प्र●1●घमंडी राजा की कहानी!
25,may,2018
◆एक राज्य में एक राजा राज करता था और वह बहुत ही घमंडी था लोगों को कुछ भी नहीं समझता था लोगों पर अत्याचार करता था और परेशान करता था वह जबरदस्ती कर वसूलता था फिर एक दिन उस राजा ने सभी से कर वसूलने के लिए अपने सेनापति को भेजा!
◆जब सेनापति अपने साथ कुछ सिपाहियों को लेकर कर वसूलने के लिए जा रहे थे तो रास्ते मे उन्हे 1 आदमी मिला और सेनापति ने उस आदमी से कहा कि तुमने बहुत समय से अपना कर नहीं दिया है इस पर उस आदमी ने कहा कि मेरे पास अभी कर चुकाने लायक धन नहीं है!
◆फिर सेनापति उसे पकड़ कर अपने साथ ले गए हो राजा के सामने उपस्थित किया और कहा कि आदमी कर देने से मना कर रहा है इस पर राजा ने कहा कि इसे अगले दिन बुलाना मैं इसे सजा सुनाऊंगा आदमी बहुत गिड़गिड़ाया और कहने लगा महाराज मुझे माफ करना मेरे पास इतना धन नहीं है!
{छोटी सी मुलाकात कहानी }
◆जिससे कि मैं आपका कर चुका सकूं तभी राज्य में एक साधु महाराज पधारे और फिर उन्होंने देखा कि राजा अत्याचार कर रहे हैं और साधु ने कहा कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं इस पर राजा ने कहा कि अगर तुम भी ज्यादा सवाल जवाब करोगे तो मैं तुम्हें भी सजा सुना दूंगा क्योंकि मैं इस देश में महान राजा हू!
◆तो साधु ने पूछा कि अगर मैं तुम्हें एक ऐसी जगह पर लाकर खड़ा कर दूं जहां पर कुछ भी ना हो तो तुम क्या करोगे राजा ने कहा कि मैं फिर अपने खाने-पीने की तलाश करूंगा इस पर साधू ने कहा है कि अगर तुम अपने खाने पीने के लिए किसी को क्या दे सकते हो!
◆राजे ने कहा कि मैं अपने खाने पीने के लिए अपना आधा राज्य भी दे सकता हूं फिर साधु ने कहा कि अगर मैं आधे राज्य पर भी ना मानो तो तुम मुझे और क्या दोगे तब राजा ने कहा कि मैं पूरा राज्य दे दूंगा फिर साधु ने कहा है कि आप देख लो कि तुम्हारे पास क्या है!
◆तुम अपनी खाने-पीने के बदले पूरा राज्य देने के लिए तैयार हो अगर तुम्हें खाना ना मिले तो तुम उसके लिए सब कुछ देने के लिए तैयार हो या नहीं कि तुम्हारे पास इसके बाद कुछ भी नहीं रहेगा इसलिए हर इंसान को इतना घमंड नहीं करना चाहिए कि एक समय ऐसा आ जाए कि उसको सब कुछ खोना पड़े राजा को बात समझ में आ गई और फिर राजा ने उस दिन से अपना घमंड करना बिलकुल छोड़ दिया.!
◆बिना सोचे विचारे,एक दिन एक आदमी बहुत ही परेशान था वह अपनी समस्याओं से इतना परेशान हो गया था कि वह सोच रहा था मैं क्या करूं कहां जाऊं और कैसे रहूंगा जब बहुत अधिक सोच लिया तो उसे एक विचार आया कि अब तो मुझे अपना जीवन समाप्त कर देना चाहिए!
◆ क्योंकि मेरे कुछ नहीं है ना खाने को कुछ है न करने को कुछ है और मैं बहुत परेशान भी हूं इस परेशानी से निकलने का सिर्फ यही एक रास्ता है {Read more-एक धनी व्यक्ति}जब आदमी अपने जीवन को समाप्त करने के लिए जा रहा था तो तभी रास्ते में एक महात्मा उसे मिले और उसने पूछा कि तुम कहां जा रहे हो तब
उसने बताया कि महाराज मैं बहुत दुखी हूं अपने जीवन को समाप्त करने के लिए जा रहा हूं इस पर महात्मा ने कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधा न आश्रम में चलो मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूं और अगर तुम मेरी सेवा 3 साल तक करते हो तो मैं तुम्हें जादुई पात्र बनाने की भी विद्या सिखा सकता हूं अगर जो चाहो इसमें से चुन लो तो आदमी ने कहा कि मुझे तो जल्द से जल्द अपनी परेशानी खत्म करनी है तो मुझे तो आप 1 साल तक ही बता दीजिए!
◆मैं जादुई पात्र मुझे जिस तरह मिल जाए फिर उस आदमी ने 1 साल तक साधु की सेवा की ओर साधु ने उसे वह जादुई पात्र दे दिया अब जादुई पात्र लेकर अपने घर गया और बहुत सारी चीजें उसने बनाई और उससे बहुत सारा सामान भी बनाया जो की उसके आराम के लिए काफी था और ऐसे बीते बीते कुछ साल बीत गए!
◆और एक दिन वह बहुत ज्यादा आलस में पड़ गया ना कुछ काम करता था ना कुछ बस मजे ही मजे करता था और इस तरह वह मजे करता हुआ एक दिन नाच रहा था और नाचते- नाचते उसने वह पात्र गिरा दिया पात्र गिरते ही टूट गया!
◆वह सारा उसका जादुई असर खत्म हो गया और वह फिर से वही जीवन में आ गया जैसा कि वह पहले था फिर उस आदमी ने सोचा कि अगर मैंने गुरु जी की सेवा 3 साल तक की होती तो मुझे जादुई पात्र बनाने की भी विद्या जाती!
◆लेकिन मैंने जल्दबाजी में सिर्फ 1 साल ही में ही वह पात्र लेकर मैं आ गया है अगर मैं बहुत थोड़ा रुक जाता तो मुझे और भी कुछ मिल सकता था!
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