बड़े बनने के लिए बड़ा सोचो और तेज सोचो!

प्र◆1●बड़ा सोचो, तेज सोचो!
24,may,2018

【बड़ा सोचो तेजी से सोचो और सबसे आगे का सोचो सोच आपकी है, उस पर किसी का एकाधिकार नहीं है】

◆एक पुरानी कहावत है –> सोचते सब हैं, योजना कुछ लोग बनाते हैं और उस पर अमल तो बहुत ही कम लोग करते हैं यही हकीकत है ख्याली पुलाव तो सबसे आसान है और इसी कारण यह सब कर लेते हैं जो इस पर योजना बना लेता है, वह आधा सफल हो जाता है और जो उस योजना पर अमल कर लेता है, वह पूरी तरह कामयाब हो ही जाता है!

◆कुरूक्षेत्र में शेख चिल्ली का मकबरा है कहते हैं शेख चिल्ली को ख्याली पुलाव से फुर्सत ही नहीं मिल पाती थी और वह उन्हीं बड़े–>बड़े ख्वाबों में खोया हुआ, बड़ी–बड़ी बातें करता हुआ इस दुनिया से चला गया, लेकिन ऐसा कुछ अच्छा काम नहीं कर पाया कि उसके उदाहरण दिए जाएं!

◆शेख चिल्ली का उदाहरण दिया जाता है, लेकिन सिर्फ नेगेटिव सेंस में अकसर लोगों को कहते सुना होगा  क्यों शेख चिल्ली की तरह बड़ी–बड़ी हांक रहे हो, कुछ काम–>धाम कर लो सिर्फ बड़ी–बड़ी बातें करने वाले को तो शेख चिल्ली नाम ही दे दिया जाता है। तो क्या ख्वाब नहीं देखने चाहिए!

◆जी नहीं, ख्वाब देखने चाहिए, यह सबका हक है लेकिन उनको पूरा करने के लिए तेजी से सोचिए एक पेट्रोल पंप से शुरू कर देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी खड़े करने वाले धीरूभाई अम्बानी का कहना था  बड़ा सोचो, तेजी से सोचो और सबसे आगे का सोचो!

◆जहां तक सोचकर लोग सोचना बंद कर देते हैं, वहां से सोचना शुरू कीजिए हमेशा बड़ा सोचिए, तेजी से सोचि क्योंकि सब सोच रहे हैं और अच्छी बात यह है कि सोच पर आपका पूरा एकाधिकार है आप जो चाहें सोच सकते हैं, बस उसे पूरा करने के लिए योजना सही तरीके से बनाना और उस पर अमल करते समय किसी बाधा से घबराना मत सोचिए, योजना बनाइए और हासिल कर लीजिए दोस्तो, जापान में एक कहानी बचपन से पढ़ाई–सिखाई जाती है आपके साथ शेयर कर रहे हैं, उम्मीद है आपको पसंद आएगी!

◆एक बार जूते बनाने वाली एक कंपनी ने एक अत्यंत पिछड़े इलाके में अपना सेल्स मैनेजर भेजा और कहा कि जाकर पता लगाओ कि वहां हमारे जूते बेचने की क्या संभावना है◆

◆सेल्स मैनेजर चला गया वहां जाकर उसने देखा कि एक भी आदमी के पांव में जूते नहीं हैं बच्चे –>जवान –> बूढ़े, सब नंगे पांव देखकर उसे बड़ी निराशा हुई उसने अपनी रिपोर्ट तैयार की और वापस लौट आया

◆कंपनी में रिपोर्ट जमा की जिसमें लिखा कि आबादी तो वहां बहुत है, लेकिन वहां हमारे जूते बेचने का कोई अवसर नहीं है, क्योंकि वहां तो कोई भी जूते पहनता ही नहीं कंपनी ने उसकी बात मान ली और कुछ दिनों तक वहां के लिए कोई रणनीति नहीं बनाई!

◆चूंकि कंपनी को अपना बाजार बढ़ाना था, कुछ दिन बाद कंपनी ने फिर दूसरे सेल्स मैनेजर को उसी इलाके में भेजा और कहा कि पता करके आओ वहां हमारे जूतों के लिए कोई संभावना है या नहीं!

वह मैनेजर उस इलाके में पहुंचा, देखा कि वहां तो कोई भी जूते–चप्पल पहने हुए नहीं है, सब नंगे पांव घूम रहे हैं। उसने रिपोर्ट बनाई और वापस लौट गया ।

◆जाकर कंपनी में रिपोर्ट जमा की कंपनी उसकी रिपोर्ट देखकर चौंक गई उसने लिखा था हमारी कंपनी के लिए वहां अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि वहां किसी के पास जूते हैं ही नहीं हम वहां बहुत बड़ा बाजार बना सकते हैं!

◆दो लोग, एक ही जगह गए, एक ही परिस्थिति का जायजा लिया, लेकिन दोनों की रिपोर्ट एकदम विपरीत दोस्तो, इसे कहते हैं नजरिया एक ने जहां तस्वीर का नकारात्मक यानी नेगेटिव पहलू देखा, दूसरे ने उसका सकारात्मक पहलू देखा आप किस पहलू को देखते हैं, यही आपका भविष्य, आपका कॅरियर, आपकी सफलता तय करेगा इसलिए अवसर पहचानिए और आगे बढि़ए आग लग गई सब चले गए है!

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