बीस लाख साल पुरानी गुफा में इंसानी राज और मानव का उदभव का विकास जनकारी.।

प्र●बीस लाख साल पुरानी झील में इंसानी राज़
2018 मई 19
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दुनिया में तमाम जानवरों की कई--कई प्रजातियां होती हैं. किसी भी जानवर को ले लीजिए,,दुनिया के अलग--अलग हिस्सों में उनकी अलग--अलग प्रजातियां मिलती हैं लेकिन इंसान के साथ ऐसा नहीं पूरी दुनिया में इंसानों की एक ही प्रजाति है होमो सैपिएंस तमाम जीव--जंतुओं की विकास गाथा जुटाने और लिखने पढ़ने वाले इंसान की ख़ुद के बारे में समझ बहुत कम है आप भी ये जानकर चौंक जाएंगे कि हमें अपने पुरखों के बारे में बहुत कम जानकारी है आज से क़रीब बीस लाख साल पहले धरती पर पहला इंसान पैदा हुआ था तब से क़ुदरत में बहुत से बदलाव हो चुके हैं इंसान ने इतनी तरक़्क़ी कर ली है मगर ख़ुद अपने पुरखों यानी आदि मानव के बारे में हम बहुत कम जानकारी जुटा सके हैं
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वजह ये है कि लाखों साल पहले के इंसानों के कंकाल बहुत कम मिलते हैं जहां भी मिलते हैं एक--आध टुकड़े, आधी--अधूरी जानकारी इसके आधार पर कोई ठोस बात कहना वैज्ञानिकों के लिए भी मुश्किल होता है
मगर 1984 में इंसानों के हाथ अपने पुरखों की जानकारी का एक बड़ा ख़ज़ाना लगा था इससे हमें अपने विकास की कहानी को समझने में बहुत मदद मिली!
ये ख़ज़ाना मिला था अफ्रीकी देश केन्या की तुर्काना झील में जब आठ साल के एक बच्चे का क़रीब पंद्रह लाख साल पुराना कंकाल मिला था दुनिया में इंसानों के जितने भी कंकाल मिले हैं पुराने उनमें ये पहला ऐसा कंकाल था जो संपूर्ण था इसे वैज्ञानिकों ने (तुर्काना ब्वॉय) या तुर्काना झील वाले लड़के का नाम दिया था हालांकि ये इंसानों के लाखों बरस पहले के पुरखों का कोई पहला कंकाल नहीं था जो तुर्काना झील में मिला असल में ये झील मानव के जानवर से इंसान बनने का पूरा इतिहास संजोए हुए है इस झील से हमें पता चलता है कि लाखों साल पहले के इंसान कैसे रहते थे क्या खाते थे कभी हरे--भरे इलाक़े में पड़ने वाली तुर्काना झील आज बड़े रेगिस्तान के बीच पानी की बूंद जैसी है!

●वैज्ञानिक कहते हैं कि बीस लाख साल पहले ये झील बहुत बड़ी थी तब से इसके आस-पास का माहौल बहुत बदल गया है हरियाली रेगिस्तान में तब्दील हो चुकी है झील का दायरा भी बहुत सिमट गया है
मगर>लाखों साल पहले>ये आदि मानव के रहने का आदर्श ठिकाना था यहां हरियाली थी खाना आसानी से मिल जाता था और इंसानों को दुश्मनों से छुपने की जगह भी मिल जाती थी यहां पर आदि मानव के कंकाल मिलने की एक बड़ी वजह है!

●ये झील>ज्वालामुखी की गतिविधियों वाले इलाक़े में पड़ती है. ,धरती के भीतर की हलचल से,,ऊपरी सतह बनती बिगड़ती रहती हैइस वजह से आदि मानवों के कंकाल,,, भीतरी परतों में छुपकर बचे रह गए!

झील के आस--पास इंसान के कंकालों की खोज,, केन्या के वैज्ञानिक रिचर्ड लीकी ने 1968 में शुरू की थी पहली बड़ी कामयाबी उन्हें 1972 में मिली जब उन्हें होमो रुडोल्फेन्सिस नाम के आदि मानव के सिर का कंकाल मिला इससे इस दावे को बल मिला कि आज के इंसान किसी एक प्रजाति के सीधे वारिस नहीं आज के मानवों से पहले, धरती पर आदि मानव की कई प्रजाति थीं. जैसे 'होमो इरेक्टस(होमो हैबिलिस)(पैरेन्थ्रोपस बोइसी) और अब उसमें होमो रुडोल्फेन्सिस का भी नाम जुड़ गया हो सकता है कि उस वक़्त आदि मानव की और भी नस्लें धरती पर रही हों इन्हीं में से एक, होमो इरेक्टस से आज के इंसान की नस्ल का विकास हुआ तुर्काना झील के पास मिला आठ साल के बच्चे के कंकाल ने इस थ्योरी को सही साबित किया है
इंसानों की पहली प्रजाति अफ्रीका में पैदा हुई थी इन्हीं में से एक होमो इरेक्टस,,, पहले आदि मानव थे जो अफ्रीका से निकलकर एशिया और यूरोप में फैले.!

●ये आज के इंसानों से काफ़ी मिलते-जुलते थे जैसे ये सीधे चलते थे इनका दिमाग़ उस वक़्त के मानव की दूसरी प्रजाति (होमो हैबिलिस)से बड़े थे तुर्काना बच्चे के कंकाल से ये बात भी पता चली कि (‘होमो इरेक्टस’) चलते वक़्त अपने हाथ में कुछ सामान लेकर चल सकते थे.!

●वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर आप तेज़ी से चल सकते हैं. दौड़ते वक़्त हाथ में सामान लेकर चल सकते हैं तो बड़ी बात है. अब अगला सवाल है कि ये आदि मानव आख़िर हाथ में लेकर चलते क्या थे वैज्ञानिक मानते हैं कि (होमो इरेक्टस) आदि मानव,, ज़रूर हाथ में भाले या कुल्हाड़ी लेकर चलते रहे होंगे,, क्योंकि वो फेंकना जान गए थे जबकि हमारे दूसरे पुरखे," बंदर,, चिंपैंजी या गोरिल्ला", जो पेड़ पर रहते थे वो हाथ से कुछ फेंकने में नाकाम थे हाथ से फेंक देने की इस ताक़त के बूते, ‘"होमो इरेक्टस’' शिकार करने के उस्ताद हो गए होंगे इस वजह से उन्हें अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिली उस वक़्त धरती पर बड़े बदलाव हो रहे थे जंगल कम हो रहे थे घास के मैदान बढ़ रहे थे ऐसे में जंगली दुश्मनों से बचने में उस वक़्त के इंसानों को दिक़्क़त होती थी ऐसे में शिकार की कला से वो अपनी जान के दुश्मनों से निपट सकते थे
वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे दुश्मनों का होमो इरेक्टस ने डटकर सामना किया होगा इन्हीं दुश्मनों की वजह से अलग-अलग रहने वाले आदि मानवों को साथ रहने के फ़ायदे भी नज़र आए होंगे वो साथ रहकर शिकार कर सकते थे दुश्मन का मुक़ाबला कर सकते थे ऐसे ही इंसानों के एक दूसरे से जुड़कर क़बीले या समुदाय बनाने की सोच पैदा हुई होगी!

●वैज्ञानिकों को धरती पर कई जगह से पत्थर की बनी कुल्हाड़ियां भी मिली हैं जो उसी दौर की हैं तो होमो इरेक्टस,' पत्थरों को काट--छांटकर ऐसे हथियार बना भी सकते थे और अपने साथियों को सिखा भी सकते थे
पत्थर की ऐसी पहली कुल्हाड़ियां क़रीब अठारह लाख साल पुरानी हैं, 'जो केन्या की तुर्काना झील के पास मिली हैं माना जाता है कि होमो इरेक्टस ने ही इन्हें बनाया होगा!

●वैज्ञानिक मानते हैं कि पहली कुल्हाड़ी के विकास के क़रीब दस लाख साल बाद तक इंसान ने कोई ख़ास तरक़्क़ी नहीं की', क्योंकि पत्थर की इस कुल्हाड़ी से स्विस नाइफ़ जैसे कई काम लिए जा सकते थे शिकार करने से लेकर उसे काटने-छांटने तक हालांकि,' उस वक़्त के आदि मानवों की कोई ज़ुबान नहीं होती थी. मगर वो इशारों से एक दूसरे से बात कर लेते थे तभी ऐसी पत्थर की कुल्हाड़ियां बनाने तरीक़ा भी सिखा देते थे!

●केन्या की तुर्काना झील को आदि मानवों के इतिहास का ख़ज़ाना कहा जाता है. वहां से मिले कुछ और कंकाल, आदि मानवों से पहले के पुरखों के इतिहास पर भी रोशनी डालते हैं जैसे 1974 में मिला लूसी नाम का कंकाल,, जिसे 【ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस’】 प्रजाति का नाम दिया गया था!

●ये बंदरों और आदि मानवों के बीच की मिसिंग लिंक थी जो वैज्ञानिकों के हाथ लग गई थी इस कंकाल के मिलने से पहले ये माना जाता था कि होमो प्रजाति के आदि मानवों से पहले के पुरखेबंदर या गोरिल्ला जैसे ही रहे होंगे मगर,, लूसी नाम का ये कंकाल मिलने से साफ हो गया कि बंदरों से इंसानों का विकास,, लूसी जैसे आदि मानवों के पुरखों के ज़रिए हुआ था!

●नब्बे के दशक में वैज्ञानिकों की टीम ने तुर्काना झील के आस--पास से लूसी के भी पहले की एक नस्ल की खोज कर डाली. इसे '‘ऑस्ट्रेलोपिथेकस एनामेंसिस’ नाम दिया गया कुछ सालों बाद, ,आदि मानवों के पुरखों की एक और प्रजाति का पता चला ये सब खोजें,' तुर्काना झील के पास खोज करने वाले पहले वैज्ञानिक रिचर्ड लीकी की पत्नी मीव लीकी ने की थीं इन नए कंकालों की खोज से वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि इंसान की आज की प्रजाति का विकास किसी एक प्रजाति के आदि मानव से नहीं हुआ आज से क़रीब तीस लाख साल पहले,, धरती पर आदि मानवों से पहले और बंदरों से मिलती जुलती कई प्रजातियां रही होंगी इन्हीं में से एक विकसित होकर आज के इंसान के तौर पर विकसित हुई!

●वैसे तुर्काना झील की परतों में छुपा इंसान के विकास का ये ख़ज़ाना,,अब भी लोगों को चौंका रहा है अभी पिछले साल ही,, झील के पास,' क़रीब तीस लाख साल पुराने पत्थर के हथियार मिले पहले माना जाता था कि पहले हथियार इंसानों की होमो इरेक्टस नस्ल ने बनाए होंगे मगर तीस लाख साल पुराने पत्थर के इन हथियारों से साफ़ हो गया कि उससे पहले के मानवों के पुरखों ने भी कुछ-कुछ कल-पुर्ज़े बनाने सीख लिए थे तुर्काना झील इंसान के विकास का केंद्र रही हो,, ऐसा नहीं बस वो उस जगह पर थी, ,जहां कंकाल सुरक्षित रह गए इसी वजह से उसकी अहमियत बढ़ गई
अगर वहां कंकाल सुरक्षित नहीं रहते,, तो इंसानों को अपनी विकास गाथा समझने में अभी और वक़्त लगना था यही इस झील की सबसे बड़ी अहमियत है!

प्र●【मानव का उदभव और विकास】

लगभग 15 मिलियन वर्ष पूर्व ड्रायोपिथिकस तथा पिथिकस नामक नर वानर विद्यमान थे इन लोगों के शरीर बालों से भरपूर थे तथा गोरिल्ला एवं चिपैंजी जैसे चलते थे रामापिथिकस अधिक मनुष्यों जैसे थे जबकि ड्रायोपिथिकस वन मानुष (ऐप) जैसे थे इथोपिया तथा तंजानिया में कुछ जीवाश्म (फासिल) अस्थियाँ मानवों जैसी प्राप्त हुई हैं ये जीवाश्म मानवी विशिष्टताएँ दर्शाते हैं जो इस विश्वास को आगे बढ़ाती हैं
कि 3-4 मिलियन वर्ष पूर्व मानव जैसे नर वानर गण (प्राइमेट्स) पूर्वी--अप्रफीका में विचरण करते रहे थे ये लोग!

●(संभवतः) ऊँचाई में 4 पुफट से बड़े नहीं थे किन्तु वे खड़े होकर सीधे चलते थे लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व ओस्ट्रालोपिथेसिन
★【(आदिमानव) संभवतः】
पूर्वी अप्रफीका के घास स्थलों में रहता था साक्ष्य यह प्रकट करते हैं कि वे प्रारंभ में पत्थर के हथियारों से शिकार करते थे> किन्तु प्रारंभ में पफलों का ही भोजन करते थे खोजी गई अस्थियों में से कुछ अस्थियाँ बहुत ही भिन्न थीं इस जीव को पहला मानव जैसे प्राणी
के रूप में जाना गया और उसे होमो है बिलिस कहा गया था उसकी दिमागी क्षमता 650-800 सीसी के बीच थी वे संभवत >माँस नहीं खाते थे, 1991 में जावा में खोजे गए जीवाश्म ने अगले चरण के बारे मे भेद प्रकट किया यह चरण था होमो इरैक्टस जो 1.5 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ होमो इरैक्टस का मस्तिष्क बड़ा
था जो लगभग 900 सीसी का था  होमो इरैक्टस ●(संभवतः) माँस खाता था नियंडरटाल मानव 1400 सीसी आकार वाले मस्तिष्क लिए हुए,, 100,000 से 40,000 वर्ष पूर्व लगभग पूर्वी एवं मध्य एशियाई देशों में रहते थे वे अपने शरीर की रक्षा के लिए खालों का इस्तेमाल करते थे और अपने मृतकों को जमीन में गाड़ते थे होमो सैंपियंस (मानव) अफ्रीका में विकसित हुआ और धीरे--धीरे महाद्वीपो से पार पहुँचा था तथा विभिन्न महाद्वीपों में फैला था इसके बाद वह भिन्न जातियों में विकसित हुआ, 75,000 से 10,000 वर्ष के दौरान हिमयुग में यह आधुनिक युगीन मानव पैदा हुआ मानव ने प्रागैतिहासिक गुपफा--चित्रों की रचना लगभग 8,000 वर्ष पूर्व हुई। कृषि कार्य लगभग 10,000 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ और मानव बस्तियाँ बनना शुरू हुईं बाकी जो कुछ हुआ वह मानव
इतिहास या वृध्दि का भाग और सभ्यता की प्रगति का हिस्सा है!

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