एक किसान ने अपने पड़ोसी की निंदा की अपनी गलती का एहसास होने पर वफादारी के पास पहुंचता साफ करने लगा पधारी ने उससे कहा कि वह पंखों से भरा एक अकेला शहर के बीचोबीच भी कर दें किसान वही किया फिर पधारी ने कहा कि जाओ और सभी पंखे लेने बाहर लाओ किसान ऐसा करने की बहुत कोशिश की मगर सारे पंख हवा से इधर उधर उड़ गए थे जब वह खाली थैला लेकर लौटा तो पधारी ने कहा कि यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है तुमने बात तो आसानी से कर दी लेकिन उसे वापस नहीं ले सकते इसलिए शब्दों के चुनाव में बहुत ज्यादा सावधानी बरतो जब मैं आलोचना की बात करता हूं तो मेरा मतलब नकारात्मक आलोचक से है हम आलोचक क्यों ना करें जब किसी की बुराई की जाती है तो उसका खेरिया खुद को बचाने का हो जाता है किसका इसका मतलब है कि हमें कभी आलोचना नहीं करनी चाहिए यह क्या हम सही आलोचना कर सकते हैं एक आलोचक एक ड्राइवर को पागल बना देने वाले व्यक्ति ड्राइवर की तरह होता है रचनात्मक आलोचना क्या है इसका मतलब मदद करने के उद्देश्य से की गई आलोचना बजाए नीचे देखने की आलोचना व्यक्ति की क्योंकि जब हम व्यक्ति को आलोचना करते हैं तो उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है सहायता करने की इच्छा होने पर ही आलोचना करने का हक मिलता है जब तक आलोचना देने वाले को खुद दायक है तब तक उसे सही तरीके से आलोचना करने का हक है और जब आलोचना देने वाले को आनंद देने लगे तो उसे आलोचना करने का कोई हक नहीं है कोच बने सहायता करने की भावनाओं से आलोचना करें कुछ अपने खिलाड़ियों को आलोचना उनके खेल को सुधारने के लिए करता है दूसरों को समझाना और अपनी परवाह करना एक प्रेस का काम करता है नजरिया का लक्ष्य सुधारने वाला होना चाहिए ना कि सजा देने वाला यह करने के बजाय कि तुम हमेशा याद तुम कभी अपनी आलोचना सीधे शब्दों में करें घुमा फिरा कर बात करना तकलीफ देती है असलियत या हकीकत को जाने बिना सोचे समझे किसी बात का मतलब ना निकाले हमें अपनी राय रखने का तो हक है लेकिन गलत तथ्यों को स्वीकार करने का हक नहीं आलोचना करने में जल्दबाजी ना करें शांत रहे हैं समझने के लिए करें ना कि डराने धमकाने के लिए अगर आलोचना सही तरीके से की जाए तो इसका जरूरत बार-बार नहीं पड़ती है आलोचना हमेशा अकेले में करें सबके सामने नहीं ऐसा क्यों क्योंकि ऐसा करने से स्वाभिमान बना रहता है जबकि दूसरों के सामने आलोचना करना मान जनक हो सकता है दूसरे इंसान को अपनी सफाई में करने का मौका दे गलतियां सुधारने के फायदे बताएं वरना सुधारने के नुकसान भी काम की आलोचना करें काम करने वाले कि नहीं आप से नाराज की आलोचना में ना लाएं सुधार के लिए सलाह मशवरा ले काम पर उंगली उठाए रात भर नहीं अगर इरादे पर ही सकते हो तो संबंध तोड़ देना ही बेहतर हो सकता है आलोचना दायरे में ही सीमित है इसे जरूरत से ज्यादा ना करें आलोचना दवा देने की तरह है दवा सही मात्रा में देना या लेना ठीक है ज्यादा देने से नुकसान होगा और कम का असर नहीं होगा उसी तरह सोचना भी दायरे में होनी चाहिए सही ढंग से की जाने पर यह बहुत फायदेमंद हो सकती है आलोचना करने पर अगर लोग अपनी गलतियां सुधार लेते हैं और सही कदम उठाते हैं तो उन्हें शाबाशी दे अपनी बात और प्रसाद के साथ खत्म करें.।
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