चंबल के खतरनाक डाकू के बारे में आज आपको हम बताएंगे रोचक बातें.!!

प्र●1● चंबल का खतरनाक डाकू मान सिहं जी कमजोरों का मसीहा थे!
29,may,2018

◆आज के दौर में डाकू सिर्फ फिल्मों और कहानियों में देखने को मिलते हैं. लेकिन एक ऐसा दौरा था जब डाकुओं का एक छत्र राज्य चला करता था. चंबल के बीहड़ों में डाकुओं का आतंक हर तरफ़ फैला था. इन डाकुओं ने सैकड़ों हत्याएं और लूट की वारदतों को अंजाम दिया. आज हम आपको देश के कुछ ऐसे ही डाकुओं के बार में बताने जा रहे हैं, जिनसे सिर्फ गांव वाले ही नहीं बल्कि पुलिस भी डरती थी मान सिंह आगरा में जन्मे डाकू मान सिंह को लोग रोबिन हुड मानते थे. वह अमीरों से पैसे लूटता था और गरीबों में बांट देता था. कहा जाता है कि डाकू मान सिंह ने कभी किसी औरत, गरीब और बच्चे को हाथ तक नहीं लगाया. वह सिर्फ अमीरों को ही लूटता था!

◆चंबल में बीहड़ों में डाकू का पर्याय माने जाते है। इनके नाम से लोग डर से कापने लगते है इन्ही बातों पर कई फिल्मों का तक निर्माण हो चुका है जहां डाकू को क्रूर और किसी का सम्मान नहीं करने वाला बताने के साथ साथ ही केवल अपने फायदे के बारे में सोचने वाला बताया जाता है डाकू मान सिंह ऐसा ही एक डेंजरस नाम था बस फर्क इतना था कि वह अपने लूट के लिए कुख्यात होने की बजाए, गरीबों की मदद के लिए विख्यात रहा अपने कामों के लिए वह चंबल और उसके आसपास के कुछ इलाकों में भगवान की तरह पूजा जाता रहा यहां तक कि लोगों ने उसके नाम का एक मंदिर तक बनवाया जानकर हैरानी होती है और विश्वास करना मुश्किल कि आखिर एक डाकू को लोग भगवान की तरह कैसे पूज सकते हैं पर चूंकि यह सच है, इसलिए इसके पीछे की असल कहानी को जानना दिलचस्प हो जाता है!

【बीहड़ों पर जो राज करते थे वो थे मानसिंह’】

◆मान सिंह का जन्म आगरा के गांव खेरा राठौर के एक बड़े राजूपत परिवार में हुआ उनका परिवार राजपूत राजाओं का वंशज था, जोकि चंबल में रहता था वही चंबल जहां दूर-दूर तक घने जंगल और बीहड़ दिखाई देते हैं कहते हैं कि मान सिंह के घर की हालत बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन हालत इतनी भी खराब नहीं थी कि वह डकैत बन जाए किन्तु परिस्थितयों ने उन्हें इस ओर धकेल दिया उन्होंने हथियार क्यों उठाए इसका जवाब खोजने की कोशिश की जाती है तो एक कहानियां पढ़ने को मिलती है इस कहानी की मानें तो मान सिंह की पुस्तैनी जमीन पर आसपास के कुछ साहूकारों ने अवैध कब्जा कर लिया था मान सिंह ने इसका खूब विरोध किया, लेकिन वह सीधे तरीके से कामयाब नहीं हो पाए!

◆ऊपर से उन्हें इसके चलते परेशानियों का सामना करना पड़ा अंत में जब उनसे नहीं सहा गया तो उन्होंने अपनी जमीन वापस लेने के लिए हथियार उठा लिए और बागी हो गए अपनी ही तरह गरीबों पर हो रहे अत्याचारों के लिए खिलाफ जब मान सिंह ने आवाज उठाई तो उनके साथ कई और लोग हो लिए इनमें उसके कुछ सगे-संबंधी और कुछ साथी शामिल हो गए इनमें उनके बेटे, भाई नबाब सिंह और भतीजे प्रमुख थे देखते ही देखते वह लोग अच्छी संख्या में हो गए करीब 17 लोगों के एक समूह के साथ मान सिंह ने अपनी एक गैंग बना ली और जुल्म करने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया कहते हैं कि वह गरीबों को सताने वालों के लिए काल बन चुके थे वह अपने समय में कितने खतरनाक रहे होंगे इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने 1939 से लेकर 1955 तक के अपने कालखंड में कभी अपनी बंदूक को शांत नहीं रहने दिया उन पर लूट के 1,112 और हत्या के 185 मामले दर्ज थे, जिसमें 32 पुलिस अफसरों की हत्या भी शामिल थी जाहिर तौर पर यह एक खतरनाक और खूंखार आँकड़ा रहा होगा!

【नामी डकैत के बावजूद गरीबों के लिए थे मसीहा】

◆मान सिंह के इस गैंग की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह गरीबों के लिए मसीहा जैसे थे उसने अपनी लूट के दौरान गरीब लोगों पर कभी जुल्म नहीं किया बल्कि, उनकी हमेशा मदद की फिर चाहे गरीबों की बेटियों की शादी करना हो, या फिर किसी की बीमारी का इलाज करवाना मान सिंह ऐसे कामों में बढ़-चढ़ कर सक्रिय रहे महिलाओं के लिए उनके मन में कितना सम्मान था, इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि एक बार उनके किसी साथी पर महिला के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा, तो उन्होंने देर न करते हुए उसे अपनी गैंग से बाहर का रास्ता दिखा दिया था यही कारण रहा कि गरीबों के दिल में उनकी छवि अच्छी बनती चली गई उसके क्षेत्र में कोई भी उसे डकैत नहीं कहता था!

◆उनकी नेकी का सिलसिला यूंही चलता रहा और गरीबों के लिए एक मसीहा बनकर उभरे बहरहाल, इसमें दो राय नहीं कि उन्होंने भारतीय कानून की हमेशा धज्जियां उड़ाई, जिसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी!

◆1955 ईं में मध्य प्रदेश के भिंड में पुलिस ने उसे अपने एनकाउंटर में मार गिराया और इस तरह मान सिंह की कहानी खत्म हो गई मान सिंह को मरने से पहले संघ से जुड़े एसएन सुब्बाराव ने एक कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए सुना था उनकी माने तो वह मान सिंह के भाषण से हैरान थे उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वह किसी डाकू को सुन रहे हैं उन्होंने बताया था कि मान सिंह बिल्कुल किसी नायक की तरह लोगों को संबोधित कर रहा था!

【मरने के बाद भी हैं जिंदा】

◆भले ही मान सिंह को पुलिस ने मार गिराया था, लेकिन वह गरीबों के दिल में हमेशा जिंदा रहे वह उनके लिए क्या मायने रखता था, इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि उनकी याद में उनके गांव खेड़ा राठौर में उनके लिए एक मंदिर तक बनाया गया सुनकर थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन इस मंदिर में नियमित रूप से लोग उनकी पूजा करते हैं उनके नाम पर एक चालीसा भी रचा गया है, जिसे मंदिर में गाया जाता है यही नहीं उनके जीवन पर आधारित कई कहानियों और नुक्कड़ नाटक भी वहां के स्थानीय लोगों ने बनाए हैं, जिनका समय-समय पर मंचन होता रहता है!

(और पड़े )!

【निर्भय सिंह गुज्जर】
◆निर्भय सिंह गुज्जर चंबल के आखिरी बड़े डाकुओं में से एक था. निर्भय सिंह गुज्जर के गुट में कुल 70 से लेकर 75 डकैत थे, जो AK 47 जैसी राइफलों से लैस थे. इनके पास नाईट विज़न दूरबीन, बुलेट प्रूफ जैकेट और ढेर सारे मोबाइल फ़ोन भी मौजूद थे. सन 2005 में पुलिस के बंदूक की गोली द्वारा निर्भय सिंह गुज्जर की मौत हो गई!

【सुल्ताना डाकू】

◆सुल्ताना डाकू गरीब लोगों का मसीहा था. लेकिन इसकी दहशत से कोई इसके सामने सिर भी नहीं उठा सकता था. अमीर लोगों को लूट कर यह ग़रीबों की मदद करता था. सुल्ताना डाकू को ब्रिटिश सरकार ने नजीबाबाद में फांसी भी दे दी थी!

【फूलन देवी】

◆फूलन देवी की जिंदगी पर कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में बन चुकी है. फूलन देवी 1980 के दशक के शुरुआत में चंबल के बीहड़ों में सबसे ख़तरनाक डाकू मानी जाती थीं. फूलन देवी के डकैत बनने की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है. इनके साथ कई बार ऊंची बिरादरी के लोगों ने बलात्कार किया और इन्हें खूब मारा पीटा. इस वजह से सिस्टम के खिलाफ लड़ने के लिए फूलन देवी ने बंदूक उठाई और डाकू  बन गईं. फूलन देवी की हत्या साल 2011 में एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा कर दी गयी थी!

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