इन्सान ने विज्ञान के जरिये बहुत सी चीजों का निर्माण किया हैं और आज इन्सान सफ़लता के शिखर तक पहुच चूका हैं, लेकिन फिर भी वो वास्तव में सबसे बड़ा नहीं हैं, आज हम इस कहानी में आपको यही बताने जा रहे हैं की सबसे बड़ा कोण हैं एक दिन भगवान स्वर्ग में आराम कर रहे थे तभी एक वैज्ञानिक ने उनसे कहा की, “भगवान, अब और हमें आपकी जरुरत नही है. विज्ञान ने आखिर ज़िन्दगी बनाना ढूंढ ही लिया है. यानि अब हम भी वही कर सकते है जो आप शुरू में करते थे.
भगवान ने जवाब दिया, “ओह, तो ऐसा है. मुझे भी बताओ…तभी वैज्ञानिक ने कहा, “अच्छा ठीक है, हमने मिटटी ली और उसे समानता में फैलाया और उसमें ज़िन्दगी के गुण डाले, और इसी से इंसान का निर्माण होता है.”भगवान ने जवाब दिया, “बहोत खुब, ये तो मजेदार है….मुझे भी दिखाओ.”तभी वह वैज्ञानिक धरती की ओर झुका, और मिटटी को इंसान के साँचे में ढालने लगा.तभी भगवान ने कहा की, “नहीं..नही…नही…., तुम अपनी मिटटी लो.” इसलिए उसने अपनी पत्नी से उस बोतल को ढक्कन लगाने और अलमारी में रखने कहा। लड़के की मम्मी रसोईघर में तल्लिन थी, वो ये बात पूरी तरह से भूल गयी थी।लड़के ने वो बोतल देखि और खेलने के इरादे से उस बोतल की ओर गया, बोतल के कलर ने उसे मोह लिया था इसलिए उसने उसमे की दवाई पूरी पी ली थी। उस दवाई की छोटे बच्चो को छोटी सी मात्रा भी जहरीली हो सकती थी।
जब वह लड़का निचे गिरा, तब उसकी मम्मी उसे जल्द से जल्द दवाखाने ले गयी जहा उसकी मौत हो गयी। उसकी मम्मी पूरी तरह से हैरान हो गयी थी, वह भयभीत हो गयी थी, के कैसे वो अब अपने पति का सामना करेंआपको क्या लगता है कोनसे होंगे वो चार शब्द?उसके पति का अनअपेक्षित व्यवहा आश्चर्यचकित करने वाला था। उसका लड़का मर चूका था। वो उसे कभी वापिस नहीं ला सकता था। और वो उसकी पत्नी में भी कोई कसूर नहीं ढूंड सकता था। इसके अलावा, आगे उसने खुद ने वह बोतल उठाके बाजू में रख दी होती तो आज उसके साथ यह सब न होता।वो किसी पर भी आरोप नहीं लगा सकता था। उसकी पत्नी ने भी उनका एकलौता बेटा खो दिया था। उस समय उसे सिर्फ अपने पति से सहानुभूति और दिलासा चाहिये थी। और यही उसके पति ने उस समय उसे दिया।कभी-कभी हम इसी में समय व्यर्थ कर देते है की परिस्थिती के लिए कोन जिम्मेदार है ? या कोण आरोपी है ? ये सब हमारे आपसी रिश्तो में होता है। जहा जॉब करते है वहा या जिन लोगो को हम जानते है उस सभी के साथ होता है, और परिस्थिती के आवेश में आकर हम अपने रिश्तो को भूल जाते है और एक दुसरे का सहारा बनने के बजाये एक दुसरे पर आरोप लगाते है। कुछ भी हो जाये, हम उस व्यक्ति को कभी भी नहीं भूल सकते जिसे हम प्रेम करते है, इसीलिए जीवन में जो आसान है उसे प्रेम करो। आपके पास अभी जो है उसे जमा करो। और अपनी तकलीफों को विचार कर-कर के बढ़ाने के बजाये उन्हें भूल जाओ। उन सभी चीजो का सामना करो जो आपको अभी मुश्किल लगती है या जिनसे आपको डर लगता है सामना करने के बाद आप देखोंगे के वो चीजे उतनी मुश्किल नहीं है जितना की आप पहले सोच रहे थे। हमें परिस्थिती को समझकर ही लोगो के साथ व्यवहार करना चाहिये, और लोगो कठिन परिस्थितियों में उनका हमदर्द बनना चाहिये एक बात हमेशा याद रखे चाहे हम कितने भी बड़े क्यों ना हो जाये, वास्तव में हम भगवान से हमेशा छोटे ही रहेंगे. क्योकि वही है जिन्होंने इस सृष्टि का निर्माण किया है, पशु, पक्षी, प्राणी, मानव हम सभी उन्ही की कृति है. वे समस्त ब्रह्माण्ड के रचयिता है. हा ये 100% सच है की आज विज्ञानं की मदद से हम चाँद पर भी पहोच सकते है लेकिन हम दूसरा चाँद कभी नही बना सकते. दुनिया में कई ऐसी प्राकृतिक चीजे है जिनकी उत्पत्ति का कारन जान पाने में विज्ञानं भी असफल रहा है. इसीलिए हमें भगवान के साथ कभी मुकाबला नही करना चाहिये. उन्ही द्वारा निर्मित सृष्टि का हम एक अंश है. हमें सदैव उनपर भरोसा रखना चाहिये, वे कभी हमारा बुरा नही चाहेंगे. भगवान ने इस सुन्दर ब्रह्माण्ड की निर्मिती हमारे लिए ही की है तो हमें अपने विज्ञान का उपयोग उनकी सुन्दर कृति को बचाने में करना चाहिये ना की नष्ट करने में.
जब ईशवार का हात जीस पर वह है भागय उसका.।
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