अपने शब्दों को सावधानी से चुनें.।

जो मन में आए वही बोलने से आदमी को बाद में वह सुनना पड़ता है जो उसे पसंद नहीं होता व्यवहारिक रुप से समझदार बने व्यवहारिक रुप से समझदार होने का मतलब है कि आप अपने शब्दों को चुनाव समझदारी और होशियारी से करें वह जाने की आप कितनी दूर तक जा सकते हैं इसका यह मतलब एक ही जानने की क्या कहें और क्या उनका छोड़ दे व्यवहार कुशलता के बिना प्रतिभा हमेशा काम नहीं आ सकती शब्दों से हमारा नजरिया झलकता है शब्द हमारी भावनाओं को चोट पहुंचा सकता है और हमारे रिश्ते को तोड़ सकता है लोगों को इतनी चोट तो कुदरत की वीणा से भी नहीं पहुंच कि जितनी किया शब्द या कठोर शब्दों से पहुंचती है सोच कर बोले ना कि बोल के सोचे बुद्धि मत और बेवकूफी में यही फर्क है जरूरत से ज्यादा बोलने का मतलब यह नहीं होता कि आप बातचीत में कुशाल है बोलिए कम कहिए ज्यादा एक बेवकूफ बिना सोचे समझे बोलता है एक बुद्धिमान सोच समझकर करता है कड़वाहट भरे शब्द लाइलाज नुकसान पहुंचा सकता है मां बाप जिस प्रकार अपने बच्चों से बातचीत करते हैं उसी से उनके भविष्य को आकार मिलता है.।

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