प्र●1●बच्चों का Manoranjan : शेर और किशमिश!
27,may,2018.
◆एक खूबसूरत गांव था चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ। पहाड़ी के पीछे एक शेर रहता था जब भी वह ऊंचाई पर चढ़कर गरजता था तो गांव वाले डर के मारे कांपने लगते थे!
◆कड़ाके की ठंड का समय था सारी दुनिया बर्फ से ढंकी हुई थे शेर बहुत भूखा था उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था शिकार के लिए वह नीचे उतरा और गांव में घुस गया।!
◆वह शिकार की ताक में घूम रहा था दूर से उसे एक झोपड़ी दिखाई दी खिड़की में से टिमटिमाते दिए की रोशनी बाहर आ रही थी शेर ने सोचा यहां कुछ न कुछ खाने को जरूर मिल जाएगा वह खिड़की के नीचे बैठ गया!
◆झोपड़ी के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज आई ऊं.आं.ऊं.आं.वह लगातार रोता जा रहा था शेर इधर-उधर देखकर मकान में घुसने ही वाला था कि उसे औरत की आवाज आई- 'चुप रहे बेटा देखो लोमड़ी आ रही है बाप रे, कितनी बड़ी लोमड़ी है कितना बड़ा मुंह है इसका कितना डर लगता है उसको देखकर लेकिन बच्चे ने रोना बंद नहीं किया!
◆मां ने फिर कहा- 'वह देखो, भालू आ गया... भालू खिड़की के बाहर बैठा है बंद करो रोना नहीं तो भालू अंदर आ जाएगा',लेकिन बच्चे का रोना जारी रहा उसे डराने का कोई असर नहीं पड़ा!
◆खिड़की के नीचे बैठा शेर सोच रहा था- 'अजीब बच्चा है यह काश मैं उसे देख सकता यह न तो लोमड़ी से डरता है, न भालू से!
◆उसे फिर जोर की भूख सताने लगी शेर खड़ा हो गया। बच्चा अभी भी रोए जा रहा था!
◆'देखो. देखो.मां की आवाज आई, 'देखो शेर आ गया शेर वह रहा खिड़की के नीचे' लेकिन बच्चे का रोना, फिर भी बंद नहीं हुआ यह सुनकर शेर को बहुत ताज्जुब हुआ और बच्चे की बहादुरी से उसको डर लगने लगा उसे चक्कर आने लगे और बेहोश-सा हो गया!
◆'वह कैसे जान गई कि मैं खिड़की के पास हूं शेर ने सोचा थोड़ी देर बाद उसकी जान में जान आई और उसने खिड़की के अंदर झांका बच्चा अभी भी रो रहा था उसे शेर का नाम सुनकर भी डर नहीं लगा!
◆शेर ने आज तक ऐसा कोई जीव नहीं देखा जो उससे न डरता हो वह तो यही समझता था कि उसका नाम सुनकर दुनिया के सारे जीव डर के मारे कांपने लगते हैं, लेकिन इस विचित्र बच्चे ने मेरी भी कोई परवाह नहीं की उसे किसी भी चीज का डर नहीं है शेर का भी नहीं!
◆अब शेर को चिंता होने लगी तभी मां की फिर आवाज सुनाई दी 'लो अब चुप रहो यह देखो किशमिश' बच्चे ने फौरन रोना बंद कर दिया बिलकुल सन्नाटा छा गया!
◆शेर ने सोचा'यह किशमिश कौन है बहुत खूंखार होगा अब तो शेर भी किशमिश के बारे में सोचकर डरने लगा उसी समय कोई भारी चीज धम्म से उसकी पीठ पर गिरीशेर अपनी जान बचाकर वहां से भागा। उसने सोचा कि उसकी पीठ पर किशमिश ही कूदा होगा!
◆असल में उसकी पीठ पर एक चोर कूदा था, जो उस घर में गाय-भैंस चुराने आया था अंधेरे में शेर को गाय समझकर वह छत पर से उसकी पीठ पर कूद गया डरा तो चोर भी उसकी तो जान ही निकल गई जब उसे पता चला कि वह शेर की पीठ पर सवार है, गाय की पीठ पर नहीं!
◆शेर बहुत तेजी से पहाड़ी की ओर दौड़ा, ताकि किशमिश नीचे गिर पड़े, लेकिन चोर ने भी कसकर शेर को पकड़ रखा था वह जानता था कि यदि वह नीचे गिरा तो शेर उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा शेर को अपनी जान का डर था और चोर को अपनी जान का!
◆थोड़ी देर में सुबह का उजाला होने लगा चोर को एक पेड़ की डाली दिखाई दी उसने जोर से डाली पकड़ी और तेजी से पेड़ के ऊपर चढ़कर छिप गया शेर की पीठ से छुटकारा पाकर उसने चैन की सांस ली!
◆शेर ने भी चैन की सांस ली'भगवान को धन्यवाद मेरी जान बचाने के लिए किशमिश तो सचमुच बहुत भयानक जीव है' औरवह भूखा-प्यासा वापस पहाड़ी पर अपनी गुफा में चला गया!
(कहानी)
◆एक बार राजा कॄष्णदेव राय ने अपने गॄहमंत्री को राज्य में अनेक कुएँ बनाने क आदेश दिया गर्मियॉ पास आ रही थीं, इसलिए राजा चाहते थे कि कुएँ शीघ्र तैयार हो जाएँ, ताकि लोगो को गर्मियों में थोडी राहत मिल सके गॄहमंत्री ने इस कार्य के लिए शाही कोष से बहुत-सा धन लिया शीघ्र ही राजा के आदेशानुसार नगर में अनेक कुएँ तैयार हो गए इसके बाद एक दिन राजा ने नगर भ्रमण किया और कुछ कुँओं का स्वयं निरीक्षण किया अपने आदेश को पूरा होते देख वह संतुष्ट हो गए
गर्मियों में एक दिन नगर के बाहर से कुछ गॉव वाले तेनाली राम के पास् पहुँचे, वे सभी गॄहमंत्री के विरुध्द शिकायत लेकर आए थे तेनाली राम ने उनकी शिकायत सुनी और् उन्हें न्याय प्राप्त करने का रास्ता बताया तेनाली राम अगले दिन राजा से मिले और बोले, “महाराज मुझे विजय नगर में कुछ चोरों के होने की सूचना मिली है वे हमारे कुएँ चुरा रहे हैं!
◆इस पर राजा बोले“क्या बात करते हो, तेनाली! कोई चोर कुएँ को कैसे चुरा सकता है “महाराज यह बात आश्चर्यजनक जरुर है परन्तु सच है वे चोर अब तक कई कुएँ चुरा चुके हैं तैनाली राम ने बहुत ही भोलेपन से कहा!
◆उसकी बात को सुनकर दरबार में उपस्थित सभी दरबारी हँसने लगे!
◆महाराज ने कहा “तेनाली राम, तुम्हारी तबियत तो ठीक है आज कैसी बहकी-बहकी बातें कर रहे हो तुम्हारी बातों पर कोई भी व्यक्ति विश्वास नहीं कर सकता!
◆महाराज मैं जानता था कि आप मेरी बात पर विश्वास नही करंगे, इसलिए मैं कुछ गॉव वालों को साथ साथ लाया हूँवे सभी बाहर खडे हैं यदि आपको मुझ पर विश्वास नहीं है, तो आप उन्हें दरबार में बुलाकर पूछ लीजिए वह आपको सारी बात विस्तारपूर्वक बता दंगे!
◆राजा ने बाहर खडे गॉव वालों को दरबार में बुलवाया एक गॉव वाला बोला“महाराज गॄहमंत्री द्वारा बनाए गए सभी कुएँ समाप्त हो गए हैं आप स्वयं देख सकते हैं!
◆राजा ने उनकी बात मान ली और गॄहमंत्री, तेनाली राम, कुछ दरबारियों तथा गॉव वालो के साथ कुओं का निरीक्षण करने के लिए चल दिए पूरे नगर का निरीक्षण करने के पश्चात उन्होंने पाया कि राजधानी के आस-पास के अन्य स्थानो तथा गॉवों में कोई कुऑ नहीं है राजा को यह पता लगते देख गॄहमंत्री घबरा गया वास्तव में उसने कुछ कुओ को ही बनाने का आदेश दिया था बचा हुआ धन उसने अपनी सुख-सुविधओं पर व्यय कर दिया!
◆अब तक राजा भी तेनाली राम की बात का अर्थ समझ चुके थे वे गॄहमंत्री पर क्रोधित होने लगे, तभी तेनाली राम बीच में बोल पडा “महाराज इसमें इनका कोई दोष नहीं है वास्तव में वे जादुई कुएँ थे, जो बनने के कुछ दिन बाद ही हवा में समाप्त हो गए!
◆अपनी बात स्माप्त कर तेनाली राम गॄहमंत्री की ओर देखने लगा गॄहमंत्री ने अपना सिर शर्म से झुका लिया राजा ने गॄहमंत्री को बहुत डॉटा तथा उसे सौ और कुएँ बनवाने का आदेश दिया इस कार्य की सारी जिम्मेदारी तेनाली राम को सौंपी गई!
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