एक समय की बात है, एक लकडहारा एक लकड़ी के व्यापारी से कोई काम मांगने आया और उसे वहा काम मिल भी गया. वे उसे अच्छे खासे पैसे देते थे इसी वजह से उस लकडहारे ने अपनी तरफ से सबसे अच्छा काम करने का निश्चय किया.उसके मालिक ने उसे एक कुल्हाड़ी दी और जिससें उसे लकड़ी काटनी थी.पहले ही दिन, उस लकडहारे ने 18 पेड़ लाये.युवा लड़के काफी महेनती काम करते थे। बल्कि वे अपने ब्रेक टाइम में भी लगातार काम करते रहते और हमेशा शिकायत करते थे की वृद्ध लोग व्यर्थ समय गवाते है, दिन में कयी बार ब्रेक लेते है और लगातार एक दुसरे से बाते करते रहते है। जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे युवा लडको ने पाया की उनके ज्यादा समय और ब्रेक टाइम में काम करने के बावजूद वृद्ध लोग उन्ही के जितनी लकड़ियाँ काटते थे और कभी-कभी तो यह संख्या युवा लडको से ज्यादा भी हो जाती थी। यह देखकर युवा लडको को लगा की शायद वृद्ध लोग ब्रेक टाइम में भी छुपकर काम करते होंगे। इसीलिए युवा लडको ने निर्णय लिया की वे अगले दिन से और ज्यादा मेहनत लगाकर काम करेंगे, लेकिन फिर भी दुर्भाग्य से नतीजा ख़राब ही रहा।एक दिन, किसी वृद्ध पुरुष ने युवा लड़के को ब्रेकटाइम में ड्रिंक के लिए आमंत्रित किया। लेकिन उस युवा लड़के ने आने से इंकार कर दिया और कहा की उनके पास व्यर्थ समय नही है। यह सुनकर ही वृद्ध पुरुष उस युवा लड़के की तरफ देखकर मुस्कुराया और कहा की अपने चाकू की धार समय-समय पर तेज़ किये बिना ही पेड़ो को लगातार काटते रहना समय और मेहनत दोनों व्यर्थ गवाने के बराबर है। आज या कल कभी न कभी तुम हार मान ही लोंगे और पूरी तरह से थकने के बाद तुम्हे ज्ञात होगा की तुमने बहुत सी उर्जा व्यर्थ गवा दी है।यह सुनकर अचानक ही उस युवा लड़के को याद आया की ब्रेक टाइम में वृद्ध पुरुष बाते करने के साथ-साथ अपने चाकू की धार को भी तेज़ किया करते थे! और इसी वजह से वे कम समय में हमसे ज्यादा लकड़ियाँ काट पाते थे! फिर वृद्ध पुरुष ने कहा की हमें अपनी कार्यक्षमता का उपयोग हमारी योग्यता और ज्ञान के आधार पर करना चाहिये। तभी हम कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा काम कर सकेंगे।वर्ना आप हमेशा यही करते रहोगे की – मेरे पास समय नही है काम करते समय थोडा ब्रेक लेने से आपको ताजगी मिलेगी, आपकी सोच तेज़ होगी और आप तेज़ी से काम कर पाओगे। लेकिन ब्रेक लेने के बाद हमें काम करना नही छोड़ देना चाहिए बल्कि हमें ब्रेक के बाद किये जाने वाले काम की सही योजना बनानी चाहिए।अच्छा सोचे, अच्छे से काम करे और अच्छा आराम करे।
मजदुर गर्मी और सर्दी की परवाह किये बगैर सबसे अधिक मेहनत करता है और कंपनी का मालिक एयरकंडीशनिंग ऑफिस में बैठकर आर्डर देता है। लेकिन फिर भी कंपनी के मालिक की आमदनी, मजदुर की आमदनी से हजारो गुना ज्यादा होती है। ऐसा हम हर क्षेत्र में देखते है की जैसे-जैसे मेहनत कम होती जाती है वैसे-वैसे आमदनी बढती जाती है।दुनिया में इंसान से हजारो गुना शक्तिशाली प्राणी मौजूद है मालिक ने खुश होकर कहा, “बहोत अच्छे, बधाई हो!, इसी तरह आगे बढ़ते जाओ अपने मालिक के इन शब्दों से उसे बहोत प्रेरणा मिली, लकडहारे ने अगले दिन और अधिक मेहनत से काम किया, लेकिन उस दिन वह केवल 15 पेड़ ही ला पाया. तीसरे दिन उसने और ज्यादा कोशिश की, लेकिन तीसरे दिन भी वह केवल 10 पेड़ ही ला पाया. और जैसे-जैसे दिन बीतते गये पेड़ो की संख्या कम होते गयी.
ये सब देखते हुए उस लकडहारे ने सोचा की, “मै अपनी ताकत खोते जा रहा हु”. तभी वो अपने मालिक के पास गया और उस से क्षमा मांगने लगा, और कहने लगा की उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है की उसके साथ क्या हो रहा है.तभी मालिक ने पूछा की, “तुमने पिछली बार कब अपनी कुल्हाड़ी को तेज़ (धार देना) किया था?”
लकडहारे ने कहा की, “तेज़? मुझे कुल्हाड़ी तेज़ करने का समय ही नहीं मिलता. मै पेड़ो को काटने में ही व्यस्त रहता हु तब मालिक ने कहा की “बराबर हैं जब तुम्हें पहली बार कुल्हाड़ी दी थी तब वो बहुत तेज थी लेकिन जैसे जैसे उस कुल्हाड़ी से तुम पेड़ काट रहें हो तो उसकी तेज दिनबदिन कम हो रही हैं. और इसलिए तुम पहले जितनी ही मेहनत करके कम पेड़ काट पा रहें हो.
सिख –
हमारा जीवन भी इसी तरह का है. हम जीवन में इस कदर व्यस्त हो जाते है की हमारे पास कुल्हाड़ी तेज़ करने का समय ही नहीं होता है. आज की दुनिया में, हर कोई अपने-अपने कामो में पहले की तुलना में ज्यादा व्यस्त है, लेकिन फिर भी कम खुश है.ये सब क्यों? क्या ये सब इस वजह है की हम कैसे रहना ये भूल गये है? निच्छित ही हमारे जीवन में बहोत से काम हमें करने होते है. लेकिन इन सब कामो में व्यस्त होते हुए हम हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कामो जैसे अपना व्ययक्तिक जीवन,अपने सह-मित्रो को समय देना, अपने परिवार को समय देना, खुद को समय देना इन सभी को भूल जाते है.हम सभी को एक लम्बे आराम की जरुरत है ताकि हम खुद के जीवन के बारे में सोच सके, और आगे बढ़ने के बारे में सोच सके.।
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