एक चोर को सजा सुनाते हुए जज ने उससे पूछा कि...

एक चोर को सजा सुनाते हुए जज ने उससे पूछा कि उसे कुछ और कहना है उस चोर ने जवाब दिया कि हां मैं चाहता हूं कि मेरे माता पिता को भी मेरे साथ जेल भेजा जाए जज के वजह पूछने पर उस आदमी ने जवाब में कहा हुजूर जब मैं छोटा बच्चा था तो इस स्कूल से एक पेंसिल चुरा लाया लेकिन मेरे बाप बाप को मालूम होते ही उन्हें मुझे कुछ भी नहीं कहा उसके बाद मैंने एक पेन की चोरी की तो मां बाप ने मेरी चोरी को भी नजरअंदाज कर दिया उसके बाद मैंने स्कूल पड़ोस में कई चोरियों की ओर इस तरह चोरी करना मेरी आदत बन गई थी मेरे मां बाप ने इस बात को जानते हुए भी मुझे कभी नहीं होगा अगर किसी की मेरे साथ जेल में जगह है तो उनकी है उसका कहना सही है क्योंकि मां बाप द्वारा अपनी जिम्मेदारियां पूरी न किए जाने उन्हें भी दोषी बनाता है जिम्मेदारी चाहे किसी की भी हो लेकिन चोर अपनी जिंदगी से बच नहीं सकता बच्चों की पसंद नापसंद जानना जरूरी होता है और उन्हें सही रास्ता चुनने देने का मौका देना चाहिए लेकिन बगैर मगर देश के रास्ते चुनने देना बर्बादी लाता है तन और मन की मजबूरी का नतीजा त्याग और आत्मानुशासन मां बाप एक हफ्ते में बच्चे के साथ आम की बातचीत पर तकरीबन 15 मिनट का ही वक्त देते हैं बाकी समय उन्हें अपने हथियारों और TV से जो नेतिक मूल्य मिलते हैं उन्हें मनचाहे ढंग से इकट्ठे करने के लिए छोड़ दिया जाता है खुश तो पूछेंगे अनुशासन के बिना क्या एक कप्तान जहाज को सही ढंग से चला सकता है एक एथलीट दौड़ में जीत सकता है वायलिन वादक संगीत समारोह में अच्छी तरह से वायलिन बजा सकता है जवाब है बिल्कुल नहीं आज मैं क्यों हमने आपसी व्यवहार में या जिंदगी में एक खास मुकाम हासिल करने के लिए अनुशासन की जरूरी होने पर सवालिया निशान कहते हैं अनुशासन बेहद जरूरी आज की फिलॉसफी है अगर यह काम अच्छा लगता है तो करो मैंने कई बार मां बाप को बड़े भी भोलेपन के साथ करते सुना कि चाहेंगे कुछ भी कर रहे हैं लेकिन उन्हें इस से खुशी मिल गई है तो यह मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह क्या कर रहे हैं मैं उन से पूछता हूं क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चों को क्या करने से खुशी मिलती है अगर सड़क पर किसी को पीटने या उसका सामान छीन लेते हैं उन्हें खुशी मिलती है तो कैसे लोगों के लिए अंग्रेजी में एक लफ्ज़ है हिंदी में इसे कहते नीचता जीवन में जितना खुशी का महत्व है उतना ही महत्वपूण है कि वह खुशी हम कहां से और कैसे हासिल करते हैं यह हमारे नैतिक मूल्य अनुशासन और जिम्मेदारी का मिला-जुला नतीजा होता है हम अक्सर सुनते हैं जो तुम्हें अच्छा लगे वह करो इस बात का उल्टा भी उतना ही सही है कि जो करना जरूरी है उसे पसंद करो कई बार हमें ऐसे कामों को भी करना पड़ता है जीने करने की जरूरत होगी चाहे हमें पसंद हो या ना हो एक महान दिन भर काम करने के बाद घर आती है फिर घर के कामकाज नहीं बताती है बच्चों की देखभाल करती है और आखिर में थकी हारी सो जाती है आधी रात को बच्चा रोने लगता है ऐसे मैं थक कर सोए मां क्या उठना जाएगी मगर फिर भी उठती है क्यों प्यार फर्ज जिम्मेदारी हम सिर्फ भावनाओं के सहारे जिंदगी नहीं गुजार सकते ह में अनुशासन की भी जरूरत होती है चाय हमारी उम्र कितनी हो जिंदगी में कामयाबी कभी मिलती है जब हम अपनी इच्छाओं के शिकार होने की वजह व करें जो किया जाना चाहिए या जिसको करने की जरूरत है इसके लिए जरूरत है अनुशासन की.।

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