इंसानियत ईमानदारी Sohni Mahiwal कहानी.।

प्र●1●ईमानदारी का हिसाब!
25,may,2018

【कहानियां दर्पण होती है, हमारी जिंदगी का. कभी-कभी कुछ  हमें कुछ ऐसा सिखा जाती है, जो शायद पूरी जिंदगी के अनुभवों में हम नहीं सीख पाते】!

◆यह वो किस्सा है, जो अब मेरी जिंदगी का हिस्सा है. मैं थोड़ा जिद्दी किस्म का इंसान हूं और इसी जिद की वजह से बचपन में मुझे बहुत मार पड़ी है. लगभग मुझसे घर के सारे लोग परेशान रहते थे. मां तो इस जिद की वजह से, हर दूसरे दिन झाड़ू से मारती या फिर बात करना बंद कर देती थी. इसीलिए मैं भी थोड़ा चिढ़ा-चिढ़ा सा रहता था!

!लेकिन इन सब रंजिशों के बीच एक शख्स चुपचाप मेरे साथ खड़ा रहता था, वह थे-मेरे पापा"हाथ उठाना तो दूर की बात है. मुझे तो यह भी याद नही कि आखरी बार उन्होंने मुझ से ऊंची आवाज में बात कब की थी. हुबहू मेरी तरह दिखते हैं वो. क्योंकि पापा हमेशा कहते हैं कि-जितना मैं उनसे सीखता हूं, उतना वह भी मुझसे सीखते हैं. बाप-बेटे के रिश्ते से पहले हमारे बीच दोस्ती का रिश्ता है!

◆जैसे दोस्त एक दूसरे के बिना कुछ कहे, आंखों ही आंखों में एक दूसरे का हाल समझ लेते हैं. बिल्कुल वैसा ही हमारा रिश्ता भी है. पापा मुझसे कभी किसी के लिए मना नहीं करते. जब मैं उनसे कहीं जाने को कहता या फिर कुछ करने को पूछता हूं, तो वह सिर्फ एक बात बोलते हैं"कि बेटा अगर तुम्हें यह गलत नहीं लग रहा. 'तो करो'. यह शब्द सुनने के बाद मुझे ना जाने कैसे खुद-ब-खुद सही और गलत का अंतर समझ आ जाता है!

◆यह बात उस समय की है, जब मैं क्लास 5th में पढ़ता था. ठीक 1 तारीख को पापा की तनख्वाह आती और महीने के पहले रविवार की शाम पापा और मैं महीने भर का राशन लेने के लिए एक साथ जाते थे. मुझे आज भी याद है, एक पुरानी सी साइकिल के हैंडल पर दो थैले बांधकर महीने भर की खुशियां लेकर आते थे!

◆ एक बार उस रोज हम राशन लेकर घर वापस आ रहे थे. तो पापा की नजर थैले के ऊपर रखी हुई 1 विमबार की बड़ी टिकिया पर गई. पापा ने मुझे रुकने के लिए कहा और हिसाब वाला खाता मांगा. उन्होंने कुछ देर हिसाब वाले खाते में जांच पड़ताल की और बोले-- "यार!! इसने तो छोटी टिकिया के दाम जोड़कर बड़ी टिकिया दे दी. चलो कोई बात नहीं तुम यहां कुछ देर इंतजार करो, मैं इसे अभी बदलवाकर वापस आता हूँ!

◆इतने पर मैं फट से बोल पड़ा"पापा यह क्या कर रहे हो? अब रहने भी दो. आप कहां इतनी दूर फिर से वापस जाओगे. तो पापा एक पल को रुके, जरा सा मुस्कुराए और उस टिकिया को हाथ में लेकर बोले "बेटा यह मुझे गलत लग रहा है, तो मैं ये नहीं करूंगा". पापा वापस दुकानदार के पास चले गए. मैं कुछ देर वहां उनका इंतजार करता रहा!

◆ कुछ 5-10 मिनट बाद वह बड़ी टिकिया को बदलवाकर एक छोटी सी टिकिया लेकर वापस आए. और हम घर की ओर चलने लगे. रास्ते में पापा ने एक हाथ से साइकिल को संभाला और दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रखते हुए बोले-- "बेटा!! ईमानदारी किसी और से नहीं की जाती, इमानदारी खुद से होती है. ईमानदारी हर उस चीज में होनी चाहिए, जिसे तुम दिल से करते हो!

◆तब जाकर यह समझ में आया कि ईमानदारी सिर्फ पैसों की मोहताज नहीं होती. उस दिन से बस्ता उठाये, हर दिन इस उम्मीद में घर से निकलता हूं. कि अगर किसी दिन जिद छोड़ देता हूं या जिंदगी में किसी मोड़ पर पहुंच कर थक कर हार कर बैठ जाता हूं, तो इस बात की राहत हमेशा रहेगी. कि बड़ी ईमानदारी से सपने देखे थे और इतनी ईमानदारी से उन्हें पूरा करने की कोशिश भी की थी!

◆क्योंकि यह जो इमानदारी है ना, पापा की उस वापस लाई हुई छोटी टिकिया की तरह है, जो गलत नहीं है. सपनों के लिए जोश, जज्बा, जुनून, हौसला, हिम्मत यह सब बहुत जरूरी है. जब तक आप इन सब को पूरी ईमानदारी से नहीं निभाते तब तक कुछ मुकम्मल नहीं होने वाला. इसीलिए ईमानदार बनो सब से नहीं, अपने आप से और खुद से.!

【और निचें पड़े】

प्र●2●सोहनी>महिवाल की प्रेम कहानी!
25,may,2018


◆सोहनी महिवाल की प्रेम कहानी इतिहास की सबसे जानी मानी प्रेम कहानियों में से एक है. इस अद्भुत प्रेम कहानी की जड़ें पंजाब से जुड़ी हुई है. यह बात है 18वीं शताब्दी की, जब पंजाब की चिनाब नदी के किनारे एक गांव में तुला नामक कुमार के एक बेटी का जन्म हुआ. इस लड़की का नाम सोहनी रखा गया. पंजाब में खूबसूरत लड़कियों को सोहणी कहा जाता है. अपने नाम की तरह सोहनी भी बेहद खूबसूरत थी. उसी समय बुखारा "(उज्बेकिस्तान-अब पाकिस्तान में हैं)" मैं एक अमीर व्यापारी के घर में एक बेटे ने जन्म लिया!

◆ इस लड़के का नाम इज्जत बेग रखा गया. बड़े होने पर इज्जत वेग भारत भ्रमण करने के लिए निकला. सबसे पहले वह दिल्ली पहुंचा. दिल्ली के बाद इज्जत वेग ने लाहौर का रुख किया. कुछ दिन लाहौर में व्यतीत करने के बाद उसने 'बुखारा' लौट जाने का निश्चय किया. बुखारा के लिए लौटते समय रास्ते में उसकी मुलाकात सोहनी से हो गई. उस समय सोहनी अपने पिता के साथ घड़ों पर सुंदर कलाकृतियां बना रही थी!

◆जब शहजादे इज्जत वेग ने पहली बार सोहनी को देखा, तो पहली नजर में ही उसे अपना दिल दे बैठा. उसने वहां रुकने के लिए तुला कुम्हार के यहां पशु चराने की नौकरी कर ली. पंजाब में भैंस चराने वाले को महिया कहा जाता है. इसीलिए इज्जत बेग का नाम महिवाल पड़ गया. जब इस बात की खबर सोहनी को लगी तो, वह भी जवां मर्द माहिवाल से इश्क करने लगी,और दोनों छुप-छुपकर मिलने लगे!

【सोहनी की शादी】!

◆जब 'Sohni Mahiwal' के इश्क की खबर सोहनी के मां बाप को लगी, तो उन्होंने महिवाल को नौकरी से निकाल दिया और सोनी का विवाह कुम्हार समुदाय के एक आदमी से कर दिया. लेकिन सोनी ने उस संबंध (शादी) को कभी स्वीकार नहीं किया!

◆सोहनी की शादी के बाद महिवाल साधु के भेष में इधर-उधर भटकने लगा. जब यह बात सोहनी को पता चली. तो सोहनी ने महिवाल के लिए खबर की कि वह अब भी उसी से प्यार करती है और हमेशा उसी से प्यार करती रहेगी!

◆इसके बाद सोहनी हर रात महिवाल से मिलने चिनाब नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक मिट्टी के घड़े की सहायता से जाया करती थी. वहां पर दोनों घंटों बैठ कर बातें किया करते थे और प्रेम मग्न हो जाया करते थे.!

◆जब यह बात सोहनी की ननद को पता चली तो उसने पक्के घड़े की जगह कच्चे घड़े को बदलकर रख दिया. जब सोहनी रात को महिवाल से मिलने गई तो बीच नदी में, घड़ा कच्चा होने के कारण टूट गया. महिवाल ने अपनी प्रियतमा सोहनी को नदी में डूबते हुए देखा तो उसने भी नदी में छलांग लगा दी. नदी में तेज बहाव होने के कारण दोनों जलमग्न हो गए और दोनों की प्रेम कहानी हमेशा के लिए अमर हो गई!

◆जानकारों के अनुसार पाकिस्तान से 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 'शहदपुर' में इंडस नदी के किनारे से a "Sohni Mahiwal" के शवो को निकाला गया था. कुछ लोगो ने यही पर दोनों की कब्र बना दी. आज के समय में यहां लाखों प्रेमी युगल हर साल घूमने के लिए जाते है!

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