प्र●1●हिंदी साहित्य के इतिहास को और व्यापक करती किताब जैसे की आप जानते है!
20 May 2018
◆हिंदी साहित्य के इतिहास पर पिछली एक शताब्दी में काफी काम हुआ और लिखा पढ़ा गया है आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हजारी बाबू से लेकर नए दौर के विषय विशेषज्ञों तक इसकी कड़ियों को पिरोकर एक परिमार्जित साहित्य इतिहास बनाने की कोशिशें होती रही हैं और अब इस कड़ी में एक और पुस्तक जुड़ गई है!
●नई पुस्तक है 【हिंदी साहित्य का इतिहास】 और इसके लेखक हैं डॉ मान सिंह वर्मा पुस्तक भारत भारती प्रकाशन मेरठ से प्रकाशित हुई है और मात्र 300 रूपए में पेपरबैक संस्करण लोगों के लिए उपलब्ध है हालांकि सज्जा और कवर के लिहाज से पुस्तक साधारण दिखती है लेकिन अनुक्रम देखकर इसकी व्यापकता का अंदाज़ा लगता है!
◆डॉ मान सिंह वर्मा अपने कई वर्षों के प्रयास के बाद इसे मूर्तरूप दे सके हैं और यह मेहनत पुस्तक की परिकल्पना और गठन में दिखाई भी देती है हिंदी साहित्य के इतिहास के अभी तक बताए> लिखे ढर्रे से बाहर देखने की कोशिश इस पुस्तक में की गई है यह पुस्तक साहित्य के इतिहास में कुछ लापता नामों और विधाओं को भी जोड़ने में सफल रही है और इस तरह यह अधिक समावेशी इतिहास की ओर लेकर जाने में सफल पुस्तक है!
◆भारतेंदु से शुरु करके हिंदी खड़ी बोली के इतिहास को देखने की परिपाटी में डॉ मान सिंह वर्मा एक और नाम जोड़ते हैं वो भारतेंदु हरिशचंद्र और श्रीधर पाठक से भी पहले संतकवि गंगादास (1823-1913) को अपने शोध और तर्क के आधार पर खड़ी हिंदी के पहले कवि के तौर पर स्थापित करते हैं और उनको साहित्य इतिहास का हिस्सा बनाते हैं!
◆पुस्तक जितना पीछे जाकर इतिहास में गोते लगाती है उसी तत्परता से आगे की ओर भी देखती है और इसी क्रम में गीत--गज़ल और हाइकु को भी हिंदी लेखन की नव विधाओं के तौर पर मान्यता देते हुए उन्हें भी हिंदी साहित्य के इतिहास में जगह दी गई है!
◆इतना ही नहीं पुस्तक 【हिंदी साहित्य】 के लिए अपना योगदान देने वाले अहिंदी लेखकों और कवियों को भी अपने में संजोती है और हिंदी की धरोहर को और प्रसार देने वाले नायकों में इन नामों को शामिल करती है!
◆हिंदी साहित्य का इतिहास जिन देशकाल और परिस्थितियों से गुज़रा है और जिनकी इसमें भनक दिखती है उसे भी डॉ मान सिंह वर्मा अपने इतिहास लेखन का हिस्सा बनाते हैं उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के उन चेहरों को भी हिंदी साहित्य के इतिहास में स्थान दिया है जिन्होंने अपने लेखन और प्रचार--प्रसार के माध्यम से हिंदी को बढ़ाने का काम किया है!
★【व्यापक पुस्तक का दायरा】
◆पुस्तक हिंदी साहित्य के इतिहास को आदिकाल से शुरु करते हुए इसमें सिद्ध साहित्य नाथ साहित्य और जैन साहित्य को भी स्थान देती है दरअसल> हिंदी के बनने के क्रम में इनको बाहर रखकर बात नहीं की जा सकती है साथ ही रीतिकाल के गद्य साहित्य को भी यह पुस्तक अलग से स्थान देकर ब्रज> दक्खिनी> खड़ी बोली गद्य और राजस्थानी गद्य को अच्छे से समझाती है!
◆ख़ास बात यह है कि इस पुस्तक को प्रयोजनमूलक भी रखा गया है और साथ ही हिंदी साहित्य के इतिहास को और व्यापक दायरे में रखने की कोशिश भी की गई है इससे विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य की समझ में तो मदद मिलती ही है साथ ही परीक्षाओं की दृष्टि से भी यह पुस्तक खासी उपयोगी है!
अपने अद्यतन होने और अपनी समग्रता के कारण यह पुस्तक संग्रहणीय है और इसे आसानी से अपनी किताबों की चयनसूची में शामिल किया जाना चाहिए ताकि जब--तब इसकी मदद से संदर्भों को साधने में मदद मिल सके!
【नीचे और भी खबर है पूरा पढ़ें प्लीज】
प्र●2●【तो नॉर्वे> फिनलैंड की तरह पर भारत भी बनेगा सबसे खुश देश!】
20.may .2018
◆मानव विकास के ज्यादातर मानकों पर बढ़िया रिकॉर्ड रखने वाले नार्वे फिनलैंड, डेनमार्क, आइसलैंड जैसे देशों से भारत 【खुशहाली】 के गुर सीखेगा!
◆ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा के तहत भारत-नार्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान इन देशों के साथ कचरा प्रबंधन,, स्टार्टअप,, शिक्षा,, दुग्ध उत्पादन,, मछली पालन,, किसान कल्याण,, स्थानीय प्रशासन जैसे विषयों पर सहयोग को लेकर सहमति बनी है!
◆नॉर्वे,, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड नार्डिक देशों में शामिल हैं,इन देशों में न सिर्फ व्यवस्था अच्छी है, बल्कि इन्हें दुनिया के सबसे खुश देशों की सूची में अक्सर ऊपर रखा जाता है, इन देशों का नाम मानवाधिकार,, जीवनशैली,, बराबरी,, महिला अधिकार,, मानव विकास,,अपराध नियंत्रण,, न्याय प्रणाली,, प्रशासनिक तंत्र जैसे दर्जनों सूचकांकों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में अग्रणी है!
◆(खुश देश)
विभिन्न विशेषज्ञ इन क्षेत्रों में भारत के रिकॉर्ड में सुधार की जरूरत बताते रहे हैं और जोर देते रहे हैं कि भारत इन देशों से बहुत कुछ सीख सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16-17 अप्रैल को स्वीडन की यात्रा के दौरान नार्डिक देशों के शासनाध्यक्षों के साथ बैठक की थी. इस दौरान व्यापार और निवेश,, अक्षय ऊर्जा,, कचरा प्रबंधन,,स्टार्टअप और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी!
◆प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और डेनमार्क के बीच पशुपालन,, डेयरी,, मत्स्य पालन तथा खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए. इसके अलावा दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा तथा कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भी समझौता किया. दोनों देशों ने स्मार्ट शहरी विकास के क्षेत्र में भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए!
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प्र●3●【बच्चों के नाम संस्कृत में क्यों रख रहे हैं मनुष्य】
20.may.2018
◆लखनऊ यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडे को संस्कृत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रपति सम्मान के लिए चुना गया है यह सम्मान उन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया जाएगा पांडे को हाल ही में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था!
◆प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडे की अब तक तकरीबन 50 किताबें और 150 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं वे पेरिस की सोरबोन नोविली यूनिवर्सिटी में बतौर विजिटिंग प्रोफेसर काम कर चुके हैं राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सचिव सदस्य रह चुके प्रो पांडे को 2003 में वेद रत्न पुरस्कार 2006 में सरस्वती सम्मान 2008 में साहित्य अकादमी 2010 में वाल्मीकि सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है पेश हैं उनसे हुई बातचीत के अंश!
◆संस्कृत आज खत्म होती हुई सी क्यों नजर आ रही है संस्कृत भाषा खत्म होने के पीछे सबसे बड़ी वजह है विजन. लोगों ने सही तरीके से संस्कृत पढ़ने वाले को विजन नहीं दिया. हमारी सबसे बड़ी कमी ये है कि हम लोगों को जोड़ नहीं पा रहे और वो जुड़ नहीं पा रहे हैं. दूसरी वजह यह है कि संस्कृत कभी जीविका का साधन नहीं बन पाई. पहले लोग संस्कृत पढ़कर शासन-प्रशासन मे ऊंचे पदों पर होते थे. वक्त के साथ्ा ऐसा होना बंद हो गया!
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