क्या हम नजरिया लेकर पैदा होते हैं या यह उम्र के साथ विकसित होता है वह कौन से कारक हैं जो हमारा नजरिया बनाने बनाते हैं अगर अपने माहौल की वजह से जिंदगी के प्रति आपका नजरिया नकारात्मक है तो क्या आप इसे बदल सकते हैं हमारे नजरिया का ज्यादातर हिस्सा हमारी कच्ची उम्र के दौलत दौरान ही रोक लेता है.
माहौल रूप से यह तीन कारक हमारे नजरिया को तय करते हैं.
1. माहौल
2.तजुर्बा
3.शिक्षा
जीने हम नजरिया के 3 इयर्स कर सकते हैं आइए अब अलग-अलग इन तीनों पर नजर डालें.
1.माहौल.
माहौल नीचे लिखी बातों से बनता है.
प्र. घर संघात्मक या नकारात्मक असर.
प्र. स्कूल साथियों का दबाव.
प्र. दफ्तर मदद करने वाले या ज्यादा मीन मेक
निकालने वाले या आलोचक सुपरवाइजर.
प्र. मीडिया टेलीविजन अकबर मेग्जीन रेडियो फिल्में.
प्र. सांस्कृतिक पृष्ठभूमि.
प्र. धार्मिक फर्स्ट भूमि.
प्र. परंपराएँ और आस्थाएं.
प्र. सामाजिक माहौल .
प्र.राजनीतिक माहौल.
यह सारे माहौल मिलकर एक अजीब बनाते हैं चाहे घर हो या दफ्तर हो या देश हो हर किसी की अपनी तकलीफ होती है क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि जब आप किसी दुकान पर जाते हैं वहां का सेल्समेन अदब वाला होता है और वहां का सुपरवाइजर और मैनेजर और मालिक भी अदब वाले होते हैं लेकिन जब आप दूसरी दुकान पर जाते हैं तो बातें कि वह हर कोई बड़ा रुका और बदतमीज है आप किसी के घर जाते हैं तो वहां बच्चों और उनके मां बाप सभी को अच्छा व्यवहार वाला तमीज वाला और खयाल रखने वाले पाते हैं जब आप दूसरे घर में जाते हैं तो वहां के लोगों को आपस में कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ते झगड़ते ही पाते हैं जिस देश की सरकार और राजनीतिक माहौल में ईमानदारी होती है वहां के लोग भी आमतौर पर इमानदार मददगार और कानून का पालन करने वाले होते हैं इसका उल्टा भी उड़ था उतना ही सच है जिस तरह बेईमान और भ्रष्ट माहौल में एक इमानदार आदमी का जीना मुश्किल हो जाता है उसी तरह ईमानदारी से भरे माहौल में बीमा नियुक्ति को मुश्किल होती है अच्छे माहौल में मामूली कर्मचारी की भी काम करने की शक्ति बढ़ जाती है जब की घटिया माहौल में अच्छा काम करने वाले की कार्य क्षमता गिर जाती है किसी भी जगह HD ऊपर से नीचे आती है नीचे से ऊपर कभी नहीं हमें पीछे मुड़कर देखना चाहिए कि हमने अपने लिए और अपने आसपास के लोगों के लिए कैसा माहौल बनाया है घटिया माहौल में अच्छे बिहार की उम्मीद करना भी मुश्किल है जहां कानून का ना होना ही कानून बन जाता है वहां ईमानदार नागरिक भी चोर उचक्के और बेईमान हो जाते हैं क्या यही वह समय नहीं है जब हमें जानना और पर खाना चाहिए कि हम किसी माहौल में हमने अपने लिए दूसरों के लिए कैसा माहौल बनाया है.।
2.. तजुर्बा
जिंदगी में लोगों से और हालातों से जैसा हमारा अनुभव होता है उसी के अनुसार हमारा व्यवहार बदलता है अगर किसी युक्ति के साथ हमारा अनुभव अच्छा होता है तो उसके प्रति हमारा नजरिया भी अच्छा होता है इसका मुलाकात भी उतना ही सच है.।
3. शिक्षा
मैं सिर्फ असर के ज्ञान या डिग्री की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की शिक्षा की बात कर रहा हूं जब ज्ञान को योजना बंध तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो वह बुद्धिमता में बदल बदल जाता है और कामयाबी एक तरह से पक्की हो जाती है में शिक्षा की बात एक युवक अर्थ मैं कर रहा हूं इसमें शिक्षक ज्ञानी शिक्षा देने वाले की भूमिका बड़ी हम होती है शिक्षक का असर अनंत है इसके अंदर के नारे अनगिनित है हम सूचनाओं के समुद्र में तो डूब रहे हैं लेकिन सही ज्ञान और समझ के लिए तरस रहे हैं शिक्षा तो ऐसी होनी चाहिए जो हमें ना केवल रोजी रोटी कमाना सीखा है बल्कि हमें जीना भी सिखा
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