किसी व्यक्ति की महानता पर शक नहीं करना चाहिए.। एक गांव के बुजुर्गों की कहानी.।

प्र●1●किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं!
22,may,2018

◆एक बार की बात है किसी गाँव में एक पंडित रहता था| वैसे तो पंडित जी को वेदों और शास्त्रों का बहुत ज्ञान था लेकिन वह बहुत ग़रीब थे| ना ही रहने के लिए अच्छा घर था और ना ही अच्छे भोजन के लिए पैसे!

◆एक छोटी सी झोपड़ी थी,, उसी में रहते थे और भिक्षा माँगकर जो मिल जाता उसी से अपना जीवन यापन करते थे!

◆एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये,, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे और काफ़ी जगह से फट भी गये थे!

◆जब उन्होने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया,, उसने जब पंडित को फटे चिथड़े कपड़ों में देखा तो उसका मन घ्रणा से भर गया और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया,, बोला-- पता नहीं कहाँ से गंदा पागल चला आया है!

◆पंडित दुखी मन से वापस चला आया,, जब अपने घर वापस लौट रहा था तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित के फटे कपड़ों पर पड़ी तो उसने दया दिखाई और पंडित को पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए!

◆अगले दिन पंडित फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गया| व्यक्ति ने नये कपड़ों में पंडित को देखा और हाथ जोड़कर पंडित को अंदर बुलाया और बड़े आदर के साथ थाली में बहुत सारे व्यंजन खाने को दिए पंडित जी ने एक भी टुकड़ा अपने मुँह में नहीं डाला और सारा खाना धीरे धीरे अपने कपड़ों पर डालने लगे और बोले-- ले खा और खा!

◆व्यक्ति ये सब बड़े आश्चर्य से देख रहा था, आख़िर उसने पूछ ही लिया कि-- पंडित जी आप यह क्या कर रहे हैं सारा खाना अपने कपड़ों पर क्यूँ डाल रहे हैं!

◆पंडित जी ने बहुत शानदार उत्तर दिया- क्यूंकी तुमने ये खाना मुझे नहीं बल्कि इन कपड़ों को दिया है इसीलिए मैं ये खाना इन कपड़ों को ही खिला रहा हूँ कल जब में गंदे कपड़ों में तुम्हारे घर आया तो तुमने धक्के मारकर घर से निकाल दिया और आज तुमने मुझे साफ और नये कपड़ों में देखकर अच्छा खाना पेश किया| असल में तुमने ये खाना मुझे नहीं,, इन कपड़ों को ही दिया है,, वह व्यक्ति यह सुनकर बहुत दुखी हुआ!

◆मित्रों,, किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं अच्छे कपड़े और गहने पहनने से इंसान महान नहीं बनता उसके लिए अच्छे कर्मों की ज़रूरत होती है यही इस कहानी की प्रेरणा है!

【निच्चे जरूर पड़े】

प्र●2●भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं!
22,may,2018

◆एक बार की बात है कि किसी दूर गाँव में एक किसान रहता था उन दिनों बारिश का समय था चारों तरफ गड्ढों में पानी भरा हुआ था कच्ची सड़क बारिश की वजह से फिसलन भरी हो गयी थी सुबह सुबह किसान को बैलगाड़ी लेकर कुछ धन कमाने बाजार जाना होता था लेकिन आज बारिश की वजह से बहुत दिक्कत हो रही थी फिर भी किसान धीरे धीरे सावधानी पूर्वक बैलगाड़ी लेकर बाजार मारकेट की ओर जा रहा था!

◆अचानक रास्ते में एक गड्ढा आया और बैलगाड़ी का पहिया गड्ढे में फंस गया कीचड़ भरे गड्ढे से निकलना काफी मुश्किल था बैल ने भी अपनी पूरी ताकत लगायी लेकिन सफलता नहीं मिली अब तो किसान बुरी तरह परेशान हो उठा उसने चारों तरफ नजर घुमाई लेकिन ख़राब मौसम में दूर दूर तक कोई नजर नहीं आया किसान सोचने लगा कि किससे मदद माँगे कोई इंसान दिखाई ही नहीं दे रहा किसान दुखी होकर एक तरफ बैठ गया और मन ही मन अपने भाग्य को कोसने लगा हे भगवान ये तूने मेरे साथ क्या किया कोई आदमी भी दिखाई नहीं दे रहा इतना खराब नसीब मुझे क्यों दिया किसान खुद के भाग्य को कोसे जा रहा था!

◆तभी वहाँ से एक सन्यासी गुजरे उन्होंने किसान को देखा तो किसान सन्यासी के पास जाकर अपनी परेशानी बताने लगा मैं सुबह से यहाँ बैठा हूँ, मेरी गाड़ी फँस गयी है और मेरा नसीब भी इतना ख़राब है कि कोई मेरी मदद करने भी नहीं आया भगवान ने मेरे साथ बहुत अन्याय किया है सन्यासी उसकी सारी बात सुनकर बोले- -तुम इतनी देर से यहाँ बैठे अपने भाग्य को कोस रहे हो और भगवान को बुरा भला बोल रहे हो,, क्या तुमने खुद अपनी गाड़ी निकालने का प्रयास किया!

◆सन्यासी--तो फिर किस हक़ से तुम भगवान को दोष दे रहे हो,, भगवान उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो स्वयं की मदद करते हैं!

◆अब किसान के बात समझ में आ गयी उसने तुरंत पहिया निकालने का प्रयास किया और वो सफल भी हुआ!

◆तो मित्रों हममें से ज्यादातर लोग उस किसान की ही तरह हैं जो खुद कुछ नहीं करना चाहते और हमेशा अपने भाग्य और दूसरे लोगों को कोसते रहते हैं हमें लगता है कि भगवान ने हमारे साथ बहुत गलत किया है। हममें से कोई डॉक्टर बनना चाहता है,, कोई इंजिनियर ,,कोई कलेक्टर,, कोई लेकिन जब हम अपने काम में सफल नहीं होते तो यही विचार हमारे दिमाग में आता है कि हमारा भाग्य ख़राब है और भगवान ने कुछ नहीं दिया लेकिन शायद आप भूल रहे हैं कि भगवान ने आपको,, हम सबको एक बहुत अमूल्य चीज़ दी है--ये शरीर आपके अंदर हर सामर्थ्य है तो फिर आप भाग्य भरोसे क्यों हैं भगवान भी उन्हीं लोगों की मदद करते हैं जो खुद की मदद करते हैं किसी महान पुरुष का एक दोहा है!

(विद्या धन उद्धम बिना, कहूँ जो पावे कौन ,
बिना डुलाये ना मिले, ज्यूँ पंखा की पौध)

◆मतलब बिना कार्य किये आप कुछ नहीं पा सकते जैसे आपके सामने पंखा रखा हो लेकिन वो जब तक आपको हवा नहीं देगा जब तक उसे अपने हाथ से झलेंगे नहीं!

◆तो मित्रों इस लेख का सार यही है कि आप खुद की मदद करिये तभी भगवान भी आपकी मदद करेंगे तो आओ आज मिलकर एक साथ शपथ लेते हैं कि कभी अपने भाग्य को नहीं कोसेंगे और स्वयं ही अपने कर्णधार बनेंगे!

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