सफलता प्रकृति की सीढ़ी है जैसे.।

सफलता उस विजय का नाम है जिसने मनुष्य अपनी विव्दता का परिचय देता है सफलता प्रकृति की सीढ़ी कल आती है जो मनुष्य अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता रहता है वह अपने जीवन के लक्ष्य को पाने हेतु प्रगति की दौड़ में निभाती अपने जीवन के लक्ष्य को निर्मिति गति से आगे बढ़ाते रहता है यही प्रकृति की दौड़ उसे अपने मंजिल तक पहुंचने में असमर्थ होती है परंतु आपके मन में सहजे जिज्ञासा हो रही है की सफलता कैसे प्राप्त करें सफल ता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को निर्मित होते आधार पर चलना होगा दृढ़ संकल्प शाम कठिन और लगन यतीम यह गुंजन में मिल रहे वहीं सफलता छीन अर्थात सफलता प्राप्त करने के लिए हमें सर्वप्रथम लक्ष्य बिंदु बनाना होगा इस लक्ष्य का चुनाव विशेष सावधानी के साथ करना होगा क्योंकि सारी गतिविधि लक्ष्य को केंद्र मानकर ही उसके परित घूमती है दंड निक्षय से सफलता प्राप्ति कैसे होती है एक उदाहरण प्रस्तुत है...
तीन भाई थे जिसमें दो एक ही मां के थे एक सौतेली मां का तबियत दो भाई जो एक ही मां के थे तीसरी भाई से हमेशा सौतेला व्यवहार करते थे एक दिन उनके पिता जी ने अपने पुत्रों के कहे जाने पर टाइपराइटर खरीद कर लाए पिता ने अपने पुत्रों को टाइपराइटर सीखने को कहा एवं एक निश्चित तारीख बतला दि 21 तारीख को तीनों की परीक्षा होगी एक ही मां के दोनों पुत्र बारी-बारी से अभ्यास करने लगे एवं तीसरे भाई को अभ्यास करने का उत्तर ही नहीं देते थे जबकि तीसरा भाई अभ्यास करना चाहता था उसके दोनों भाई उसे मना कर देते थे एक दिन उस सौतेली मां के पुत्र ने दोनों भाइयों से तंग आकर अपने मन में ठान निश्चय कर लिया कि मैं परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करके ही रहूंगा वह हमेशा यही ताक में रहता था कि सेम दो भाई कब घर से बाहर जाए और मैं अभ्यास करो उसने अवसर पाकर टाइम पर आयकर की बोर्ड को एक कार्डबोर्ड पर उतार लिया एवं प्रतिदिन अभ्यास करने लगा परीक्षा की तारीख आ गई पिता ने तीनों भाइयों की परीक्षा ली जिसे दोनों भाई अभ्यास नहीं करने देते थे उस सौतेली मां के पुत्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया सफलता करण किसी भी कार्य की सफलता या असफलता उसके लिए की गई योजना पर निर्भर होती है। पूर्व नियोजित ढंग से किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होने की संभावनाएं काफी अधिक होती हैं। योजना के साथ ही व्यक्ति की दृढ़ इच्छा शक्ति भी उसे निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करती है।
लक्ष्य कैसे प्राप्त किया जाए इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किसी भी कार्य की शुरूआत से पहले हमें खुद से तीन सवाल पूछने चाहिए। ये तीन सवाल ही लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाओं को पार करने में मददगार साबित होंगे इसके साथ ही ये कार्य की सफलता भी सुनिश्चित करेंगे .।
ये तीन प्रश्न हैं-...
1) मैं ये क्यों कर रहा हूं.।
2)मेरे द्वारा किए जा रहे इस कार्य के परिणाम क्या-क्या हो सकते है.।
3) मैं जो कार्य प्रारंभ करने जा रहा हूं, क्या मैं सफल हो सकूंगा.।
इन तीन प्रश्नों पर गहराई से चिंतन करें। इसके बाद यदि आपको इन सवालों के संतोषजनक और सही जवाब मिल जाए, तभी कार्य को प्रारंभ करना चाहिए। यदि इन प्रश्नों के संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहे हैं तो बुद्धिमानी यही है कि उस कार्य को न किया जाए तीनों प्रश्नों के संतोषजनक जवाब मिलने के बाद आप अपने लक्ष्य की ओर बिना समय गवाएं आगे बढ़ सकते हैं फिर लक्ष्य तक पहुंचने में किसी भी प्रकार की बाधा को पार करने में आपस अवश्य सफल पाएंगे दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर आप हर कदम सफलता प्राप्त करेंगे अतः दृढ़ निश्चय  से सभी असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी सरल हो जाया करते हैं इसलिए कहा गया है दोस्तों किसी घ्येय प्राप्ति के लिए पूर्ण एकागता एवम् समयंंण आवश्यक है.।

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