एक अंधा युक्ति रोज रात्री के पहले पहर में दीपक जलाकर सड़क के किनारे बैठता किसी राहगीर ने पूछा सूरदास इससे तुम्हें क्या लाभ तुम्हें तो देखता तक नहीं अंधे ने कहा दीपक में राहगीरों की सुविधा के लिए जलाता हूं ताकि मैं अंधेरे में ठोकर खाने से बचें हर काम में स्वार्थ की ही द सिटी नहीं हो चाहिए परमात्मा भी विचारना चाहिए जैसे स्वामी रामतीर्थ उन दिनों अध्यापन का कार्य करते थे एक दिन उन्होंने कक्षा में ब्लैकबोर्ड पर एक लकीर खींच कर छात्रों से पूछा कि बिना पूछें उसे मिटाए कोई छात्र उसे छोटा कर दें सब छात्र दंग रह गए तभी एक छात्र ने उस छोटे लकीर के ऊपर एक बड़ी लकीर खींच दी चाहिए की दूसरी लकीर उस से छुट्टी हो चुकी थी स्वामी रामतीर्थ बोले इसका एक रानी है जीवन में महान बनने के लिए यह जरुरी नहीं कि किसी दूसरे व्यक्ति को मिटा दें या उसे छोटा दिखावे जरूरत तो इसकी होती है कि आप अपने गुणों से स्वयं को इतना महान बना ले कि वह युक्ति अपने आप छोटा बन जाए.
मानवता......
एक विद्यार्थी में बहुत सी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे जब उनकी शिक्षा पूरी हो गई तब गुरु को उनकी परीक्षा के आधार पर प्रथम स्थान किसी एक विद्यार्थी को देना था गुरु ने सभी विद्यार्थियों से एक ही प्रश्न किया कि बताओ तुम लोग किसकी पूजा करते हैं सब ने बारी बारी से अपना अपना उत्तर देना शुरू किया भगवान खुदा ईशा वाले गुरु अंन्त मैं एक सबसे छोटा विद्यार्थी बज गया गुरु ने उस छोटे से विद्यार्थी से पूर्ण वही प्रश्न किया तब उस विद्यार्थी ने अपने उत्तर में कहा कि मैं सबकी अच्छी बातों को मानता हूं और मैं सच्ची मानवता की पूजा करता हूं गुरु ने उस छोटे से विद्यार्थी को प्रथम स्थान दिया उसने धर्म की संकीर्णता से ऊपर उठकर से अच्छी बातों का कहा और उसे स्वीकार किया यही मानव जीवन है यही परोपकार होशियारी मानवता है.।
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