अपवाह तंत्र से आशय क्या है.।

अपवाह तंत्र  शब्द से आशय किसी क्षेत्र के नदी तंत्र से यदि हम किसी भी प्रकृति का मानचित्र को देखें तो पाएंगे कि कोई छोटी धाराएं विभिन्न दिशाओं से बनकर आती है और मिलकर एक मुख्य नदी का निर्माण करती है यह मगर जल के बड़े भाग जैसी गील समुद्र अथवा महासागर में मिलती है वर्षा की मात्रा तथा उच्च का स्वरूप अपवाह तंत्र की रचना करते हैं नदी अपनी सहायक धाराओं के साथ जिस जल क्षेत्र को प्रभावित करती है तथा उस प्रदेश की प्राकृतिक रचना करती है उसे उस नदी का अपवाह तंत्र दुनिया अपवाह क्षेत्र का तेल नदी का कटाव भाव तथा + के द्वारा विभिन्न आकृतियों का निर्माण करती है नदिया धरातल की संरचना के अनुसार विभिन्न प्रकार के अपवाह प्रतिरूप में भर्ती है भारत के नदियों के मानचित्र का अवलोकन करने पर पता चलता है कि कोई भी ऊंचा क्षेत्र जैसे पर्वतीय उच्च भूमि दो पड़ोसियों को एक दूसरे से अलग करते हैं इस प्रकार की उस भूमि को जल विभाजक करते हैं जब एक नदी दूसरे नदी के जल क्षेत्र को अपने में मिला लेती है तो उसे नदी अपहरण करते हैं दिए गए भारत की नदियां के प्रभाव को देखिए कि कौन सी नदी कहां से निकली है समुद्र में कहां गिरती है भारतीय अपवाह तंत्र भारत के धरातल की रचना में विभिन्नता के कारण अब अपवाह तंत्र में अंतर दिखाती देती है इस धारा पर भारतीय नदियां को दो वर्गों में विभाजित कर सकते हैं.।
1● हिमालय की नदियां> हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों के मुख्य विशेषता है कि इन में वर्ष भर पानी रहता है कि क्षेत्र की नदियों को वर्षा के जल के अतिरिक्त ऊंचे पर्वतों के हिम के पिघलने से इनमें जल आपूर्ति होती रहती है पर्वतीय भागों से आने के कारण यह नदिया गहरी घटिया घाट जवाब जानने बनती है अपनी पूर्व अवस्था के साथ-साथ मैदानी भागों में जमा करती है मध्य निचले भागों में यह नदियां विसर्प गोखुर झील तथा भाड़ वाले मैदान का निर्माण करती है हिमालय से तीन बड़ी नदियां निकलती है.।
2● सिंधु नदी तंत्र> इस तंत्र में सिद्धू और उसकी सहायक नदी को सम्मिलित किया जाता है सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2900कि .मी सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर के पास से निकल कर पश्चिम की ओर बहती हुई जम्मू और कश्मीर के उद्देश्य जिले में 500 मीटर ऊंचा एक सुंदर दक्षिण गर्ल्स बनाती हुई बढ़ती है यहां से यह दक्षिण पश्चिम में बहती पाकिस्तान में प्रवेश कर अंत में अरब सागर में मिल जाती है क्योंकि 5 सहायक नदी झेलम चिनाब रावी सतलुज और व्यास है पांच नदियों के इस प्रदेश को पंजाब करते हैं जल प्रभाव की मात्रा वक्त पर एक समान नहीं रहती है इसके जल का उपयोग कम पंजाब हरियाणा और राजस्थान के दक्षिण पश्चिम भागों में सिंचाई के लिए करते हैं गंगा नदी की लंबाई 2500 कि.मी से अधिक है या गंगोत्री हिमानी से निकल ली है हरिद्वार के पास गंगा पार्वती भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है इसकी सहायक नदी यमुना घाघरा खड़कपुर कोसी प्रमुख है यह नदियां उपजाऊ बाढ़ का मैदान बनाती है इन में नदी और तथा गोकुल जिले पाई जाती है अंबाला के निकट जल विभाजक द्वारा गंगा सिंधु नदी के प्रभाव क्षेत्र का विभाजन होता है पराईट भारत की कठोर भूमि से लेकर आने वाली चंबल केन बेतवा सोनू और दामोदर नदी की भी गंगा प्रणाली का अंग है इन पर बड़े बड़े बांध बनाए गए हैं जिनसे जल विद्युत और सिंचाई की जाती है दक्षिण की ओर बहती हुई गंगा डाटा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है गंगा की मुख्यधारा बांग्लादेश में प्रवेश कर जाती है यह ब्रह्मपुत्र नदी से मिलने के बाद इसे मेघना कहते हैं ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र कैलाश पर्वत मानसरोवर झील के निकट इसका उत्तर गंज है हिमालय पर्वत के समान पर प्रवाहित होती हुई यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है भारत में इसका प्रभाव 1400 किमी है इसकी सहायता और सहायक नदी थीम पार्क रोहित जन श्री कल याद आती है अधिक वर्षा के क्षेत्र में बहने के कारण ही उसमें अवसाद अधिक होते हैं जिनके  प्रतिवर्ष बढ़ जाती है नदियों का प्रभाव बदलता रहता है नदी दीपों का भी निर्माण होता है तिब्बत में ऐसे शाखों भारत में भ्रम और भारत में ब्रह्मपुत्र एवं बांग्लादेश में पदमा और मैं* नाम से जाना जाता है यह भर्ती हुई विशाल डेल्टा का निर्माण करती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है प्रायद्वीपीय भारत का नदिया भारती प्रदीप की नदियों की विशेषता है कि यह मौसम यह मौसम शुष्क क्षेत्र से प्रवाहित होती है इन की लंबाई भी हिमालय से निकली वाली नदी से कम है यह घर है जम्मू के मैदान नहीं बनाती जो पश्चिम तट के निकट उत्तर से दक्षिण की तरह भाग कि अधिकतर नदियों जैसे महानदी गोदावरी कृष्णा कावेरी पूर्व की ओर जाती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है यह डेल्टा बनाती पश्चिम घाट से पश्चिम में बहने वाली नदी छोटी नर्मदा एवं ताप्ती दो ही बड़ी नदियों है जो पश्चिम की ओर बस घाटी में बहती है और जवाहर मूंग और ग्वार मुखी का निर्माण करने के उपरांत अरब सागर में मिलती है नर्मदा नदी तापी नदी गोदावरी नदी महानदी कृष्ण नदी कावेरी नदी आदि.।

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