मेरा नया बचपन जैसे की.।

प्र● मेरा नया बचपन जीने पीछे छोड़ कर आई थी मेरी बच्ची ने मुझे याद दिलाया यह मेरा बचपन.।
1● बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन मेरी.।
2● गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी.।
3● चिंता रहित खेलना खाना फिर फिरना निर्भय स्वस्थ.।
4● कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद.।
5● ऊंच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने जानी.।
6● बनी हुई थी आह झोपड़ी और चित्रों में रानी.।
7● रोना और मचल जाना भी क्या हम दिखाते थे.।
8● बड़े-बड़े मोती से आंसू जय माला पहनाते थे.।
9● वह भोली सी मधुर सरलता वर्क प्यारा जीवन निष्पाप.।
10● क्या फिर आकर मिटा सकेगा तू मेरे मन का संताप.।
11● मैं बचपन को बुला रही थी बोल उठी बिटिया मेरी.।
12● नंदनवन से फूल उठी वह छोटी सी कुटिया मेरी.।
13● मां और अहंकार बुला रही थी मिट्टी खाकर आई थी.।
14● कुछ मुंह में कुछ लिए हाथ में मुझे खिलाने लाई थी.।
15● मैंने पूछा यह क्या लाई बोल उठी मां खाओ.।
16● हुआ प्रफुल्लित हवाई खुशी से मैंने कहा तुम ही खाओ.।
17● भाई आप बचपन फिर से मैंने बचपन बेटी बनाया.।
18● उसकी मंजूर मूर्ति देखकर मुझ में नवजीवन आया.।
19● मैं भी उसके साथ खेलती खाती हूं तुतलाती है.।
20● मिलकर उसके साथ स्वयं ही बच्ची बन जाती हूं.।

( नमस्कार दोस्तों आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो लाइक और शेयर करें और जानकारी के लिए फॉलो बटन को क्लिक करें.।)

Comments