प्रेम और सौन्दय क्या है.।

प्रेम और सौंदर्य जैसे कि >
                                    प्रेम का भाव संसार को सुखद और संपूर्ण बनाने वाला है प्रेम के अंतर्गत पूंजी मानवीय भाव की परिपूर्णता की जा सकती है जो संपूर्ण सृष्टि से मनुष्य के रागात्मक संबंधों की स्थापना में सहयोग करते हैं प्रेम अनुभूति का विषय है इस अनुभूति का विस्तार मानवेतर प्राणियों में भी परिलक्षित होता है प्रेम में पारस्परिक आकर्षण का भावना विद्यमान रहती है इसीलिए मिलना का आतुरता के साथ मिलन की अनु रजक स्त्रियों का वरुण प्रेम की तीव्रता की घोषणा है इसी क्रम में प्रेम के ही अंतर्गत वीर की स्थितियों का वर्णन प्रेम की ग्रह न था और प्रेम की एक निश्चित को व्यक्ति करने वाला है सौंदर्य प्रेम की आधारभूमि इसलिए प्रेम के क्षेत्र में रूप-सौंदर्य चेष्टा सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य का अपना महत्व है एक तरह से सौंदर्य कि यह तीनों कोटियां प्रेम के उत्तरोत्तर विकास में अपनी भूमिका निभाती है साहित्य के अंतर्गत प्रेम और सौंदर्य की अनुभूतियां संगार रस के वर्ण में व्यक्त हुई है हिंदी साहित्य में संघार वर्ण की सुंदरियों पर प्राप्ति काल में तो प्रेम और सौंदर्य केंद्रीय भाव के रूप में प्रतिष्ठित तत्व है आधुनिक काल में भी मानवीय चेतना के इस समुद्र वृक्ष को कवियों ने अपनी रचनात्मक अनुभूतियों के रूप में प्रस्तुत किया है रीतिकाल के भविष्य कवि घनानंद प्रेम और सौंदर्य के MP3 कवि माने जाते हैं और वह प्रेम की अनुभूति के घर आई और समानता के कुशाल कवि हैं तो दूसरी और वसुंधरा के भाव और चतुर कवि हैं संग्रहित कविताओं में घनानंद जी अपने प्रिय सुजान के प्रति भेदभाव पूर्ण प्रणय अभिव्यक्तियों का प्रकाशन हुआ है उनका प्रणय लोकगीत लोकगीत मनोभूमि तक की जाती है कृष्ण के सौंदर्य पर रहने वाली आंखें दिन राधा कृष्ण वियोग में ही डूबी रहती है प्रेम की एक परीक्षा तीव्रता का सुंदर घनानंद ने किया है इसीलिए प्रेम की अवहेलना के चित्रण घनानंद किया है इसलिए प्रेम की भावना के परिणाम स्वरुप उपन्यास में पीड़ा का बखान उनके काव्य की मूल विशेषताएं घनानंद प्रेम की जिद्दी आशिक को ही जीवन मूल्य का एक प्रेम को स्वाभिमान मानते हैं प्रेम में च**** का कोई स्थान नहीं है कपट का तो प्रेम के क्षेत्र में लेशमात्र स्थान नहीं है सुंदरी के भाव मयूर नेत्र शादी का माहौल चित्रण करते हुए घनानंद छन छन करती सुंदरता का चेस्ट चित्रण किया है रीतिकाल में देव का सौंदर्य वर्णन 3 पदों में उन्होंने रूप सुंदरी और मिलन चेष्टाओं का भाव चित्रण किया है कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन करते हुए उनको संसार रूपी घर में प्रज्वलित दीपक के छह रूप में अनुभव किया है राधा और कृष्ण के मिलन की विशेषताओं की चर्चा करते हुए उन्होंने प्रेम ने व्याकुल प्रिय प्रेमी की एक निश्चित आकृति का वर्णन किया है यही प्रेम सौंदर्य है.।

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