिया की ये चोटी शैतान को नहीं मिलनी चाहिये वर्ना ये शैतान यहाँ से चला जायेगा!
◆अगर यह शैतान यहाँ रहेगा तो हमारा सारा काम करेगा। और हमे धनवान बना देगा!
◆पहलवान ने शैतान को एक कमरा दे दिया रहने को, शैतान की हाईट काफी ज्यादा थी इसलिये पहलवान ने उसे एक कमरा देना उचित समझा!
◆शैतान जो था पहलवान का सारा काम रात में करता था और दिन को सोता था!
◆शैतान पहलवान का सारा काम जैसे खेती से लेकर धंधा कैसे आगे बढे़गा, सब कुछ करता था। रात को उसकी फसल के अलावा वो दूसरों की भी फसल काट कर पहलवान के घर ले आया करता था ऐसे धीरे-धीरे पहलवान बहुत धनवान हो गया!
◆कुछ समय जाते-जाते पहलवान बूढ़ा हो चला था, वह अपने बच्चों को बार-बार बताता कि भूसे वाले कमरे में से जब भी भूसा निकले तूम उसमें भूसा डाल दिया करना, भूसा कभी कम ना हो!
◆कुछ दिन बाद बाघी पहलवान की मृत्यु हो गई और उसके बेटे अकेले हो गये!
◆बेटे भी अच्छे से रहते थे पर वह अपने बाप की बातों को अनसूरा कर गये, धीरे-धीरे भूसे वाला कमरा खाली होता चला गया और एक दिन सभी सो रहे थे और शैतान रोजाना के जैसे काम कर रहा था भूसे वाले कमरे में शैतान को एक डिब्बा मिला शैतान ने उसे खोल कर देखा तो उसमें उसकी चोटी रखी थी, शैतान को अपनी चोटी वापस मिल गई, चोटी वापस पाने की खुशी में शैतान फूला न समा रहा था, वह तुरन्त आया और सबको जगाकर बोला, देखो मेरी चोटी मुझे वापस मिल गई अब मैं जा रहा हूं!
◆शैतान अब चला गया और बाघी पहलवान के बच्चे आपस में एक दूसरे को कोसते रह गयें!
(और निचे पड़े)
■दुनिया से प्रेम के संबंध में आपको एक कहानी सुनाते हैं बनी इस्राईल जाति के मध्य एक उपासक था। उससे लोगों ने कहा कि अमुक स्थान पर एक वृक्ष है और लोग उसकी उपासना करते हैं यह सुनकर उपासक को क्रोध आ गया उसने कुल्हाड़ी अपने कांधे पर रखी और उस वृक्ष की ओर चल पड़ा ताकि उसे उखाड़ फेंके रास्ते में शैतान बूढ़े व्यक्ति के रूप में प्रकट हुआ उसने उपासक से कहा हे उपासक लौट जा और उपासना में लीन हो जा इस पर उपासक ने कहा नहीं वृक्ष को काट डालना ज़रूरी है दोनों में बात इतनी बढ़ गयी कि उठा-पटक की नौबत आ गयी उपासक शैतान पर हावी हो गया और वह शैतान को ज़मीन पर पटक कर उसकी छाती पर बैठ गया। उस समय शैतान ने कहा मेरी छाती से उतरो ताकि तुमसे एक बात कहूं तुम ईश्वर के दूत तो नहीं हो कि ईश्वर ने तुम्हें इस कार्य की ज़िम्मेदारी सौंपी है, घर लौट जाओ मैं प्रतिदिन दो दीनार तुम्हारी तकिये के नीचे रख दूंगा तुम एक दीनार से अपने जीवन का ख़र्च चलाना और दूसरे दीनार को ईश्वर के मार्ग में ख़र्च करना इस काम का पुण्य वृक्ष उखाड़ फेंकने के पुण्य से कहीं अधिक है उपासक ने शैतान की बात मान ली और घर लौट आया अगले दिन सुबह उसने अपने तकिये के नीचे दो दीनार पाया उन्हें उठा लिया उसके अगले दिन भी अपनी तकिया के नीचे दो दीनार पाया और उसे ले लिया परंतु तीसरे दिन तकिये के नीचे कुछ भी नहीं मिला उपासक क्रोधित हो उठा उसने दोबारा कुल्हाड़ी उठाई और वृक्ष की ओर चल पड़ा रास्ते में शैतान फिर उसी स्थान पर प्रकट हुआ उसने उपासक से कहा कहां जा रहे हो उपासक ने कहा वृक्ष को उखाड़ने जा रहा हूं जब तक यह काम नहीं कर लेता तब तक मुझे चैन नहीं है.इस पर शैतान ने उससे कहा झूठ है लौट जाओ ईश्वर की सौगन्ध तुम कभी भी उस वृक्ष को नहीं उखाड़ सकते दोनों में कहा -सुनी इतनी बढ़ गयी कि दोबारा उठा-पटक आरंभ हो गयी परंतु इस बार शैतान ने उपासक को ज़मीन पर पटक दिया और एक गौरइया की भांति उसे अपने हाथों में दबोच लिया उपासक ने कहा मुझे छोड़ो ताकि मैं घर लौट जाऊं परंतु तुम एक बात बताओ कि पहली बार जब हमारे और तुम्हारे बीच कुश्ती हुई थी तो हमने तुम्हें ज़मीन पर पटक दिया था परंतु इस बार उल्टा हो गया, मैं तुम्हारे हाथों में तुच्छ हो गया हूं इसका कारण क्या है इस पर शैतान ने कहा पहली बार तुम ईश्वर के लिए क्रोधित हुए थे और ईश्वर ने मुझे तुम्हारे नियंत्रण में दे दिया था जो भी ईश्वर के लिए काम करेगा मैं उस पर नियंत्रण नहीं कर सकता परंतु इस बार तुम दीनार और दुनिया के लिए क्रोधि हुए थे जिसके कारण मैं तुम्हें पराजित कर सका!
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