चाहे कुछ भी हो कुछ लोग हर बात मैं नुकसान निकलते ही हैं इस बात से होने कोई मतलब नहीं कि आप किसी तरह है वह हमेशा दूसरी तरफ भी रहेंगे नुकसान निकालने कोई उन्होंने अपना कैरियर बना लिया है वह ब्याह वार्षिक आलोचक है वह से नुकसान निकालते हैं मान लो कोई कंपटीशन चल रहा हो और उसमें उंहें इनाम जीतना है तू अरे हर एक आदमी है रे काला तुम्हें कोई ना कोई नुकसान ढूंढ निकालेंगे हर घर परिवार या दफ्तर में आपको ऐसे लोग मिल जाएंगे ऐसे लोग हर जगह दूसरों के नुकसान की निकालते रहते हैं और सबसे कहते हैं कि हर चीज का कितना बुरा हाल है और अपनी मुसीबतों के लिए सारी दुनिया को जिम्मेदार ठहरा हैं ऐसे आदमियों के लिए एक नाम है यह लोग ताकत को छू लेने वाले कल आते हैं ऐसे लोग किसी के फैक्ट्रियां में जाएंगे और इस बहाने से विश्व कप चाय काफी और सिगरेट पी कर दिल बनाएंगे कि वह राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं ऐसा करने से खुद के लिए आसपास के लोगों के लिए ज्यादा तनाव बढ़ाते हुए प्लेग की बीमारी की तरह हर तरफ मायूसी का पैगाम पिलाते हैं और ऐसा माहौल पैदा करते हैं जिसके नतीजे बुरे या गलत हो रॉबर्ट फुलपोर्न ने भाप से चलने वाली नाव की खोज की हडसन नदी के किनारे वह अपनी नई खोज का प्रदूषण कर रहे थे वहां कुछ निराशावादी और शक्की मिजाज लोग भी इस खोज को देखने के लिए था हुए उन्होंने कहा कि यह नाम तो अभी कभी चलेगी कि नहीं आहिस्ता आहिस्ता व नाव चल पड़ी और जैसे ही वह नदी में आगे बढ़ने शुरू हुई तो जो कहते थे कि नाव चलेगी नहीं वही निराशावादी लोग चिल्लाने लगे कि अब यह नाव को कभी रुकेगी कि नहीं यह भी क्या नजरिया है.।
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