सफल और असफल एक के बाद दूसरा असर होता है.।

कामयाबी से कामयाबी और नाकामयाबी सेना कामयाबी का ही जन्म होता है इस गावत में बहुत बड़ी सच्चाई है अक्सर हम खेलों में देखते हैं कि जब एक चैपियन का उत्सव कम हो जाता है और कई बार कम होता है कि जब एक चैंपियन का उत्सव कम होता है तो सब कुछ उसे कभी भी किसी अच्छे खिलाड़ी के खिलाफ नहीं खेलता क्योंकि फिर से हार जाने पर उसका स्वाभिमान और गिर जाएगा उसका आत्मविश्वास वापस लाने के लिए कुछ उसे एक कमजोर प्रतिदिन उसका आत्मविश्वास लाने के लिए कुछ उसे एक कमजोर दृष्टि के साथ खिलाता है और उस जीत उसके स्वाभिमान को बढ़ाती है फिर थोड़े बेहतर स्थिति से जितना उसके आत्मविश्वास को और बढ़ा है यह सिलसिला कब तक चलता रहता है जब तक वह दिन ना आए की चैंपियन फाइनल चैलेंज के लिए तैयार हो जाए हर के सफलता के बाद आत्मविश्वास बढ़ता जाता है इस से अगली बार सफल होना आसान हो जाता है इसी वजह से कोई अच्छा है लीडर माता पिता टीचर या असफल लोगों या बच्चों के काम की शुरुआत आसान कामों से करवाते हैं हर एक सफल काम के बाद बच्चे का विश्वास और स्वाभिमान का स्तर बढ़ता है जाता है इस के साथ अगर अच्छा तो साहिल भी जोड़ दिया जाए तो यह अच्छा सा विमान का रूप लेना शुरु कर देता है अगर आप सोचते हैं कि आप हार गए हैं तो आप हारे हैं अगर आप सोचते हैं कि आप में हौसला नहीं है तो सचमुच नहीं है अगर आप जितना चाहते हैं मगर सोचते हैं कि जीत नहीं सकते तो निश्चित है कि आप नहीं जीतेंगे अगर आप सोचते हैं कि हार जाएंगे तो आप हार चुके हैं क्योंकि हम दुनिया में देखते हैं कि सफलता की शुरुआत इंसान की इच्छा से होती है यह सब कुछ हमारी सोच पर निर्भर करता है अगर आप सोचते हैं कि पिछड़ गए तो आप बिछड़ गए हैं तरकी करने के लिए आपको अपनी सोच ऊंची करनी होगी कोई भी सफलता प्राप्त करने पहले आपको अपने पति विश्वास लगाना होगा जीवन की लड़ाई हमेशा सिर्फ तेज और मजबूत लोग ही नहीं देते बल्कि आज नहीं तो कल जितना वही आदमी है जिसे यकीन है कि वह जीतेगा सभी जीवो में आदमी शारीरिक रूप से सबसे ज्यादा हंसी मगर कुदरत बड़ी समझदार है उस ने आदमी को सोचने की क्षमता का सबसे बड़ा तोहफा दिया है आदमी अपने हिसाब से माहौल को डाल लेता है जबकि जानवर को माहौल के अनुसार डालना पड़ता है अफसोस की बात है कि बहुत कम ही लोग महान तो फिर सोते हैं की क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर पाते जिंदगी का सफर DR की तरह है अपनी प्लेट लो पसंद का खाना डालो और बिल चुकाओ हर चुनाव का कोई ना कोई नतीजा होता है हम चुनाव के लिए आ जाते हैं लेकिन एक बार चूम लेते हैं वही चुनाव हमें कंट्रोल करने लगता है आसमान बनाने के लिए हम सब के पास सामान अवसर होते हैं चुनाव हमारा अपना है हम जिंदगी की तुलना उसको मार कर सकते जो मिट्टी से मनचाहे आकार के बर्तन बना लेता है ठीक उसी तरह हम भी अपनी जिंदगी को शीशे में चाहे डाल सकते हैं
इतना छोटा सा हो फिर भी इसका न्याय करनेवाली न्यायाधीश बुद्धि उसमें होती है। बेटियों में न्यायाधीश बुद्धि कम होती है। बेटियाँ हर वक्त उनकी माँ का ही पक्ष लेती हैं। लेकिन ये लड़के तो न्यायाधीश बुद्धिवाले, जानते हैं कि पापा का दोष है! फिर दो-चार व्यक्तियों को पापा का दोष बताते-बताते, निश्चय भी करता है कि बड़ा होकर सिखाऊँगा! बाद में बड़ा होने पर वैसा करता भी है। तेरी अमानत वापस तुझी को!बच्चों की मौजूदगी में नहीं लड़ना चाहिए। आप संस्कारी होने चाहिए। आपकी गलती हो तो भी पत्नी कहे, ‘कोई बात नहीं।’ और उसकी गलती हो तो आप कहो, ‘कोई बात नहीं।’ बच्चे ऐसा देखते हैं तो ऑल राइट (ठीक) होते जाते हैं। और अगर लड़ना हो तो इंतजार करना, जब बच्चे स्कूल जाएँ, तब जितना लड़ना हो उतना लड़ना। लेकिन बच्चों की उपस्थिति में ऐसा लड़ाई-झगड़ा हो, तो वे देखते हैं और फिर उनके मन में बचपन से पापा और मम्मी के लिए विरोधी भावना जन्म लेने लगती है। उनका सकारात्मक भाव छूटकर नकारात्मक शुरू हो ही जाता है। अर्थात् आजकल बच्चों को बिगाड़नेवाले माता-पिता ही हैं!यदि लड़ना हो तो एकांत में लड़ना, बच्चों की मौजूदगी में नहीं। एकांत में दरवाज़ा बंद करके दोनों को आमने-सामने लड़ना हो तो लड़ो।
महँगे आम लाए हों और उस आम का रस, साथ में रोटियाँ तैयार करके सब पत्नी नेपरोसा और भोजन की शुरूआत हुई। थोड़ा खाया और जैसे ही कढ़ी में हाथ डाला, थोड़ी खारी लगी कि डाइनिंग टेबल ठोककर कहता है कि ‘कढ़ी खारी बना दी।’ अरे! सीधी तरह खाना खा ले न! घर का मालिक, वहाँ कोई उसके ऊपर नहीं। वह खुद ही बॉस, इसलिए डाँट-डपट शुरू कर देता है। बच्चे डर जाते हैं कि पापा ऐसे पागल क्यों हो गए? लेकिन बोल नहीं सकते। क्योंकि बेचारे दबे हुए हैं, लेकिन मन में अभिप्राय बाँध लेते हैं कि पापा पागल लगते हैं।आप इसे किस तरह से लेते हैं, यह आप पर निर्भर करता है, क्योंकि हर असफलता आपको कुछ सिखाती है। असफलता में राह में मिलने वाली सीख को समझकर जो आगे बढ़ता जाता है वह सफलता को पा लेता है। सफलता के लिए जितना जरूरी लक्ष्य और योजना है, उतना ही जरूरी असफलता का सामना करने की ताकत भी।  जिस दिन आप तय करते हैं कि आपको सफलता पाना है, उसी दिन से अपने आपको असफलता का सामना करने के लिए तैयार कर लेना चाहिए, क्योंकि असफलता वह कसौटी है जिस पर आपको परखा जाता है कि आप सफलता के योग्य हैं या नहीं। यदि आप में दृढ़ इच्छाशक्ति है और आप हर असफलता की चुनौती का सामना कर आगे बढ़ने में सक्षम हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। तो हो जाइए तैयार सफलता की राह में आने वाली मुश्किलों का सामना करने के लिए, क्योंकि हर सफल व्यक्ति के पीछे उसकी असफलताओं की भी कहानी होती है।गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले अंग्रेज़ी की एक प्रेरक कहावत है- 'स्ट्रगल एंड शाइन।' यह वाक्य हमें बड़ी शक्ति देता है, जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में कठिनाईयां तो आती ही हैं और कभी-कभी तो इतने अप्रत्याशित कि संभलने का भी पूरा समय नहीं मिलता। यही तो जीवन की ठोकरें हैं जिन्हें खाकर ही हम संभलना सीख सकते हैं। उनसे बचने की कोशिश तो करना है, पर ठोकर कहते ही उसे हैं जो सावधानी के बाद भी लगती है और आखिर एक नई सीख भी दे जाती है। कभी-कभी जीवन में मुश्किलें एक के बाद एक या एक साथ भी कई आ जाती हैं और हम अपने आपको उनके जंगल में राह भटके हुए की तरह भ्रमित होते रहते हैं। जब हमें जीवन के कड़वे अनुभव होते हैं या कोई ठोकर लगती है तो उस समय हम हो सकता है कि विचलित हो जाएं, इससे उबरकर सीख भी मिलती है और जीवन में मुश्किलों का सामना करने का साहस भी आता है। फिर हम पाते हैं कि हमारी क्षमता भी बढ़ गई है और जीवन में हम और भी सफलता हासिल कर रहे हैं। तो मुश्किलों से घबराएं, नहीं बल्कि उनका सामना करें। आप पाएंगे कि आपको उन मुश्किलों ने और भी निखार दिया है।रसायन शास्त्र का एक नियम है, जो जिंदगी पर भी लागू होता है। जब कोई अणु टूटकर पुन: अपनी पूर्व अवस्था में आता है तो वह पहले से अधिक मज़बूत होता है। इसी तरह हम जब किसी परेशानी का सामना करने के बाद पहले से अधिक मज़बूत हो जाते हैं और जीवन में और भी तरक्की करते हैं बच्चों और खुद को असफलताओं की जंजीर से निकालकर सफल के क्रम में शामिल करना हमारी जिम्मेदारी है.।

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