सियारिनी के बच्चे को शेर ने जगल मे कड़ाके की ठंड मे.।

प्र●1● सियारिनी के बच्चे को शेर ने जगल मे कड़ाके की ठंड मे.।

15,june,2018

■कड़ाके की ठंड का समय था सारी दुनिया बर्फ से ढंकी हुई थी शेर बहुत भूखा था उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था शिकार के लिए वह नीचे उतरा और गांव में घुस गया!

◆वह शिकार की ताक में घूम रहा था दूर से उसे एक झोपड़ी दिखाई दी खिड़की में से टिमटिमाते दिए की रोशनी बाहर आ रही थी शेर ने सोचा यहां कुछ न कुछ खाने को जरूर मिल जाएगा वह खिड़की के नीचे बैठ गया!

◆फिर शेर सुबह जगल चला गया और उसने उसकी घुफा बनाई पर सब जानवर अपनी भाषा समजते थे!

◆एक समय की बात है, जब सभी जानवरों की भाषा एक थी या कह सकते हैं कि एक दुसरे की बातों को समझा करते थे एक दिन एक सियारनी ने खुले आसमान के निचे , झाड़ियों के कुछ बच्चे जन्म दिए !

◆सियारिनी बच्चों को रखने के लिए एक सुरक्षित स्थान (गुफा ) चाहिए !

◆सियार हाँ जल्दी ही खोजना पड़ेगा !

◆सियारिनी  जल्दी ही खोजना पड़ेगा !

◆सियारिनी नही आज ही व्यवस्था करना है!

◆सियार हाँ ठीक है.मैं जाकर देखता हूँ!

◆जंगल में घूमते घूमते शाम हो गई कोई भी रहने के लायक स्थान नही मिला अब उदास होकर लौटने लगा  चलते -चलते उसने सोंचा उसी रास्ते से होकर जाने से वही सब गुफा ही मिलेगा जिसमें पहले से कोई रहता है या जिसमें रहा नही जा सकता अब मुझे दुसरे रास्ते से जाने पर शायद कोई गुफा मिल जाये दुसरे रास्ते पर बहुत दूर चलने पर भी उसे कोई गुफा रहने लायक नहीं लगा सियार बहुत थक गया था और उसे जोर की भूख लगी थी उसने एक उचे स्थान पर चढ़कर थिदी देर आराम करना चाहता था आवर उसे ऊँचे स्थान से दूर तक दिखाई भी देगा जिससे वह अपने लिए आसानी से शिकार खोज सकता हूँ!

◆जब वह एक पहाड़ी के उपर चढ़ा तो थोड़ी दूर पर एक झाड़ियां दिखी वो वहाँ पर कोई शिकार की आस लगाये धीरे -धीरे झाड़ियों की तरफ बढ़ा लेकिन उसे किसी शिकार (पशु ) होने की कोई आहट नही मिलने से उदास हो गया लेकिन फ्हिर भी जाकर देख लेता हूँ की मुझे आते देख शिकार दुबका बैठा हो ऐसा सोंचकर वह झाड़ियों के अन्दर घुस गया वहाँ उसे शिकार तो नही मिला पर झाड़ियों के पीछे छुपा हुआ एक गुफा दिखा वह अन्दर जाकर देखा तो वह गुफा बहुत बड़ा था गुफा में बहुत दिनों से खाली होने के लक्षण दिखने पर उसकी सारी थकान दूर हो गई वह उत्साह से भर गया और जल्दी से अपनी सियारनी और बच्चों की तरफ भागा| सियारनी स्वयं एक मेमने शिकार करके उस वक्त बच्चों को खिला रही थी!

◆सियार जल्दी करो मैं एक बड़ा सा गुफा हमारे रहने के लिए खोज लिया है यहाँ से दूर है हमें जल्दी से वहाँ जाना चाहिए  नही तो रात ज्यादा होने से तकलीफ ज्यादा होगी !

◆सियारिनी अच्छा आपको बहुत जल्दी गुफा मिल गई मैं थक गई हूँ अभी नही जा सकते आप शिकार करके ले आओ फिर खाकर चलेंगें आपके शिकार करते तक मुझे आराम करने का थोडा वक्त मिल जायेगा!

◆सियार मैं भी बहुत थक गया हूँ मैं शिकार नही कर पाऊँगा मैं भी थोड़ा आराम कर लेता हूँ!

◆सियारिनी बच्चे मेमने खाकर तृप्त हो गये हैं बचे हुए आप खा लीजीये और आप आराम कीजिये मैं बच्चों की सुरक्षा के लिए चक्कर लगाती हूँ!

◆सियार ठीक है पर यह बचा हुआ शिकार तो मेरा पेट नही भर सकता  लेकिन मैं थक गया हूँ , इसी से कम चला लेता हूँ!

◆सियारिनी ठीक है !

◆सियारिनी बच्चों की सुरक्षा के लिए रात भर जागती रही और सोचती रही  उसके मन में एकाएक ये विचार आया की कास जैसे अन्य पशु- पक्षी बच्चे देने के पहले अपना निवास बना लेते हैं वैसे ही हमें भी कर लेना था  लेकिन आलस्य , मौजमस्ती और घुमंतू प्रवृत्ति के कारण हमने भविष्य के बारे में सोंचा भी नही!

◆अचानक उसकी तन्द्रा भंग हुई उसने देखा कि भोर होने वाली है सियार और बच्चे आराम से सो रहे है
सियारिनी जल्दी उठो जल्दी उठो सियारक्या हुआ  क्या कोई बड़ा शिकार दिख रहा है या कुछ शिकार करके लाई हो.सियारिनी तुम्हे खाने और घुमाने के अलावा कुछ भी नही सुझता  हमारे बच्चे, खुले आसमान में असुरक्षित पड़े हैं.रात को तो बातें बड़ी -बड़ी कर रहे थे एक बड़ी गुफा के बारे में बता रहे थे !

◆सियार हाँ  जल्दी करो नही तो अँधेरा बढ़ जायेगा
सियारिनी होश में आओ अँधेरा नही बढ़ेगा तेज धुप पड़ेगी सियार क्या सुबह हो गयी सियारिनीहाँ बच्चों को लो और चलते बनो बच्चों को साथ लेकर वहाँ से गुफा की ओर बढ़ गए सूर्योदय हो चूका था  सभी पशु-पक्षी भी जग चुके थे गुफा के कुछ दूर पहलेएक बरगद का पेड़ था बरगद के ऊँची दल एक बंदर बैठा था सियार को अपने पुरे परिवार के साथ अपनी ओर आता देखकर वह दुबक गया उसे अपने परिवार की भी चिन्ता होने लगी वह बरगद की ऊंची डाल पर बैठकर दूर से उनकी निगरानी करने लगा  बंदर उन्हें जाते हुए देख रहा था बन्दर सियार के परिवार को झाड़ी के अंदर जाते देख अचम्भित हो गया और उसके मुंह से चीख निकल गई| सियार भी उसे देख लिया सियारिनी को कुछ अजीब स लगा लेकीन वे गुफा के अन्दर चले गये थोड़ी देर आराम करने के बाद सियारिनी ने सियार से पूछा की की वो चीख की आवाज कैसी थी!

◆सियार वो आवाज बंदर की थी जो पास के बरगद के पेड़ पर रहता है सियारिनी वो चिखा क्यों सियार वो हम से डर क्र चीखा होगा सियारिनी हम तो उसकी तरफ तो नही जा रहे थे तब फिर क्यों चीखा सियार मुझे नही मालूम सियारिनी को शक हुआ की आस पास कोई
खतरनाक जानवर होगा उसने सियार से कहा कि चलो आस पास देखते हैं कहीं और कोई  ऐसा जानवर पास में तो नही है जिससे हमारे बच्चों को खतरा हो!

◆सियार तुम कहती हो तो चलो देख लेते हैं ( गुफा से बाहर कुछ देर में आस पास घूमकर  देखकर बोला ) यहाँ ऐसा कुछ भी नही लग रहा है सियारिनी बाहर तो आपने देख लिया अब मैं गुफा के अंदर देखती हूँ (कुछ देर में चिंतित स्वर में बोली)  लगता  है कि ये गुफा किसी शेर का है जो इसे बहुत दिनों पहले इसे छोड़ दिया है!

◆सियार शे र की गुफा  अब वो छोड़ के चला गया है तो हमें क्या सोचना है आराम से रहेंगे सियारिनी और शेर लौट आया तो

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