प्र●19 कारण जैसे कि>
1●प्रभु जी तुम चंदन हम पानी जाकी अंग-अंग बास समानी.।
2● प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा जैसे चितवत चंद चकोरा.।
3● प्रभुजी तुम दीपक हम बाती जाकी जोति बरै दिन राती.।
4● प्रभु जी तुम मोती हम धागा जैसे सोनी मिलत सुहागा.।
5● प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा ऐसी भक्ति करे रैदासा.।
6● नरहरि चंचल है मति मेरी.।
7● कैसे भक्ति करूं मैं तेरी.।
8● तुम ही देखे हो तो ही देखो पीती परस्पर होई.।
9● तुम वही देखे तो ही ना देखूं या मति सद्बुद्धि खोई.ः
10● सब घट अंतर रंग शिविर में देखने नहीं जाना.।
11● गुमसुम तोर मोर सबको गुणसूत्र उपकार नाम माना.।
12● नीतू तोरी मोरी अस्मत जी सो कैसे करी निस्तारा.।
13● सूरदास कृष्ण करुणामय जय जय जगत का अधारा.।
14● ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै.।
15● गरीब नेवाजू को सैया मेरा बात है शत्रु धरै.।
16● नीच ऊच करें मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै.।
17● जाकी छोति जगत कउ लागै था पर तू ही डरे.।
18● नामदेव कबीर त्रिलोचन ओ सजना सैनु तरै.।
19● कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरि जीउ ते सभै सरै.।
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