भरोसा अपनी आदत है.।

मेरा विश्वास है कि ज्यादातर रिश्ते भरोसे पर आधारित होते हैं जैसे कि मालिक नौकर मां बाप बच्चा पति पत्नी गुरु विद्यार्थी खरीदने वाला बजने वाला और ग्राहक सेल्समेन बिना निष्ठा और ईमानदारी के भरोसा कैसे हो सकता है भरोसे का संकट में प्रलय का मतलब है सच्चाई कब संकट में पढ़ना भरोसा भरोसेमंद बनने का नतीजा .।
प्र●किन किन बातों से भरोसा पैदा होता है..
●विश्वसनीयता कमिटमेंट कैसे आती है और पहले से अंदाजा लगाने की क्षमता देती है.।
● स्थिरता विश्वास बनाती है.।
● सलमान खान और दूसरों के प्रति निष्ठा और परवाह करने का भाव पैदा करता है.।
● निष्पक्षता न्याय और दुष्प्रभाव को जगाती है.।
● खुलापन बिना संकोच के हर चीज के लिए खुला रास्ता.।
● समता कथनी और करनी में समानता होती है अगर कोई कहता कुछ और करता कुछ है तो आप उसका कैसे यकीन करोगी.।
● निपुणता काबिलियत और सेवा की भावना से यह गुण आता है.।
● इमानदारी इमानदारी विश्वास का महत्वपूर्ण अंग है.।
● स्वीकृति सुधार के प्रयास के बावजूद हमें एक दूसरे के कमियों और खूबियों को एक हद तक कुबूल करने की जरूरत है.।
● चरित्र किसी इंसान में कितनी योग्यता क्यों ना हो लेकिन अगर वह चरित्रहीन है तो उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता.।
भरोसे का महत्व प्यार से भी ज्यादा हो सकता है हम कुछ लोगों को प्यार तो कर सकते हैं लेकिन उन पर भरोसा नहीं कर सकते रिश्ते बैंक अकाउंट की तरह है हम इन में कितना जमा करते हैं उतने ही वह बढ़ते जाते हैं इसलिए हम उतना ही निकाल भी सकते हैं लेकिन आगे आप बिना + की निकालने की कोशिश करेंगे तो निराशा ही हाथ आएगी कहीं पर हम महसूस करते हैं कि हमने ज्यादा निकाल लिया है मगर सच्चाई होती है कि हमने बहुत कम ही जमा किया होता है.।
प्र● खराब रिश्ते और भरोसे की कमी के कुछ नतीजे नीचे बताए गए हैं.।
● तनाव
● खराब सेहत
● आपसी समझ की कमी
● अविश्वास
● चिड़चिड़ापन
● क्रोध
● बंद दिमाग किया संकुचित सोच
● पूर्वग्रह
● टीम स्पीड का अभाव
● आत्म बल का टूटना
● विश्व अनीता
● असहयोग का व्यवहार
● कमजोर स्वाभिमान
● टकराव
● संदेश
● निराश या मायूसी
● उत्पादकता में कमी
● उदासीनता
● अकेलापन.।

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