कुछ लोगों को शिकायतें करने की बीमारी होती है अगर गर्मी है तो बहुत गर्मी है अगर ठंड तो बहुत ठंड है उनके लिए हर दिन खराब है जब सब कुछ ठीक-ठाक हो तो वह शिकायतें करते हैं शिकायत करना अच्छा क्यों नहीं है क्योंकि अगर आपको समस्या है तो 50% लोग इस बात की परवाह ही नहीं करते और दूसरे 50% लोग इसलिए खुश होते हैं कि आप को कोई समस्या है फिर शिकायत करने से फायदा क्या है इससे कोई नतीजा नहीं निकलता है यह शख्स का हिस्सा बन जाती है यह इसका यह मतलब हुआ कि हमें कभी शिकायत नहीं करनी चाहिए या शिकायत का मौका नहीं देना चाहिए सब स्कूल नहीं है ठीक आलोचना की तरह अगर इसे सही ढंग से किया जाए तो शिकायत उपयोगी भी हो सकती है रचनात्मक ढंग से की गई शिकायत यह दिखाती है कि शिकायत करने वाला परवाह करता है जिंदगी शिकायत होती है उसे सुधार कर दूसरा मौका मिलना है जब जब झूठ में शामिल होने की इच्छा सही काम पर डंडे रहने की इच्छा से ज्यादा प्रबल होती है तो साफ़ है कि जिसकी कमी है वह सास और चरित्र आप बस या हंसी मजाक के प्राप्त नहीं बनाते झूठ के साथ चलने में सुविधा महसूस होती है आपके आसपास के लोग खुश रहते हैं और आप का मजाक बनाए जाने का डर नहीं रहता मगर यही पर पूछे स्वाभिमान वाले लोग एक सीमा किस लेते हैं यही पर बड़े और छोटे का फर्क पता चल जाता है इस तरह की बातें सिर्फ निराशा को ही बढ़ावा देती है हम अपनी नजरों में खुदको ही छोटा बना देते हैं और नीचे गिरा देते हैं जल्दी हमारा दिमाग इन बातों पर यकीन करना शुरू कर देता है और हमारा व्यवहार भी उसी के नुकसान बदले लगता है फिर हम इन्हीं खयालों से खुद को भरने लगते हैं कि शिकायत करना गलत बात है.।
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